प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मारपीट केस, उमेश काऊ का बयान आया सामने, बीजेपी पर हमलावर कांग्रेस
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मारपीट मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस मामले में उमेश शर्मा काऊ ने भी गंभीर आरोप लगाये हैं.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 21, 2026 at 7:35 PM IST
नवीन उनियाल की रिपोर्ट
देहरादून: राज्य शिक्षा निदेशालय में शनिवार सुबह जो कुछ हुआ, उसने प्रशासनिक मर्यादा, कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रारंभिक शिक्षा के निदेशक के साथ कथित मारपीट के मामले में एक ओर जहां विधायक और उनके समर्थकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी जा चुकी है, वहीं दूसरी ओर विधायक ने पूरे घटनाक्रम के लिए निदेशक और प्रदर्शन कर रहे शिक्षक संगठनों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया है. इस पूरे विवाद की जमीनी पड़ताल के लिए ईटीवी भारत की टीम घटनास्थल पर पहुंची. सभी पक्षों की राय जानने की कोशिश की.
शनिवार सुबह शिक्षा निदेशालय में उस वक्त तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे. बताया जा रहा है कि वे निदेशक के कार्यालय में गए. एक विद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर विवाद शुरू हो गया. शुरू में यह विवाद मौखिक बहस तक सीमित था, लेकिन कुछ ही देर में माहौल इतना गर्म हो गया कि हाथापाई की नौबत आ गई. इस दौरान कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई. सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा.
निदेशक कार्यालय में हंगामा, आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज: ईटीवी भारत की टीम जब निदेशक के कार्यालय पहुंची तो वहां मौजूद तस्वीरों और दृश्य साक्ष्यों ने पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को और उजागर किया. घटना के समय निदेशक के कमरे में संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर की मूर्ति के ठीक सामने हंगामा और कथित मारपीट हो रही थी. कमरे में लगी तस्वीरों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल और राष्ट्रपति की तस्वीरें भी मौजूद थीं. बावजूद इसके वहां मौजूद लोगों पर न तो संवैधानिक मूल्यों का असर दिखा और न ही किसी तरह की नैतिक जिम्मेदारी का एहसास उन्हें हुआ.
घटना के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की ओर से विधायक और उनके समर्थकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी गई है. तहरीर में आरोप लगाया गया है कि विधायक के साथ आए लोगों ने न सिर्फ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि हाथापाई और तोड़फोड़ भी की. वहीं इस मामले में सामने आए कुछ वीडियो और विजुअल्स में विधायक के साथ कथित हिस्ट्रीशीटर किस्म के लोगों की मौजूदगी और उनके द्वारा की गई तोड़फोड़ भी दिखाई दे रही है. जिससे मामला और गंभीर हो गया है.
विधायक उमेश शर्मा काऊ का बयान: अब इस पूरे प्रकरण में विधायक उमेश शर्मा काऊ का भी पक्ष सामने आया है. उन्होंने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए उल्टा निदेशक पर ही बदतमीजी और उकसावे का आरोप लगाया है. विधायक का कहना है कि उनके साथ कोई गलत व्यवहार नहीं किया गया, बल्कि निदेशक ने ही अभद्रता की और सभी को भड़काया. उनका यह भी आरोप है कि कार्यालय में जो भीड़ मौजूद थी और जो तोड़फोड़ व मारपीट के लिए आमादा थी, उसे निदेशक ने ही बुलाया था.
उन्होंने इस मामले में धरना-प्रदर्शन कर रहे शिक्षक संगठनों पर भी राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया. विधायक ने कहा कि प्रदर्शन करने वाले शिक्षक वास्तव में कांग्रेसी हैं. यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस की साजिश का हिस्सा है. उन्होंने शिक्षक संगठनों के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े करते हुए कहा कि अभी शिक्षक संगठन के कोई आधिकारिक चुनाव ही नहीं हुए हैं.
बीजेपे पर हमलावर कांग्रेस: इस मामले मे गणेश गोदियाल ने कहा इस समय प्रदेश में चारों तरफ अराजकता का माहौल है. जिससे भाजपा के भीतर ही गुत्थम गुत्था जैसे हालात पैदा हो गए हैं. जिन अधिकारी के साथ मारपीट की गई है,वो उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के करीबी माने जाते हैं. इन्हीं नजदीकियों के कारण यह अधिकारी इस पद पर तैनात थे. इन्हीं अधिकारी के साथ आज विधायक की तीखी नोंक झोंक हुई है. अब सत्ता में बैठे लोगों के बीच मे आपसी मतभेद उभर कर सामने आ रहे हैं.
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल के साथ मारपीट मामले में अब कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी संगठन ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस के बाद भाकपा (माले) ने भी इस घटना की निंदा की है. उत्तराखंड भाकपा (माले) के सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि, भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ के मौजूदगी में उनके समर्थकों ने अजय कुमार पर हमला किया, ये बेहद निदंनीय और शर्मनाक है. एक तरफ उत्तराखंड में कानून व्यवस्था की स्थिति पहले से ही चौपट है, दूसरी तरफ भाजपा के विधायक और समर्थक खुलेआम कानून को अपने हाथ में ले रहे हैं. भाकपा माले की मांग है कि उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए गिरफ्तारी की जाए. अगर कार्रवाई नहीं की जाती है तो समझा जाएगा कि इस कार्रवाई को सरकार का संरक्षण प्राप्त है.
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