कभी शहरों में की नौकरी, आज गांव लौटकर कमा रहे लाखों रुपए, ट्राउट फिश ने बदली दिनेश सिंह की किस्मत
रुद्रप्रयाग के दिनेश सिंह चौधरी ने रिवर्स पलायन कर किया ट्राउट फिश का पालन, आज सालाना कमा रहे 4 से 5 लाख रुपए

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 8, 2026 at 4:03 PM IST
रुद्रप्रयाग: कभी रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर शहरों की दौड़ लगाने वाले युवाओं की तस्वीर अब बदल रही है. रुद्रप्रयाग के लदोली गांव निवासी दिनेश सिंह चौधरी भी इसी बदलाव का सशक्त उदाहरण हैं. जिन्होंने शहर की सुविधाओं और नौकरी को छोड़कर गांव लौटने का साहसिक निर्णय लिया और ट्राउट फिश पालन के क्षेत्र में सफलता की नई इबारत लिख डाली.
साल 2021 में शहर से गांव लौटकर शुरू किया ट्राउट फिश पालन: बता दें कि साल 2021 में दिनेश सिंह चौधरी ने गांव लौटकर स्वरोजगार का रास्ता चुना. उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित ट्राउट मछली पालन को अपनाया. शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मजबूत इरादों, तकनीकी प्रशिक्षण के साथ ही सरकारी सहयोग ने दिनेश की राह आसान कर दी. यही वजह है कि आज उनकी मत्स्य पालन इकाई न केवल ट्राउट मछली का उत्पादन कर रही है, बल्कि उनकी खुद की हैचरी में ट्राउट मछली की ब्रीडिंग भी की जा रही है.
हर साल कमा रहे 4 से 5 लाख रुपए: दिनेश सिंह चौधरी ने अपनी मत्स्य पालन इकाई को स्थापित करने में 60 फीसदी धनराशि खुद की लगाई है. जबकि मत्स्य विभाग ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से 40 फीदसी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई. ऐसे में सरकारी सहयोग, आधुनिक तकनीक और मेहनत के बदौलत उनका यह काम लगातार आगे बढ़ रहा है. यही वजह है कि ट्राउट मछली पालन से दिनेश हर साल करीब 5 लाख रुपए तक कमा रहे हैं. इससे वो स्थानीय युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं.

"दिनेश सिंह चौधरी को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत विभागीय सहायता प्रदान की गई थी. योजना का लाभ मिलने के बाद उन्होंने आधुनिक तकनीकों के साथ ट्राउट फिश पालन शुरू किया. आज वो सालाना करीब 4 से 5 लाख रुपए की आय अर्जित कर रहे हैं. यदि योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार और समृद्धि के नए द्वार खोले जा सकते हैं."- मंजू भाकुनी, जिला प्रभारी मत्स्य अधिकारी, रुद्रप्रयाग
मत्स्य विभाग कर रहा मदद: मंजू भाकुनी ने बताया कि मत्स्य विभाग समय-समय पर किसानों और युवाओं को मत्स्य पालन संबंधी प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज के साथ वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है. विभाग का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना, ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. ताकि, पलायन की समस्या को कम किया जा सके.

ट्राउट फिश के लिए मुफीद पर्वतीय इलाका: विशेषज्ञों का मानना है कि ट्राउट फिश पालन पर्वतीय क्षेत्रों के लिए काफी लाभकारी व्यवसाय है. ठंडे और स्वच्छ जल वाले क्षेत्रों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. यहां की जलवायु और ठंडा ताजा पानी ट्राउट फिश के लिए मुफीद है. ऐसे में यदि युवा वैज्ञानिक तरीके से इस व्यवसाय को करें, तो वो कम समय में बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं.

युवाओं के लिए प्रेरणा बने दिनेश सिंह चौधरी: फिलहाल, दिनेश सिंह चौधरी उत्तराखंड के ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता और रिवर्स पलायन की बदलती तस्वीर का सशक्त प्रतीक बने चुके हैं. उन्होंने ये साबित कर दिया है कि सफलता केवल शहरों में ही नहीं, बल्कि गांव की मिट्टी में भी पसीना बहाकर हासिल की जा सकती है. आज उनकी कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो गांवों में रहकर अपने भविष्य को संवारने का सपना बुन रहे हैं.
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