शहरों और ग्रामीणों से अलग होती है मलिन बस्ती के लोगों की गणना, इन तीन हिस्सों में बांटकर होता है सेंसस
जनगणना कार्य निदेशालय ने मलिन बस्तियों की जनगणना के लिए भी तैयारी कर ली है. मलिन बस्तियों की जनगणना ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों से अलग होती है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 8, 2026 at 1:49 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में अप्रैल महीने से जनगणना के पहले चरण की शुरुआत यानी मकान की सूचीकरण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. जिसको देखते हुए जनगणना कार्य निदेशालय तैयारी में जुटा हुआ है. लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में होने वाले जनगणना और मलिन बस्तियों में जनगणना का तरीका अलग-अलग होता है. मलिन बस्तियों को तीन हिस्सों में बांटकर गणना की जाएगी.
उत्तराखंड के शहरी क्षेत्र में मलिन बस्तियों की एक बड़ी तादाद है. मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. यही वजह है कि उत्तराखंड में समय-समय पर मलिन बस्तियों को लेकर सवाल उठते रहते हैं कि आखिर मलिन बस्तियों को किसने बसाया? बावजूद इसके मलिन बस्तियों के नियमितीकरण को लेकर अभी तक कोई ठोस निर्णय सरकार नहीं ले पाई है. उत्तराखंड में वर्तमान समय 582 मलिन बस्तियां मौजूद है. अकेले देहरादून में 129 मलिन बस्तियां है, जिसमें 40 हजार घर बने हुए हैं.
हाईकोर्ट के आदेश से अध्यादेश तक: प्रदेश में मौजूद मलिन बस्तियों को हटाने और उनके पुनर्वास को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने साल 2018 में निकाय चुनाव से ठीक पहले आदेश दिए थे. लेकिन साल 2018 में आगामी नगर निकाय चुनाव को देखते हुए तत्कालीन भाजपा सरकार ने प्रदेश की सभी मलिन बस्तियों को बचाने के लिए एक अध्यादेश ले आई थी. ये अध्यादेश अगले तीन सालों के लिए अस्थाई व्यवस्था के रूप में था. उस दौरान राज्य सरकार ने इस बात पर जोर दिया था कि मलिन बस्तियों को लेकर स्थायी समाधान निकला जाएगा. लेकिन साल 2021 में अध्यादेश का समय पूरा होते ही फिर अध्यादेश को तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया.

विशेष प्रावधान संशोधन अध्यादेश, 2024 को मंजूरी: ऐसे में अध्यादेश का कार्यकाल 23 अक्टूबर 2024 को पूरा होने वाला था. जिसके बाद मलिन बस्तियों को उनके स्थानों से हटाया जाना था. लेकिन मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुहार लगाई थी कि उनकी बस्तियों को स्थाई किया जाए. ऐसे में अध्यादेश का कार्यकाल पूरा होने के दिन ही यानी 23 अक्तूबर 2024 को हुई कैबिनेट बैठक में मलिन बस्तियों की वैधता के संबंध में अध्यादेश लागू करने का निर्णय किया गया. साथ ही सरकार ने नगर निकाय और प्राधिकरण के लिए एक विशेष प्रावधान संशोधन अध्यादेश, 2024 जारी किया था. जिस अध्यादेश पर लोकभवन (राजभवन) से मंजूरी मिल गई. साथ ही प्रदेश में मौजूद सभी मलिन बस्तियों को 3 साल के लिए वैध घोषित कर दिया है. लेकिन अभी तक मलिन बस्तियों के स्थाई समाधान को लेकर कोई कार्य नहीं हो पाया है.

इन तीन हिस्सों में मलिन बस्तियों के लोगों की जनगणना: यही वजह है कि आगामी उत्तराखंड में होने वाले जनगणना के दौरान मलिन बस्तियों में जनगणना के लिए प्रक्रिया अलग अपनाई जाएगी. जिसके तहत प्रदेश में मौजूद 582 मलिन बस्तियों को तीन हिस्सों में बांटकर जनगणना की जाएगी. इसके लिए तीन कैटेगरी यानि नोटिफाइड स्लम, रिकॉग्नाइज्ड स्लम और आइडेंटिफाइड स्लम बनाया गया है. जनगणना के दौरान हर तरह की मलिन बस्तियों के लिए अलग-अलग गणना ब्लॉक बनाया जाएगा. खास बात ये है कि किसी मलिन बस्ती में मकानों की संख्या 800 से कम है, तब भी उसके लिए अलग से गणना ब्लॉक बनाया जाएगा.

ज्यादा जानकारी देते हुए जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि,
जनगणना के दौरान मलिन बस्तियों को तीन हिस्सों में बांटकर उनकी गणना की जाएगी. जिसमें नोटिफाइड स्लम (Notified slums), रिकॉग्नाइज्ड स्लम (Recognized slums) और आइडेंटिफाइड स्लम (Identified slums) शामिल है. इन स्लम में रहने वाले लोगों की जनसंख्या कितनी भी हो, लेकिन इनकी गणना के लिए अलग से ही गणना ब्लॉक बनाया जाएगा. यानी मलिन बस्तियों को तीन हिस्सों में बांटा गया है, हर हिस्से के आधार पर अलग-अलग गणना ब्लॉक तैयार किया जाएगा.
ऐसा इसलिए किया जाता है कि अगर भविष्य में मलिन बस्तियों में कोई सुधार या डेवलपमेंट के कार्य किए जाते हैं तो वो, मलिन बस्तियों से बाहर हो जाएंगे. लेकिन जब हर 10 साल में जनगणना की जाती है तो उसमें ये भी देखा जाता है कि मलिन बस्तियों में कितना सुधार या विकास हुआ है. यही वजह है कि मलिन बस्तियों को तीन भागों में बांटकर उसके लिए अलग गणना ब्लॉक बनाकर जनगणना की जाती है.
इवा आशीष श्रीवास्तव, निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड-
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