भिलाई में JLN अस्पताल के निजीकरण की चर्चा तेज, विरोध में BSP कर्मचारियों का प्रदर्शन
रिटायर और कार्यरत कर्मचारियों का कहना है, वो किसी कीमत पर अस्पताल को निजी हाथों में नहीं सौंपने देंगे.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 1, 2026 at 10:20 AM IST
भिलाई: भिलाई स्टील प्लांट की स्थापना साल 1955 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रयासों से हुई थी. भिलाई स्टील प्लांट अपनी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है. भिलाई स्टील प्लांट में हजारों की संख्या में लोग काम करते हैं. देश के कोने-कोने से यहां लोग आकर बसे और देश की तरक्की में अपना योगदान दिया. भिलाई स्टील प्लांट को भारत की स्टील सिटी भी कहते हैं. एशिया के बड़े प्लांटों में इसकी गिनती होती है. सोवियत संघ की मदद से इस प्लांट की स्थापना की गई है. यहां काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले इसके लिए आधुनिक अस्पताल भी बनाए गए. लेकिन अब अफवाह है कि यहां बने जेएलएन अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है.
JLN अस्पताल के निजीकरण की चर्चा तेज
अस्पताल को निजी हाथों में सौंपे जाने की खबर जैसे ही लोगों को मिली, वैसे ही बीएसपी अनाधिशासी कर्मचारी संघ ने अस्पताल परिसर के सामने प्रदर्शन कर प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. रिटायर और कार्यरत कर्मचारियों ने अस्पताल के निजीकरण का विरोध किया. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों और यूनियन नेताओं ने कहा कि जेएलएन अस्पताल भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों, उनके आश्रितों और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए एक जीवनरेखा है. ऐसे में इसका निजीकरण हजारों परिवारों के स्वास्थ्य अधिकारों पर सीधा असर डालेगा.
बीएसपी अनाधिशासी कर्मचारी संघ का प्रदर्शन
यूनियन नेताओं का कहना है कि पहले भी बीएसपी के स्कूलों के निजीकरण और बंद होने से कर्मचारियों को महंगी शिक्षा का बोझ उठाना पड़ा है. यदि अस्पताल का निजीकरण होता है तो स्वास्थ्य सेवाएं भी महंगी हो जाएंगी और इलाज की गुणवत्ता प्रभावित होगी.
बीएसपी कर्मचारियों की राय
बीएसपी महिला कर्मी सरस्वती ने कहा कि अस्पताल की वर्तमान स्थिति के लिए गलत प्रबंधन और पर्याप्त भर्तियां नहीं होना जिम्मेदार है. वहीं, सेक्टर-9 अस्पताल की डॉ. पार्कर ने कहा कि अस्पताल में आधुनिक मशीनें, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभवी स्टाफ मौजूद हैं, जरूरत केवल पर्याप्त डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग कर्मियों और तकनीकी विशेषज्ञों की भर्ती की है.
यूनियन का आरोप
यूनियन ने आरोप लगाया कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के स्थान पर नई नियुक्तियां नहीं की गई है, जिससे अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हुईं. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और सभी यूनियनें मिलकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगी.
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