MC शिमला मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के मामले में हिमाचल हाईकोर्ट में हुई बहस, 2 मार्च को अगली सुनवाई
शिमला नगर निगम महापौर का कार्यकाल बढ़ाने के मामले में हाईकोर्ट CJ की डिवीजन बेंच सुनवाई हुई.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 24, 2026 at 9:18 AM IST
|Updated : February 24, 2026 at 6:42 PM IST
शिमला: शिमला नगर निगम के मेयर का कार्यकाल बढ़ाने वाले मामले में आज (मंगलवार, 24 फरवरी को) हिमाचल हाईकोर्ट में फ़िर सुनवाई हुई. उच्च अदालत में सुनवाई के दौरान इस मामले पर दोनों पक्षों की ओर से बहस की गई. हिमाचल हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामला सुना. इस मामले पर अदालत में अभी बहस होनी है. ऐसे में 2 मार्च को मामले में अगली सुनवाई होगी.
5 साल कार्यकाल के लिए कोई कानून न होने की दलील
हिमाचल हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बहस की गई. इस दौरान वादी पक्ष ने दलील दोहराते हुए कहा कि शिमला महापौर का कार्यकाल वर्ष करने वाला कोई कानून मौजूद नहीं है. इसके अलावा याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि रोस्टर के मुताबिक महापौर के पद पर महिला का चुनाव होना था ऐसे में राज्य सरकार का महापौर के कार्यकाल को बढ़ाने का फैसला इस रोस्टर के विरुद्ध है.
मेयर का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा विधेयक - AG
वहीं, मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता अनुप रतन अदालत में पेश हुए. AG अनूप रतन ने अदालत में राज्य का पक्ष रखते हुए आर्गुमेंट की. AG अनूप रतन की ओर से अदालत में कहा गया कि इस संबंध में राज्य सरकार ने बीते 18 फरवरी को विधानसभा से एक बार फिर विधेयक पारित किया है. अब विधेयक को राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा गया है. राज्यपाल से स्वीकृति के बाद महापौर का कार्यकाल 5 साल होने का कानून लागू होगा.
सरकार ने ऑर्डिनेंस लाकर बढ़ाया था कार्यकाल
बीते साल अक्टूबर महीने में हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अध्यादेश लाकर MC शिमला के मेयर का कार्यकाल बढ़ाया था. इसके बाद राज्य सरकार ने विधानसभा से विधेयक पारित करके राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा था. लेकिन, यह विधेयक राज्यपाल के पास लंबित पड़ा रहा. अब सरकार ने दोबारा महापौर का कार्यकाल बढ़ाने के संबंध में विधानसभा से विधायक पारित करके राज्यपाल को स्वीकृति के लिए भेजा है.
राज्य सरकार के फैसले को हाई कोर्ट में मिली चुनौती
राज्य सरकार के इस फैसले को अधिवक्ता अंजलि सोनी वर्मा ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है. बाद में भाजपा पार्षद आशा शर्मा, कमलेश मेहता और सरोज ठाकुर ने भी अदालत से वादी बनाए जाने का आवेदन किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया गया था. याचिकाकर्ता का आरोप है कि हिमाचल सरकार का अध्यादेश हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 36 के खिलाफ है. इसके अलावा याचिका में कहा गया कि रोस्टर के अनुसार शिमला नगर निगम मेयर का पद महिला के लिए आरक्षित था. लेकिन, सरकार का अध्यादेश इस रोस्टर के विपरीत है. मामले में राज्य सरकार के शहरी विभाग, राज्य निर्वाचन आयोग और शिमला एमसी के मौजूदा मेयर सुरेंद्र चौहान को पार्टी बनाया गया है.
ये भी पढ़ें: हिमाचल में शराब इकाइयों की ई-नीलामी प्रक्रिया आज से शुरू, जानें कब से कब तक होगी लागू?

