अनुदान मांगों पर विधानसभा में चर्चा: सत्ता पक्ष के सुर भी तीखे, सर्राफ ने अपनी ही सरकार को घेरा
अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायक श्रीचंद कृपलानी ने माइक ऊंचा करने की मांग की.

Published : February 25, 2026 at 7:05 PM IST
जयपुर: राजस्थान विधानसभा में नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान दिलचस्प स्थिति देखने को मिली. विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष के विधायकों ने भी सरकार के सामने कई सवाल रखे. जयपुर शहर की यातायात व्यवस्था, मेट्रो, सीवरेज, अवैध निर्माण और विकास योजनाओं को लेकर बहस हुई. सदन में बीच-बीच में हल्का-फुल्का माहौल भी देखने को मिला. इतना ही विधायक श्रीचंद कृपलानी के माइक की ऊंचा बढ़ाने की मांग पर सदन में जम कर ठहाके लगे.
आरओबी रोड फिजिबल नहीं: भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने चर्चा के दौरान अपनी ही सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि अरण्य भवन से जगतपुरा आरओबी तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड व्यवहारिक (फिजिबल) नहीं है. यह ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे से अरण्य भवन तक जवाहर नगर होते हुए एलिवेटेड रोड बनाया जाए. सर्राफ ने कहा कि जयपुर में यातायात सुगमता के लिए 3000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. यातायात सुधार के लिए 1000 करोड़, ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने के लिए 500 करोड़ और जेके लोन अस्पताल में 500 बेड का आईपीडी टावर बनाने की घोषणा की गई है. जयपुर के सभी क्षेत्रों में 100 करोड़ रुपए की लागत से सड़कें बनाई जाएंगी. उन्होंने कहा कि मेट्रो में हर महीने लगभग 10 लाख रुपए का घाटा हो रहा है. 12 हजार करोड़ रुपए की लागत से सीतापुरा से टोडी मोड़ तक मेट्रो विस्तार प्रस्तावित है, साथ ही जयपुर में सीवरेज व्यवस्था को जल्द चालू करने की जरूरत बताई.
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कृपलानी की मांग, माइक ऊंचा करवाएं: अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायक श्रीचंद कृपलानी ने माइक ऊंचा करने की मांग की. इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यदि पांच साल इसी सीट पर रहेंगे, तो माइक ऊंचा करवा देंगे. कृपलानी ने भी हंसते हुए कहा कि स्क्रू वाला माइक लगा दिया जाए ताकि सीट बदलने पर साथ ले जा सकें. सदन में इस दौरान ठहाके गूंजे. श्रीचंद कृपलानी ने सफाईकर्मियों की भर्ती को लेकर कांग्रेस शासन पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय भर्ती की विज्ञप्ति निकली, लेकिन भर्ती नहीं हुई. हमारी सरकार ने 12 हजार कर्मचारियों की भर्ती की है.
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'घोषणाएं ज्यादा, जमीन पर काम कम': कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने कहा कि रिसर्जेंट राजस्थान में 51 एमओयू किए गए, लेकिन धरातल पर कितने लागू हुए, यह बताया जाए. इंदिरा गांधी शहरी गारंटी योजना में 300 करोड़ का बजट था, जिसमें से 200 करोड़ ही खर्च किए गए और अगले साल बजट घटाकर 200 करोड़ कर दिया गया. धारीवाल ने आरोप लगाया कि स्थानीय शहरी सड़कों की मेंटेनेंस के लिए 700 करोड़ का प्रावधान था, लेकिन 300 करोड़ ही खर्च हुए. अर्बन इंफ्रा इंजेक्टर डेवलपमेंट के लिए 1299 करोड़ की घोषणा की गई, पर खर्च केवल 20 करोड़ हुआ. उन्होंने कहा कि 25 एमएलडी के पांच एसटीपी बनने थे, लेकिन एक भी नहीं बना. 3510 सामुदायिक शौचालय के लक्ष्य के मुकाबले केवल 210 बने. उन्होंने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में पदों की भारी कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 2682 पदों में से 1926 पद खाली हैं. टाउन प्लानिंग और इंजीनियरिंग शाखाओं में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जिससे अवैध निर्माण पर रोक लगाना मुश्किल हो रहा है.
वार्षिक प्रतिवेदन पर भी उठा सवाल: कांग्रेस विधायक रफीक खान ने रेरा सहित अन्य प्राधिकरणों के वार्षिक प्रतिवेदन समय पर सदन में नहीं रखने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि नियम अनुसार कम से कम सात दिन पहले प्रतिवेदन रखा जाना चाहिए. इस पर अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि आगे से समय पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाएंगे.

