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कृषि बजट पर सदन में चर्चा: महिला किसान की खुशहाली योजना होगी शुरू, मखाना योजना को दिया जाएगा बढ़ावा

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में कृषि बजट पर चर्चा हुई.

Discussion on agriculture budget in House during budget session of Jharkhand Assembly
सदन की कार्यवाही में भाग लेतीं कृषि मंत्री (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 26, 2026 at 9:11 PM IST

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रिपोर्ट- उपेंद्र कुमार.

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में आज गुरुवार को अनुदान मांग पर सदन में कृषि बजट पर चर्चा हुई. इस दौरान भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने कृषि बजट पर कटौती प्रस्ताव भी लाया गया जो ध्वनिमत से अस्वीकृत हो गया. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सदन को संबोधित किया.

सदन की कार्यवाही में भाग लेने के बाद कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की मीडिया से रूबरू हुईं. मंत्री ने कहा कि इस वर्ष कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में पुरानी योजनाओं के साथ साथ तीन नई योजनाएं शुरू की जा रही है. शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में अनुसूचित जाति-जनजाति महिला किसानों के लिए महिला किसान खुशहाली योजना के तहत समेकित कृषि को बढ़ावा दिया जाएगा.

कृषि मंत्री ने कहा कि महागठबंधन की सरकार ने ही सभी जिलों में 5000 मैट्रिक टन का कोल्ड स्टोरेज निर्माण का बड़ा फैसला लिया था. अब इन वित्तीय वर्ष में राज्य के 81 विधानसभा क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज बनाया जाएगा जो कोल्ड स्टोरेज के साथ साथ मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स भी होगा. कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रावधानों की जानकारी मंत्री ने दी.

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि हाई एग्री वैल्यू प्रोड्यूस के तहत न सिर्फ मखाना की खेती बल्कि ड्रेगन फ्रूट्स एवं अन्य उद्यानिकी उत्पाद के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चर रिसर्च, बेंगलुरु से तकनीकी सहायता ली जाएगी. कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि बजट पर चर्चा के दौरान भाजपा सचेतक नवीन जायसवाल पुराने आंकड़ों को लेकर सदन में आये थे, जानकारी होने पर उन्होंने उसमें संशोधन किया.

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की का बयान (ETV Bharat)

सदन में कृषि मंत्री के संबोधन के मुख्य अंश

वित्तीय वर्ष 2026-27 में विभाग का बजट 04 हजार 884 करोड़ 20 लाख रुपए है. सदन में बीजेपी का दावा और जमीनी हकीकत हाथी के दांत की तरह है, जो खाने को कुछ और दिखाने को कुछ है. जब किसानों के फसल का MSP बढ़ाने की बात होती है तो केंद्र सरकार इसे नकार देती है. सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक असमानता को दूर करने ही नहीं है बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक असमानता को दूर करना भी जरूरी है.

समाज आज भी जाति-धर्म और वर्ग के आधार पर बंटा हुआ है. ये बजट आय की सुरक्षा, महिला के सशक्तिकरण, आर्थिक असमानता को दूर करने के साथ राज्य की स्थिरता को दर्शाने वाला बजट है. किसानों को आधुनिक कृषि प्रणाली से जुड़ने की जरूरत है. आज राज्य में 1 लाख हेक्टेयर में मोटे अनाज की खेती हो रही है. राज्य में 05 लाख किसानों को ऋण माफी योजना का लाभ मिल चुका है. ग्रीन इकोनॉमी की सोच के साथ करंज का झारखंड से निर्यात बहुत बड़ी सफलता है.

दुग्ध में दोगुना उत्पादन और बेकन फैक्ट्री को पुनर्जीवित करने की पहल तेज हो गई है. "महिला किसान खुशहाली योजना" महिलाओं के जीवन में नया रंग भरने और उन्हें सशक्त बनाने में सफल रहेगी. हर विधानसभा में माननीय विधायकों की अनुशंसा कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया जाएगा. हमारा लक्ष्य राज्य के किसानों को प्रगतिशील किसान बनाना और उनकी आय बढ़ाना है.

