शिक्षा निदेशालय ने कुत्तों की गिनती को लेकर झूठी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस में दी शिकायत
शिक्षा निदेशक ने मामले को लेकर सिविल लाइंस थाने में शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग.

Published : January 1, 2026 at 8:17 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से कुत्तों की गिनती कराने के आम आदमी पार्टी के आरोप के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है. यह मामला अभी तक शांत नहीं हो पा रहा है. इस मामले में आज एक नया मोड़ आ गया. दरअसल, शिक्षा निदेशालय ने गुरूवार शाम को सोशल और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाई जा रही झूठी, गुमराह करने वाली और दुर्भावनापूर्ण जानकारी का गंभीर संज्ञान लिया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों को गिनने का निर्देश दिया गया था.
आज शिक्षा निदेशक वेदिता रेड्डी ने साफ तौर पर कहा कि शिक्षा निदेशालय द्वारा ऐसा कोई आदेश, निर्देश, सर्कुलर या नीतिगत फैसला कभी जारी नहीं किया गया है. जो दावे फैलाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से मनगढ़ंत, निराधार और झूठे हैं, और शिक्षा विभाग के किसी भी आधिकारिक फैसले या निर्देश से उनका कोई लेना-देना नहीं है. शिक्षा निर्देशन द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि 20 नवंबर का सर्कुलर केवल सर्वोच्च न्यायालय के सुओ मोटो रिट याचिका (सिविल) संख्या 5, 2025, जिसका शीर्षक 'शहर आवारा कुत्तों से परेशान, बच्चे कीमत चुका रहे हैं' के निर्देशों के पालन में जारी किया गया था. सर्कुलर का एकमात्र उद्देश्य सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती और उचित एक्सेस कंट्रोल उपायों के माध्यम से स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोककर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था.
सर्कुलर में नहीं शिक्षकों द्वारा कुत्तों की गिनती करने का कोई उल्लेख
निदेशक ने इस बात पर जोर दिया कि उस सर्कुलर में शिक्षकों द्वारा आवारा कुत्तों को गिनने का कोई उल्लेख नहीं है. शिक्षकों की पेशेवर गरिमा, शैक्षणिक भूमिका और सम्मान सर्वोपरि और अटूट है. निदेशालय ने आगे बताया कि फर्जी कहानी फैलाने पर उसने 30 दिसंबर को आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की थी, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि शिक्षा निदेशालय द्वारा ऐसे कोई निर्देश कभी जारी नहीं किए गए हैं. इस आधिकारिक स्पष्टीकरण के बावजूद, झूठी और गुमराह करने वाली सामग्री जानबूझकर फैलाई और बढ़ाई जाती रही, जो दुर्भावनापूर्ण इरादे और जनता को गुमराह करने के एक समन्वित प्रयास का संकेत देता है.
विभाग ने सोशल मीडिया पर प्रतिरूपण के मामले भी देखे हैं, जिसमें व्यक्ति वीडियो और रील्स के माध्यम से खुद को झूठा बताकर आवारा कुत्तों को गिनने वाले शिक्षक के रूप में पेश कर रहे हैं. ऐसे कार्य गंभीर अपराध हैं. इसको देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन उत्तरी जिला में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें झूठी कहानी के स्रोत, निर्माण और प्रसार की जांच की मांग की गई है. ऐसी गलत जानकारी फैलाने में शामिल सोशल मीडिया हैंडल्स की एक लिस्ट पुलिस के साथ शेयर की गई है.
शिक्षा निदेशालय ने थाने में दी यह शिकायत
शिक्षा निदेशालय द्वारा शिकायत में बताया गया है कि आवारा कुत्तों की गिनती को लेकर फैलाई गई भ्रामक खबरों का ये काम भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत आते हैं, जिसमें आपराधिक मानहानि, सार्वजनिक शरारत, जालसाजी, पहचान की चोरी और गुमराह करने वाली इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को पब्लिश या ट्रांसमिट करने से जुड़े अपराध शामिल हैं.
इसलिए हमारा अनुरोध है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित एफआईआर दर्ज की जाए. झूठी सामग्री के मूल स्रोत और उसे आगे भेजने वालों की पहचान करने के लिए पूरी जांच की जाए. साथ ही ऐसे कामों को दोबारा होने से रोकने के लिए कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए. शिक्षा निदेशालय ने मीडिया संगठनों और नागरिकों से भी यह अपील की कि वे किसी भी सामग्री को पब्लिश या शेयर करने से पहले, खासकर शिक्षा और छात्रों की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर जानकारी को आधिकारिक स्रोतों से वेरिफाई करें.
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