शव दफनाने को लेकर धमतरी में विवाद, मौके पर पहुंचे एसडीएम और तहसीलदार
प्रशासन की मौजूदगी में बाड़ी में दफनाए गए शव को खोदकर निकाला गया.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 9, 2026 at 9:01 AM IST
धमतरी: रविवार की देर रात धर्मांतरित शख्स के शव को दफनाने को लेकर जमकर बवाल हुआ. भड़के आदिवासी समाज और ग्रामीणों ने मोर्चा घर की बाड़ी में शव दफनाए जाने का पुरजोर विरोध किया. गांव में हुए हंगामे की खबर जैसे ही पुलिस प्रशासन को लगी, मौके पर भारी संख्या में पुलिस के साथ अफसर पहुंच गए. हंगामा इतना बढ़ा कि मौके पर एसडीएम और तहसीलदार तक को बुलाना पड़ गया. करीब पांच घंटे तक विवाद चलता रहा.
घंटों चले विवाद के बाद आखिरकार प्रशासन ने शव को बाड़ी से खोदकर निकालने का आदेश दिया. जिसके बाद दोनों पक्षों को समझा बुझाकर शव को कब्र से निकाला गया. तब कहीं जाकर विवाद खत्म हुआ. देर रात तक लोग गांव में हंगामा करते रहे, इस वजह से पुलिस मौके पर डटी रही.
शव दफनाने को लेकर बढ़ा विवाद
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह पूरा मामला धमतरी जिले के वनांचल में पड़ने वाले दुगली थाना क्षेत्र के मुनइकेरा गांव का है. जहां धर्मांतरित व्यक्ति की मौत के बाद परिजनों ने शव को अपनी बाड़ी में दफना दिया था. जैसे ही इस बात की भनक गांव वाले को लगी, तो भारी संख्या में ग्रामीण और आदिवासी समाज के लोग मौके पर पहुंच गए. लोगों ने गांव के बीचो बीच बने बाड़ी में शव दफनाए जाने का जमकर विरोध किया. विरोध को देखते हुए एसडीएम और तहसीलदार को भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालना पड़ा.
मामला और भी बिगड़ता गया जब दोनों पक्ष आमने सामने आ गए. करीब 5 घंटे बाद प्रशासन ने कब्र खोदी और शव को बाहर निकाला. जिसके बाद अब शव को धमतरी में उचित जगह पर दफनाने की बात कही गई.
कल शव दफनाने को लेकर विवाद बढ़ गया था. फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य है. सुरक्षा के लिहाज से गांव में पुलिस तैनात है. लोगों को समझाया गया है कि वो शांति बनाए रखें. हालात पर हमारी नजर है: सूरज सिंह परिहार, एसपी, धमतरी
15 साल पहले मृतक ने अपनाया था ईसाई धर्म
ग्रामीणों ने बताया कि 15 साल पहले मृतक जलसिंह नेताम ने ईसाई धर्म अपनाया था. रविवार को उसकी मौत हो गई. जिसके बाद परिजनों ने जलसिंह के शव को घर के पास बने बाड़ी में दफना दिया. जैसे ही इस बात की जानकारी गांव वालों को लगी, तो भारी संख्या में ग्रामीण और आदिवासी समाज के लोगों ने जमकर विरोध किया. गांव वालों का कहना था कि शव को दफनाने की जो जगह है वहीं पर उसे दफनाया जाए. जबकि मृतक के परिवार वाले शव को बाड़ी में रखने के पक्ष में थे.

