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दिग्विजय सिंह की दशहरा से तीसरी पदयात्रा, कांग्रेस के लिए संकट बनेगी या संजीवनी

राम मंदिर दान चोरी के खिलाफ दिग्विजय सिंह उज्जैन से अयोध्या तक निकालेंगे पदयात्रा, कांग्रेस नेता की यात्रा पर पार्टी की चुप्पी, बीजेपी ने साधा निशाना. मध्य प्रदेश ब्यूरो चीफ शिफाली पांडे की रिपोर्ट.

DIGVIJAY SINGH PADYATRA
दिग्विजय सिंह की दशहरा से तीसरी पदयात्रा (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 8, 2026 at 4:46 PM IST

6 Min Read
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भोपाल: दिग्विजय सिंह के जिन बयानों से मध्य प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में उबाल आता रहा. 20 अक्टूबर से दिग्विजय उन बयानों पर ब्रेक लगा देंगे. बोलना छोड़िए सोशल मीडिया पर कुछ लिखेंगे भी नहीं, लेकिन पदयात्रा करेंगे, वो भी उज्जैन से अयोध्या तक की. सवाल ये है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के ठीक 6 महीने पहले और मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जब पूरा 2 साल बाकी है, तब दिग्विजय की ये पदयात्रा क्या बदल पाएगी.

बीजेपी जिन्हें सनातन विरोधी कहती रही है, उन दिग्विजय सिंह के हाथों में धर्म ध्वजा कांग्रेस को मजबूती देगी या बीजेपी की सत्ता मजबूत करेगी. यात्रा का दिन गांधी जयंती से बदलकर दशहरे के पीछे की वजह क्या है. यात्रा में कार सेवक संतोष दुबे को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाना और संघ प्रमुख मोहन भागवत को भी न्यौता दिग्विजय की राजनीति का ये कौन सा दांव है. सबसे बड़ा सवाल कि निजी तौर पर निकाली जा रही दिग्विजय की ये यात्रा कांग्रेस के लिए संजीवनी बनेगी या नया संकट.

DIGVIJAY THIRD PADYATRA
दिग्विजय सिंह निकालेंगे पदयात्रा (ETV Bharat)

दिग्विजय की सनातन पदयात्रा संकट या संजीवनी

मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले 1 हफ्ते से दिग्विजय सिंह के बयान सुर्खियों में हैं. पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बयान से उलट जाकर पार्टी में ही उनका विरोध शुरू होता है. फिर वे अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान विवाद को लेकर अपनी राय रखते हैं. मामले में अदालत जाने की बात करते हैं और फिर ऐलान करते हैं कि वे इस मुद्दे पर पदयात्रा निकालेंगे. पहले 2 अक्टूबर की तारीख तय होती है. फिर दशहरे का दिन फाइनल किया जाता है.

दिग्विजय सिंह मीडिया को बयान में दम भरते हैं कि वे पर्याप्त सियासत कर चुके, अब आखिरी सांस तक धर्म की सनातन की रक्षा करेंगे. क्या दिग्विजय की ये हुंकार 2028 में मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सांस दे पाएगी. इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश भटनागर कहते हैं, "असल में दिग्विजय सिंह का इस तरह से राम भक्ति में अयोध्या तक की पदयात्रा पर निकलना जनता के लिए चोला बदलने जैसा दिखाई देता है.

जिस तरह की सियासत उनकी रही है. जिस तरह के बयान और निर्णय उनके रहे हैं. उसके बाद उनकी ये यात्रा कांग्रेस के लिए संकट बन जाने की संभावनाएं ज्यादा है. असल में दिग्विजय वो चेहरा नहीं हैं, जो बीजेपी के हिंदुत्व को बदल बन पाएं, बल्कि उनकी इस यात्रा के साथ राम मंदिर में चंदे का जो विवाद है. उसे डाल्यूट करने में दिग्विजय मदद कर देंगे, बीजेपी और हमलावर होगी."

