दशहरे से दिग्विजय सिंह लेंगे सोशल मीडिया से छुट्टी, उज्जैन-अयोध्या यात्रा में मुंह सिल भाषण से गुरेज
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बताया कि 20 अक्टूबर दशहरा से मैं ये यात्रा शुरू करूंगा. मैं ये लड़ाई आखिरी सांस तक लड़ूंगा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 7, 2026 at 9:09 PM IST
|Updated : July 8, 2026 at 10:52 AM IST
भोपाल: पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी उज्जैन से अयोध्या की यात्रा राजनीतिक नहीं बल्कि धर्म की यात्रा है. मेरा काम अब धर्म की रक्षा करना है और मैं करूंगा. मेरी इस यात्रा में कोई राजनीति नहीं होगी. उन्होने यहां तक कहा कि मैं ना भाषण दूंगा ना बोलूंगा. यहां तक कि अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी कुछ नहीं लिखूंगा.
80 साल का हो गया, मैं ना बोलूंगा ना कुछ लिखूंगा
दिग्विजय सिंह अयोध्या की चंदा चोरी के बाद अब जल्द अक्टूबर में यात्रा पर निकलने वाले हैं. दो अक्टूबर से शुरू होने वाली इस यात्रा से पहले उन्होंने कहा "मैं समझता हूं... सनातन धर्म को मैं समझता हूं... वीएचपी को और आरएसएस को समझता हूं." क्या इस यात्रा का मकसद राजनीतिक नहीं है, इस पर उन्होंने कहा "मैं अस्सी साल का हो गया, मेरी पार्टी ने पांच बार एमएलए बनाया दो बार लोकसभा दो बार राज्यसभा में भेजा. इसलिए मैंने कहा कि अब किसी और को लाइए."
उन्होने कहा कि मेरा काम अब धर्म की रक्षा है. मेरी यात्रा में कोई राजनीति नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा "मैं भाषण तक नहीं दूंगा... ना कुछ बोलूंगा. मेरे ट्वीटर पर सोशल मीडिया पर अपनी तरफ से कुछ नहीं लिखूंगा." उन्होंने ये खुलासा भी किया कि इस यात्रा में उनके मुख्य अतिथि संतोष दुबे होंगे. वो कार सेवक हैं जिनके शरीर पर चार-चार गोलियां उस समय लगी थीं. सर्वधर्म के झंडे होंगे मेरी यात्रा में. दिग्विजय ने बताया कि 20 अक्टूबर दशहरा से मैं ये यात्रा शुरू करूंगा. मैं आखिरी सांस तक ये लड़ाई लड़ूंगा.

मैंने तो हर बार चंदे का हिसाब मांगा, नहीं मिला
दिग्विजय सिंह ने कहा कि बात ये है कि भारत में सनातन धर्म में भगवान राम का एक अलग महत्व है. वे हमारे आदर्श हैं, इसलिए भगवान राम के प्रति आस्था है. हमारे लिए वे इस जीवन का एक लक्ष्य हैं कि हम भगवान राम के भक्त हैं. विषेश कर राघौगढ़ जहां से मैं आता हूं, हमारे यहां राघव जी का मंदिर है. बहुत पुराने समय से वहां ज्योत जल रही है. जब शिलापूजन की रथयात्रा निकली तो मैंने चंदा दिया था. तभी मैंने चंदे का हिसाब मांगा.
नरसिम्हाराव जी ने 62 एकड़ जमीन एक्वायर करके राम मंदिर की कोशिश की. राजीव गांधी जी ने ताला खोला, लेकिन चंदे का हिसाब कभी नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट को भंग करके नरसिम्हाराव ने जो रामालय ट्रस्ट बनाया है उसे लागू करो. पांचों शंकराचार्य उसके ट्र्स्टी हों. उनसे नाम लीजिए.
चंदा चोरी मामले में अब दिग्विजय लिखेंगे चिट्ठी
दिग्विजय सिंह ने कहा, हमें इस बात की प्रसन्नता है कि गोरखनाथ मठ के प्रमुख आदित्यनाथ वहां के मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने सबसे लंबी लड़ाई लड़ी. चंपत राय जैसे लोग मोदी जी की छवि को प्रभावित कर रहे हैं. आपका ही कार्यकर्ता कह रहा है कि रोज पांच लाख गड्डी अलग-अलग निकालते थे. आज-कल सब रिकवर हो जाता है. एसआईटी इस मामले में रिकवर क्यों नहीं कर रही है?
नेशनल हैराल्ड पर कैश का ट्रांजशन नहीं वहां आपने ईडी लगा दी. लेकिन यहां खुलेआम पैसा लिया जा रहा है यहां ईडी कहां है? मैं तो सोच रहा हूं कि चिट्ठी ईडी को लिखूं कि आप कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं? बात ये है कि इसमें छोटी मछली पकड़ी गई लेकिन मगरमच्छ पकड़ में नहीं आए हैं.

