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2 साल बनाम 5 साल पर विधानसभा में आज सीधी बहस, सीएम भजनलाल देंगे जवाब

दोपहर 2 बजे से 2 साल बनाम 5 साल विषय पर विशेष चर्चा होगी. शाम 5 नेता प्रतिपक्ष जूली और 6 बजे मुख्यमंत्री जवाब देंगे.

Rajasthan Legislative Assembly, Jaipur
राजस्थान विधानसभा, जयपुर (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 21, 2026 at 9:29 AM IST

5 Min Read
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जयपुर : अब तक राजनीतिक मंचों पर उठता रहा 2 साल बनाम 5 साल का मुद्दा विधानसभा में औपचारिक बहस का विषय बनेगा. भजनलाल शर्मा सरकार ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल को बेमिसाल बताते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यों से तुलना की चुनौती दी थी. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस को खुले मंच पर बहस का न्योता दिया था. हालांकि बयानबाजी से ऊपर उठकर उपलब्धियों पर कांग्रेस एवं भाजपा में सीधी चर्चा नहीं हुई, लेकिन अब यह टकराव विधानसभा सदन के भीतर दिखाई देगा. शनिवार को विधानसभा में 2 साल बनाम 5 साल पर चर्चा होगी.

प्रश्नकाल-शून्यकाल नहीं होगा: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की दी व्यवस्था के अनुसार सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होगी, लेकिन इसमें कुछ बदलाव किया गया है. प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं होगा. सबसे पहले राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी, जो दोपहर 2 बजे तक चलेगी. इस दौरान विभिन्न विधायकों के उठाए मुद्दों पर राजस्व मंत्री जवाब देंगे. इसके बाद दोपहर 2 बजे से 2 साल बनाम 5 साल विषय पर विशेष चर्चा शुरू होगी. करीब शाम 5 नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली अपनी बात रखेंगे. उसके बाद करीब शाम करीब 6 बजे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार की ओर से विस्तृत जवाब देंगे.

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जनहित याचिकाएं: सदन की कार्यवाही के दौरान विभिन्न जनहित से जुड़ी याचिकाएं पेश की जाएगी. अलग-अलग क्षेत्रों की आधारभूत सुविधा, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे विधायक सदन में उठाएंगे. भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी से संबंधित दो महत्वपूर्ण याचिकाएं पेश करेंगे. पहली याचिका सांगानेरी गेट से कंचन विहार होते एसटीपी प्लांट जाने वाले क्षतिग्रस्त नाले के पुनर्निर्माण से जुड़ी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले की खराब स्थिति के कारण दुर्घटना और जलभराव की आशंका बनी रहती है. दूसरी याचिका में भीलवाड़ा नगर निगम को आमजन की सुरक्षा के लिए 42 मीटर ऊंचाई की फायर लैडर उपलब्ध करवाने की मांग की जाएगी, ताकि बहुमंजिला भवनों में आगजनी जैसी घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके.

आहोर विधायक छगनसिंह राजपुरोहित आहोर क्षेत्र से जुड़ी दो याचिकाएं सदन में रखेंगे. पहली मांग पावटा पंचायत के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रसियावास खुर्द को उच्च माध्यमिक विद्यालय में क्रमोन्नत करने की है, जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च कक्षाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़े. दूसरी याचिका दयालपुरा ग्राम पंचायत मुख्यालय पर संचालित पशु उपकेंद्र को पूर्ण पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की मांग को लेकर है, जिससे पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें. इसी क्रम में सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गेदर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कार्यालय खोलने की याचिका प्रस्तुत करेंगे. उनका तर्क है कि बढ़ती आबादी और कानून-व्यवस्था की आवश्यकताओं को देखते हुए क्षेत्र में उच्च स्तरीय पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत है.

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2 साल बनाम 5 साल : भाजपा सरकार दो वर्षों की उपलब्धियों में महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण और बुनियादी ढांचे के विस्तार को प्रमुखता से रख रही है. सरकार का दावा है कि राज्य में निवेश को बढ़ावा, औद्योगिक वातावरण सुधारने और रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं. किसान सम्मान निधि के प्रभावी क्रियान्वयन, सिंचाई परियोजनाओं में तेजी, सड़क नेटवर्क के विस्तार और पेयजल योजनाओं में प्रगति को भी उपलब्धियों के रूप में गिनाया जा रहा है. सामाजिक सुरक्षा पेंशन और युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूती देने की बात कही जा रही है. कांग्रेस पांच साल के कार्यकाल में शुरू की जनकल्याणकारी योजनाओं-स्वास्थ्य बीमा विस्तार, महंगाई राहत, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं और शिक्षा क्षेत्र में सुधार का हवाला देकर भाजपा सरकार के दावों को चुनौती देने की तैयारी में है. कांग्रेस का कहना है कि उसके कार्यकाल में शुरू हुई कई योजनाओं का लाभ आज भी जनता को मिल रहा है.

पंचायत-निकाय चुनाव में सियासी लाभ : राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार श्यामसुंदर शर्मा कहते हैं कि सियासी दृष्टि से यह बहस काफी अहम मानी जा सकती है. दोनों दल आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने कामकाज का तुलनात्मक खाका पेश करेंगे. सदन में चर्चा न केवल सरकार और विपक्ष के दावों की परीक्षा होगी, बल्कि राज्य की विकास दिशा पर भी व्यापक विमर्श का अवसर देगी. शर्मा कहते हैं प्रदेश पंचायत और निकाय चुनाव सामने है. ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों की कोशिश है कि अपनी अपनी सरकार की उपलब्धियों की तुलनात्मक जानकारी आमजनता तक पहुंचाए, ताकि चुनाव में इसका सियासी लाभ ले सकें.

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