दिग्विजय की यात्रा पर कांग्रेस की चुप्पी, बीजेपी हमलावर

दिग्विजय सिंह की इस पदयात्रा को लेकर दिल्ली से भोपाल तक कोई हलचल नहीं है. किसी बड़े नेता का बयान नहीं आया. दिग्विजय खुद भी यही कह रहे हैं कि कांग्रेस का इस पदयात्रा से कोई लेना देना नही है, बल्कि वे तो यहां तक कहते हैं कि ये उनकी सनातन के लिए निजी यात्रा है. दिग्विजय इस पदयात्रा में हर धर्म के लोगों से आव्हान कर रहे हैं. उनके मुताबिक असल सनातन सर्वधर्म समभाव है. कांग्रेस की राजनीति में खुद उनके मुताबिक उन्होंने पर्याप्त पद प्रतिष्ठा देख ली है.

DIGVIJAY PADYATRA UJJAIN TO AYODHYA
भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेते दिग्विजय सिंह (ETV Bharat)

अब उनके आगे का जीवन आखिरी सांस तक धर्म की रक्षा के लिए होगा. बीजेपी जिस धर्म और हिंदुत्व की सियासत से रफ्तार पकड़ती रही. उसी हिंदुत्व और सनातन की डगर पर दिग्विजय सिंह के बढ़े कदम बीजेपी के लिए मौका है. बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल कहते हैं, "दिग्विजय सिंह अघोषित रुप से कांग्रेस की राजनीति से किनारे कर दिए गए हैं. अब वे इसे स्वीकार लें ये उनके लिए बेहतर है. केवल अपने पुत्र की राजनीति जमाने के लिए अब भी प्रयास कर रहे हैं.

वो यात्रा निकाल लें, होगा कुछ भी नहीं. उनका जो सनातन विरोधी चरित्र जो है, उसे जनता भली भांति जानती है. मध्य प्रदेश में भोपाल लोकसभा सीट पर जिस तरह से उनकी लाखों मतों से हार हुई. जनता ने पहले ही उन्हें राजनीति में रेड कार्ड दिखा चुकी है."

दिग्विजय के दम और पदयात्राओं का दांव, असर कितना हुआ

दिग्विजय सिंह ने सबसे पहले नर्मदा परिक्रमा की थी. 2018 के विधानसभा चुनाव के एन पहले इस यात्रा को भी उन्होंने निजी यात्रा कहा था और पदयात्रा पूरी तरह धार्मिक रंग लिए थे, लेकिन दिग्विजय सिंह किसी यात्रा पर हों और सियासत ना हो ऐसा मुमकिन नहीं. तो 192 दिन की इस पदयात्रा का असर ये माना गया कि कांग्रेस ने नर्मदा किनारे के विधानसभा क्षेत्रों में 2013 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले अच्छा परफॉर्म किया. कांग्रेस की सीटें बढ़ीं और पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में आ गई.

RAM MANDIR DONATION THEFT CASE
मंदिर में ध्यान लगाते दिग्विजय सिंह (ETV Bharat)

क्रेडिट दिग्विजय सिंह को भी मिला और सरकार में उनकी पर्याप्त दखल भी रही. 2024 में पूरे 32 साल बाद राजगढ़ संसदीय सीट से जब दिग्विजय सिंह को कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर उतारा गया तो उन्होंने अपनी लोकसभा सीट में यात्राएं शुरू की. हर दिन वे अलग-अलग विधानसभा सीटों पर करीब 25 किलोमीटर चलते थे. तब कांग्रेस ने इसे जमीन पर उतरकर चुनाव लड़ने की संज्ञा दी और कहा कि ये ही जीत का मंत्री होगा, लेकिन दिग्विजय ये चुनाव हार गए.

इस लिहाज से देखिए तो उज्जैन से अयोध्या तक की पदयात्रा की तैयारी कर रहे दिग्विजय अपने राजनीतिक जीवन के उस मोड़ पर हैं. जहां उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि उनकी इस यात्रा से कांग्रेस को क्या मिलेगा.