डिस्टर्ब एरिया बिल पर रार: विरोध में उतरी कांग्रेस, कहा- राजस्थान को गुजरात मॉडल की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे
'डिस्टर्ब एरिया बिल 2026' का कांग्रेस, मुस्लिम संगठनों एवं सिविल सोसाइटी ने विरोध किया है. इसे ध्रुवीकरण करने वाला बताया है.

Published : January 22, 2026 at 3:38 PM IST
जयपुर: भजनलाल सरकार द्वारा लाए जा रहे 'डिस्टर्ब एरिया बिल 2026' को लेकर राजनीतिक व सामाजिक विरोध तेज हो गया है. इस बिल पर राज्य की कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद कांग्रेस, सिविल सोसाइटी और मुस्लिम संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस ने इसे 'संविधान विरोधी' व 'समाज विरोधी' बताते हुए चेतावनी दी है कि वह राजस्थान को 'गुजरात मॉडल' की प्रयोगशाला नहीं बनने देगी.
कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने कहा कि यह बिल पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है और आवश्यकता पड़ने पर पार्टी इस मामले को अदालत में ले जाएगी. उन्होंने सवाल उठाया कि अशांत क्षेत्र का पैमाना क्या होगा और इसका निर्धारण कौन करेगा. उन्होंने गुजरात के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि 2002 के बाद अहमदाबाद के कुछ इलाकों को अशांत घोषित किया गया था, जिससे वहां के निवासियों को रोजगार व पलायन में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं. कागजी ने जोर देकर कहा कि संपत्ति खरीदना-बेचना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और यह बिल उसका हनन करता है.
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बिल पर पहले ही आपत्ति जताते हुए इसे लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध बताया था. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी बिल की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह भाजपा की 'फूट डालो और राज करो' की मानसिकता को दर्शाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों व जनाक्रोश से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवादास्पद मुद्दे उछाल रही है. जूली ने चेतावनी दी कि कांग्रेस विधानसभा सत्र के भीतर और बाहर, सड़कों तक इस बिल का पुरजोर विरोध करेगी.
भूमाफियाओं को मिलेगा: राजस्थान वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष खानु खान बुधवाली वाली ने आरोप लगाया कि यह बिल वास्तव में भूमाफियाओं को बढ़ावा देने के लिए लाया जा रहा है. उन्होंने तर्क दिया कि जब कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति स्वतंत्र रूप से नहीं बेच पाएगा, तो वह उसे औने-पौने दामों पर माफियाओं के हाथों गंवाने को मजबूर होगा. उन्होंने कहा कि भाजपा के किसी भी मंत्री को इस बिल का पूरा नाम तक याद नहीं होगा.
ध्रुवीकरण को मिलेगा बढ़ावा: जमात ए इस्लामी हिंदी के प्रदेशाध्यक्ष मोहम्मद नाजिम ने भी बिल पर गंभीर चिंता जताई. उनका कहना है कि सरकार अपनी दो साल की नाकामी छुपाने और ध्रुवीकरण करने के लिए यह बिल ला रही है. नाजिम ने सवाल किया कि कोई सरकार अपने ही प्रदेश के क्षेत्र को 'अशांत' कैसे घोषित कर सकती है? उन्होंने आशंका जताई कि पहले एक क्षेत्र, फिर दूसरे और अंततः पूरे जिले को अशांत घोषित कर दिया जाएगा, जिससे सामान्य नागरिकों का जीवन दुष्कर हो जाएगा. सभी विरोधी पक्ष इस बात पर एकमत हैं कि यह बिल समाज में विभाजन पैदा करने और एक विशिष्ट समुदाय को लक्षित करने वाला है. उन्होंने सिविल सोसाइटी से इसका व्यापक विरोध करने की अपील की है. कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी बजट सत्र में जब यह बिल पेश होगा, तो वह सदन के भीतर और बाहर हर संभव मोर्चे पर इसका विरोध करेगी और अंतिम विकल्प के रूप में कानूनी रास्ता भी अपनाएगी.
'डिस्टर्ब एरिया बिल' 2026 क्या है?: यह एक ऐसा प्रस्तावित कानून है जो सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाकों में मकान या जमीन बेचने और खरीदने के नियमों को सख्त बनाता है. इस बिल का मुख्य उद्देश्य लोगों को दबाव या डर में अपनी संपत्ति कम दामों पर बेचकर पलायन करने से रोकना है. प्रस्तावित कानून में सरकार किसी भी दंगा प्रभावित या सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाके को 3 साल के लिए 'अशांत क्षेत्र' घोषित कर सकती है. कानून के अनुसार अगर कोई क्षेत्र 'अशांत' घोषित हो जाता है, तो वहां रहने वाला व्यक्ति अपनी संपत्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति को सीधे नहीं बेच पाएगा. इसके लिए उसे पहले जिला कलेक्टर से लिखित मंजूरी लेनी होगी. राजस्थान कैबिनेट ने को इस बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है. अब इसे आगामी बजट सत्र में राजस्थान विधानसभा में पेश किया जाएगा. पास होने और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह पूरे राज्य में कानून बन जाएगा.

