Explainer: 'जय-वीरू की जोड़ी' से क्यों 'जानी दुश्मन' बनें कांग्रेस के ये दिग्गज नेता, जानें विवाद की पूरी कहानी
दीपेंद्र हुड्डा के 'रोल मॉडल' वाले बयान के बाद कुलदीप शर्मा और भूपेंद्र हुड्डा आमने-सामने. क्यों दुश्मन बन बैठे जिगरी दोस्त? भूपेंद्र जिष्टू की रिपोर्ट.

Published : August 28, 2026 at 5:56 PM IST
चंडीगढ़: कांग्रेस की आंतरिक कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ चुकी है. दीपेंद्र हुड्डा ने दिवंगत कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को कथित 'रोल मॉडल' बताया. इसके बाद से शुरू हुआ विवाद अब पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा बनाम नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा का रूप ले चुका है. दरअसल दीपेंद्र हुड्डा के 'रोल मॉडल' वाले बयान के बाद कुलदीप शर्मा ने सांसद दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) से हटाने की मांग की थी. जिसके बाद हुड्डा समर्थक नेताओं ने उन पर तीखा पलटवार किया. इसके बाद कुलदीप शर्मा ने भी भूपेंद्र हुड्डा पर G23 के पत्र पर धोखे से हस्ताक्षर करवाने का आरोप लगाया.
कुलदीप शर्मा बनाम भूपेंद्र हुड्डा! हरियाणा का सियासी पारा सातवें आसमान पर है. ऐसे में सवाल ये है कि इस सियासी लड़ाई का क्या अंजाम होगा? क्या भूपेंद्र सिंह हुड्डा कुलदीप शर्मा के सवालों पर विराम लगा पाएंगे? आखिर G23 के पत्र पर हुड्डा ने धोखे से क्यों कुलदीप शर्मा से साइन करवाए? अब दोनों नेताओं की पक्की-दोस्ती में क्यों बेटों के नाम आए? क्या कुलदीप शर्मा के तेवर हरियाणा कांग्रेस के अंदर होने वाले भाविष्य के संग्राम का पैगाम दे रहे हैं?
कुलदीप शर्मा और भूपेंद्र हुड्डा की दोस्ती: हरियाणा के पूर्व सीएम और नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा 10 साल (2004 से 2014) तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे. तब हरियाणा की सियासत में हुड्डा और पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा की दोस्ती की मिसालें दी जाती थी. ये भी कहा जाता है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा के छोटे बेटे कार्तिकेय शर्मा का विवाह कुलदीप शर्मा की बेटी ऐश्वर्या शर्मा से करवाने में हुड्डा की बड़ी भूमिका रही. भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुलदीप शर्मा के संबंध राजनीति से ऊपर नजर आते थे, लेकिन बीते कुछ सालों से हुड्डा और कुलदीप शर्मा ने अलग-अलग राह पकड़ ली.
क्यों बढ़ी दूरियां? सियासी गलियारों में कई तरह के कयास हैं. सबसे पहला है टिकट बंटवारे को लेकर. कुलदीप शर्मा जब अपने बेटे की टिकट को लेकर बात करते हैं, तो वो भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा की राजनीति में कंट्रीब्यूशन को लेकर सवाल खड़े करते हैं. वहीं G-23 नेताओं की चिट्ठी पर कुलदीप शर्मा जब हुड्डा पर धोखे से हस्ताक्षर करवाने की बात करते हैं, तो इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद से कहीं ना कहीं दोनों नेताओं के रिश्तों में खटास आई होगी, क्योंकि कुलदीप शर्मा हाशिए पर जाते दिखे. वहीं कांग्रेस आलाकमान ने पत्र लिखने वालों में शामिल भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आज तक कोई सवाल नहीं उठाया. इसी का असर 2024 में कुलदीप शर्मा के बेटे को लोकसभा चुनाव में टिकट ना मिलने की बात में भी साफ झलकता है. वहीं इन दोनों नेताओं के बीच खींची बड़ी लाइन का असर इस स्तर तक पहुंच गया है कि कुलदीप शर्मा को पार्टी के मंचों पर बोलने से भी रोका जाता रहा है.

