प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मारपीट मामला, आक्रोशित हुये शिक्षक, बोर्ड परीक्षाओं पर मंडराया संकट!
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मारपीट मामले के बाद प्रदेशभर में शिक्षकों ने विरोध शुरू कर दिया है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 21, 2026 at 4:34 PM IST
|Updated : February 21, 2026 at 4:59 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था इस समय एक गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है. एक ओर जहां लाखों छात्र लंबे समय से बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर एक राजनीतिक विवाद अब इन परीक्षाओं के भविष्य पर ही सवाल खड़े कर रहा है. मामला एक भाजपा विधायक पर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के साथ मारपीट के गंभीर आरोपों से जुड़ा है. जिसके बाद प्रदेश भर के शिक्षक आक्रोशित हो उठे हैं. उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं में अपनी सेवाएं देने या न देने को लेकर मंथन शुरू कर दिया है.
पूरा विवाद शनिवार को उस समय सामने आया, जब उमेश शर्मा काऊ अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शिक्षा निदेशालय पहुंचे. बताया जा रहा है कि वे एक सरकारी विद्यालय का नाम बदले जाने के मुद्दे को लेकर बातचीत करने पहुंचे थे. शुरुआत में माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण था. विधायक ने प्रशासन के सामने अपनी बात रखी. बातचीत के दौरान किसी बात पर कहासुनी बढ़ गई. धीरे-धीरे माहौल तनावपूर्ण होता चला गया.
आरोप है कि इसी दौरान विधायक और उनके साथ आए कार्यकर्ताओं ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के कार्यालय में घुसकर उनके साथ मारपीट की. प्रारंभिक शिक्षा निदेशक का कहना है कि यह पूरी घटना न सिर्फ प्रशासनिक मर्यादाओं के खिलाफ है, बल्कि एक वरिष्ठ अधिकारी की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है. हालांकि, हैरानी की बात यह रही कि यह मामला फिलहाल पुलिस कार्रवाई तक नहीं पहुंच पाया है, लेकिन इसके दुष्परिणाम अब शिक्षा व्यवस्था और बोर्ड परीक्षाओं तक जा पहुंचे हैं.

घटना की जानकारी मिलते ही प्रदेश के शिक्षक संगठनों में भारी रोष फैल गया. शिक्षकों का कहना है कि यदि एक वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी अपने ही कार्यालय में सुरक्षित नहीं है, तो आम शिक्षक और कर्मचारी किस भरोसे से काम करें. इसी आक्रोश के चलते शिक्षकों ने शिक्षा निदेशालय के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने निदेशालय के सामने मौजूद सड़क को जाम कर दिया, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ.
शिक्षकों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है. शिक्षक संगठनों के बीच इस बात को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है कि क्या वे आगामी बोर्ड परीक्षाओं में अपनी सेवाएं देंगे या नहीं. यह निर्णय बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि बोर्ड परीक्षाओं के संचालन में शिक्षकों की भूमिका अनिवार्य होती है, चाहे वह परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था हो, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन या निगरानी का कार्य.

राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा है कि फिलहाल सरकार और प्रशासन से बातचीत जारी है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में आरोपी विधायक की गिरफ्तारी नहीं होती है और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तो संगठन बोर्ड परीक्षाओं के बहिष्कार का फैसला ले सकता है. उनके मुताबिक, यह निर्णय किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि शिक्षकों के सम्मान और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जाएगा.
सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि यदि शिक्षक बोर्ड परीक्षाओं का बहिष्कार करते हैं, तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा. उत्तराखंड में आज से ही बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं. छात्र महीनों से इसकी तैयारी कर रहे थे. परीक्षा प्रक्रिया के बाधित होने से न सिर्फ परीक्षा कार्यक्रम बिगड़ सकता है, बल्कि छात्रों का मानसिक तनाव भी बढ़ेगा.

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे विवाद में छात्रों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं उठाना चाहिए. सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वे जल्द से जल्द इस मामले का समाधान निकालें, ताकि शिक्षा व्यवस्था पटरी पर बनी रहे.वहीं, अभिभावकों में भी इस बात को लेकर चिंता गहराती जा रही है कि कहीं राजनीतिक टकराव की कीमत उनके बच्चों को न चुकानी पड़े.