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट 4 हजार 884 करोड़ 20 लाख रुपए है. योजना मद में 4 हजार 275 करोड़ का बजट उपबंध किया गया है, जिसमें 3,825 करोड़ राज्यांश और 450 करोड़ केंद्रांश शामिल है. ये महज बजट आंकड़ा नहीं है बल्कि झारखंड के किसानों के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है. विभाग के द्वारा कुल 81 योजनाएं संचालित की जाएंगी, जिसमें 56 राज्य योजनाएं और 25 केंद्र प्रायोजित योजनाएं शामिल है.

कृषि प्रक्षेत्र

वित्तीय वर्ष 2026-27 में कृषि प्रक्षेत्र का योजना बजट 2 हजार 200 करोड़ रुपए है. झारखंड के किसानों को आत्म निर्भर और आय सुरक्षित बनाने का स्पष्ट संकल्प इस बजट में दिखता है. कृषि, बागवानी और मृदा संरक्षण को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ सुदृढ़ करना इस बजट का उद्देश्य है. विभाग ने मृदा एवं जल संरक्षण के लिए 475 करोड़ 50 लाख, बीज उत्पादन एवं फसल विविधीकरण के लिए 145 करोड़ और अनुसंधान एवं तकनीकी सुदृढ़ीकरण के लिए 160 करोड़ का प्रावधान किया है.

कृषि यंत्रीकरण के लिए 80 करोड़, किसान समृद्धि योजना के लिए 75 करोड़ के साथ एकीकृत बिरसा ग्राम विकास योजना सह किसान स्कूल के लिए 70 करोड़ की राशि बजट में रखा है. बागवानी क्षेत्र में 124 करोड़ 93 लाख रुपए राज्य बागवानी विकास योजना और 81 करोड़ 38 लाख रुपए जैविक प्रमाणीकरण के लिए प्रस्तावित किया है. विभाग का लक्ष्य, आत्मनिर्भर किसान, सशक्त गांव और समृद्ध झारखंड का निर्माण करना है.

पशुपालन प्रक्षेत्र

पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के योजना मद में 500 करोड़ का प्रावधान किया गया है. सबसे अधिक मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के लिए 170 करोड़ रुपए विभाग खर्च करेगी. जिसमें बकरी, सूकर, पोल्ट्री सहित अन्य लाभार्थी आधारित योजनाएं शामिल हैं. एकीकृत कुक्कुट विकास योजना के लिए 126 करोड़ और पशु स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 33 करोड़ का प्रावधान किया गया है. राष्ट्रीय पशुधन मिशन, रोग नियंत्रण कार्यक्रम एवं मोबाइल वेटनरी इकाइयों के माध्यम से उत्पादकता और रोग प्रबंधन को मजबूत किया जाएगा.

डेयरी प्रक्षेत्र

डेयरी प्रक्षेत्र के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के योजना मद में 425 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत दुग्ध पशु वितरण, कामधेनु डेयरी फार्मिंग और तकनीकी इनपुट के मद में 206 करोड़ 5 लाख रुपए प्रस्तावित है. वहीं नस्ल सुधार एवं उत्पादकता वृद्धि के लिए 3 हजार कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों के सुदृढ़ीकरण के लिए 25 करोड़ रुपए प्रस्तावित है. विस्तार एवं कौशल विकास कार्यक्रम के लिए 25 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए है. झारखंड दुग्ध महासंघ को दुग्ध संग्रहण एवं विपणन सुदृढ़ीकरण के लिए 105 करोड़ 30 लाख रुपए प्रस्तावित है. दुग्ध उत्पादकों को मूल्य प्रोत्साहन के मद में 40 करोड़ 15 करोड़ का प्रावधान किया गया है.