भूपेंद्र हुड्डा पर कुलदीप शर्मा के आरोप: कुलदीप शर्मा ने कहा कि पंचकूला में HKRN को लेकर कांग्रेस ने प्रदर्शन किया. इस लिस्ट में वक्ताओं की सूची में उनका नाम ना रखने के लिए एक बड़े नेता ने कहा. हालांकि उन्होंने उस बड़े नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन सियासी गलियारों में कहा जा रहा है कि वो पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा हैं. कुलदीप ने कहा कि "जब कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ साल 2022 में G-23 कांग्रेस नेताओं ने पत्र लिखा था, तो उसमें मेरे हस्ताक्षर थे. जिससे हाईकमान की नजरों में मैं टारगेट बन गया. गुलाम नबी आजाद और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुझे गाड़ी में ले गए, उन्होंने एक कागज दिया और कहा कि कांग्रेस संगठन से जुड़े किसी मुद्दे को लेकर वो पत्र लिख रहे हैं. इस पर हस्ताक्षर कर दो. इसलिए मैंने बिना कुछ सोचे हस्ताक्षर कर दिए."

क्यों बेटे का हुआ जिक्र? कांग्रेस सांसद जय प्रकाश ने दीपेंद्र हुड्डा के खिलाफ चिट्ठी लिखने पर कुलदीप शर्मा पर आरोप लगाया कि उनके बेटे की शादी सज्जन कुमार के घर पर हुई थी. इस पर कुलदीप शर्मा ने कहा कि "उनको तो मैंने बुलाया नहीं था, अगर जय प्रकाश में हिम्मत है. सच्च कहने की ताकत है, तो वो इस बात का एफिडेविट दें कि मेरे बेटे की रिसेप्शन सज्जन कुमार की कोठी पर हुई."
कांग्रेस हाईकमान से क्यों नहीं की बात? जब कुलदीप शर्मा से सवाल किया गया कि उनको चिट्ठी लिखने की जगह कांग्रेस नेतृत्व से बात करनी चाहिए थी. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग हुई. पांच का पता है. उनके खिलाफ एक्शन हुआ. चार और हैं, लेकिन वो चार कौन हैं. इसका अभी तक नहीं पता.
सोशल मीडिया पर कुलदीप शर्मा को अटैक किया जा रहा? जब उनसे सवाल किया गया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में आपके बेटे को टिकट देने को लेकर जब बात हुई, तो किसी ने उनके योगदान को लेकर सवाल उठाया था, क्या योगदान के मुताबिक टिकट मिलती है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि "ना तो मेरे पिता जी मुझे विधानसभा छोड़ कर आए थे, ना उनके पिता जी उनको छोड़कर आए थे. ना ही मैं अपने बेटे को छोड़कर आ रहा हूं. वो अपनी मेहनत करके लोगों के बीच एक्सेप्टेबल हो जाएगा, तो बन जाएगा. मेरे खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ लोग लगाए गए हैं, जो बीच-बीच में मेरे कांग्रेस छोड़ने की अफवाहों को हवा देते रहते हैं. कहां जा रहे हैं. ये भी खुद ही बता रहे हैं. सोशल मीडिया पर मुझे अटैक किया जाता है."
कांग्रेस प्रवक्ता ने क्या कहा? इस पूरे मामले को लेकर अभी तक नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता और भूपेंद्र हुड्डा के पूर्व ओसीडी केवल ढींगरा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा "जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुलदीप शर्मा कहते हैं कि वो कांग्रेस के एक निष्ठावान कार्यकर्ता हैं, तो फिर इनको मीडिया में बात रखने की जगह पार्टी प्लेटफार्म पर बात रखनी चाहिए थी." दीपेंद्र हुड्डा के खिलाफ पत्र लिखने के मामले पर उन्होंने कहा कि "जो बात दीपेंद्र हुड्डा ने कही ही नहीं, उसको लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखने की जरूरत सही नहीं लगती. कुलदीप शर्मा ये सभी मसले पार्टी प्लेटफार्म पर रख सकते थे."
"किसी भी सरकार के लिए मजबूत विपक्ष का होना जरूरी है. वो सरकार को आयना दिखाता है, लेकिन यहां तो विपक्ष नाम की चीज छोड़ी नहीं इन दोनों ने (बिना नाम लिए पिता-पुत्र), यहां तो पीछे से हाथ मिला रखा है, सबको पता है, चुनाव में जो हुआ, कुलदीप शर्मा सही कह रहे हैं. गुलदस्ता साफ हो गया. इस तरह के लोग कांग्रेस वर्किंग कमेटी में होंगे, जिनके बयान उनकी सोच को दर्शाते हैं, वे कोई नीति लेकर आएंगे क्या?- किरण चौधरी, बीजेपी नेता
अभय चौटाला के निशाने पर पिता-पुत्र: अभय चौटाला ने कुलदीप शर्मा के आरोपों और दीपेंद्र हुड्डा के सज्जन कुमार के बयान पर चुटकी लेते हुए का कि "पहले तो दीपेंद्र हुड्डा ने सज्जन कुमार को आइकन कहा, उसको बहुत बड़ा नेता बताया, अब वो कह रहा है मेरे मुंह में ये बात डाली जा रही है, क्यों भाई बच्चा है क्या? कोई भी आकर मुंह में बात डाल दे, ये कोई लॉलीपॉप थोड़ी है. किसी ने दिखा दिया और तूने मुंह में ले लिया."
कांग्रेस की सच्चाई आज सबके सामने आ रही है, कुलदीप ने जो बात कही हैं. उसमें दम है, मैंने बहुत बार आपसे ये बात कही है कि हुड्डा 2016 में भी बीजेपी के पक्ष में वोट डालने गया, बीजेपी से मिला हुआ है. अबकी बार हुए राज्यसभा चुनाव में भी हुड्डा ने ये काम किया, हुड्डा बीजेपी की बी टीम के रूप में काम कर रहा है.- अभय चौटाला, इनेलो सुप्रीमो
क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार? इस पूरे विवाद को लेकर राजनीतिक मामलों के जानकार धीरेंद्र अवस्थी कहते हैं कि "जहां तक कुलदीप शर्मा की बात है, तो ये बात किसी से छुपी नहीं है कि वो हुड्डा के सबसे अच्छे दोस्तों में से थे. माना जाता है कि इनकी अदावत कुलदीप शर्मा के बेटे को टिकट ना मिलने को लेकर शुरू हुई है. जहां तक दीपेंद्र हुड्डा के बयान का मामला है. उन्होंने खेद प्रकट करके उसको विराम लगा दिया है. ऐसे में राजनीतिक तौर पर उस पर कुछ कहने का फायदा नहीं है. G-23 के मामले पर भी अब चर्चा करके हुड्डा का कोई नुकसान होने की उम्मीद कम ही है."
भूपेंद्र सिंह हुड्डा अभी भी कांग्रेस के प्रमुख और दिग्गज नेता हैं. उनसे टकराव का कुलदीप शर्मा को फायदा कम नुकसान ज्यादा दिखाई देता हैं. इन तेवरों के साथ अगर वो बीजेपी में जाते हैं, तो उन्हें कोई बड़ा पद भी मिलना मुश्किल है. फिर इस सियासी लड़ाई का उनका मकसद क्या है? ये तो वो ही बता सकते हैं.- धीरेंद्र अवस्थी, राजनीतिक विशेषज्ञ
'कुलदीप शर्मा को सियासी फायदे की उम्मीद कम': वहीं वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर गुरमीत सिंह कहते हैं कि "कुलदीप शर्मा और दीपेंद्र हुड्डा के बयान के सियासी मायने कुछ भी निकले जाएं, लेकिन अभी के हालात में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए हरियाणा कांग्रेस के अंदर कोई भी नेता बड़ी चुनौती नहीं बन सकता है. उनके गांधी परिवार से संबंधों की बात हो या फिर हरियाणा कांग्रेस के अंदर पैठ दोनों से लड़ना अभी उनके विरोधियों के लिए मुश्किल है. कुलदीप शर्मा ने जो कुछ कहा है. उससे मौजूदा हालात में उनको कोई सियासी फायदा मिल सकता है. इसकी उम्मीद कम है."
ये भी पढ़ें : दीपेंद्र हुड्डा को AICC की सदस्यता से हटाने की मांग, कुलदीप शर्मा बोले- 'रोल मॉडल वाले बयान से सिख समुदाय में रोष'
ये भी पढ़ें : 'रोल मॉडल' वाले बयान पर दीपेंद्र हुड्डा बोले- 'मेरी कभी भी किसी को ठेस पहुंचाने की भावना नहीं रही'