मत्स्य प्रक्षेत्र

पशुपालन के साथ-साथ मत्स्य पालन का क्षेत्र ग्रामीण आय-विविधीकरण और पोषण सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में मत्स्य प्रक्षेत्र के योजना मद में 250 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. जिसमें राज्य योजना अंतर्गत सर्वाधिक 136 करोड़ का प्रावधान तालाबों एवं जलाशयों के पुनरुद्धार और विकास के लिए किया गया है. स्थानीय स्तर पर मत्स्य उत्पादन क्षमता में वृद्धि सरकार का लक्ष्य है.

सहकारिता प्रक्षेत्र

कृषि, पशुपालन, मत्स्य और डेयरी क्षेत्रों में उत्पादन एवं आय वृद्धि के प्रयास तभी पूर्ण रूप से होंगे, जब उनके साथ सशक्त सहकारिता तंत्र जुड़ा हो. सहकारिता सिर्फ एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि किसानों, उत्पादकों और ग्रामीण समुदायों की सामूहिक शक्ति का संगठित स्वरूप है. इसी दृष्टिकोण से वित्तीय वर्ष 2026-27 में सहकारिता प्रक्षेत्र के योजना मद में 900 करोड़ रुपए प्रस्तावित किया गया है. बिरसा किसान फसल बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल नुकसान पर 400 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रीमियम अनुदान मद में किया गया है. अनाज भंडारण कार्यक्रम के अंतर्गत 2 हजार 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले 72 गोदामों के निर्माण हेतु 120 करोड़ 85 लाख रुपए का प्रस्ताव है. इसके अलावा राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्थित लैंप्स-पैक्स में सहकारी विपणन परिसर सह सौर पैनल आधारित कोल्ड रूम के निर्माण के लिए 162 करोड़ 21 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है.

वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित नई योजनाएं-नई पहल

नारी शक्ति को सामाजिक उपेक्षा एवं आर्थिक विपन्नता के जंजीरों से मुक्त करने के लिहाज से महिला किसानों के लिए विभाग ने नई योजना तैयार की है. जिसका नाम "महिला किसान खुशहाली योजना" है. इस योजना का उद्देश्य महिला किसानों को समेकित कृषि प्रणाली से जोड़ते हुए उनकी आर्थिक समृद्धि, आय सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा में स्थायी रूप से सुधार करना है. इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 25 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया है.

इस योजना के अंतर्गत पात्र महिला किसानों को शत प्रतिशत अनुदान पर गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक, सिंचाई सुविधा और चयनित पशुधन सहायता उपलब्ध कराया जाएगा. इसके साथ ऐसी महिला किसानों को किसान उत्पादक संगठनों (FPO) एवं स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से संस्थागत सहयोग प्रदान कर बाजार से सीधे जोड़ने की योजना है. प्रथम चरण में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग की महिला किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी. चरणबद्ध रूप से अन्य वर्गों की महिला किसानों को भी योजना से आच्छादित किया जाएगा.

कृषि विभाग का स्पष्ट मानना है कि जब महिला किसान सशक्त होती है, तब केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरा समाज सशक्त होता है. इस योजना से महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सामाजिक सम्मान भी बढ़ेगा. नकदी एवं उच्च मूल्य की फसलों को प्रोत्साहित करने की योजना है. विशेष रूप से चाय, काजू, लाह तथा गन्ना इसमें शामिल है. झारखंड में उपलब्ध जल संसाधन और ग्रामीण प्राकृतिक परिदृश्य मत्स्य पालन के साथ-साथ पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाओं की ओर इशारा करते है.

एक्वा कल्चर पर्यटन के तहत मत्स्य पालन गतिविधियों को ग्रामीण पर्यटन के साथ जोड़ा जाएगा. ऐसा करने से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति और मत्स्य आधारित जीवनशैली से परिचित होने का अवसर मिलेगा. इससे स्थानीय समुदायों को मत्स्य उत्पादन के अतिरिक्त पर्यटन एवं सहायक सेवाओं के माध्यम से आय के नए अवसर प्रदान होंगे. विभाग का उद्देश्य किसान परिवार को सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करने के साथ उनके आय को बढ़ाना है.

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