उत्तराखंड में सड़कों के जाल को डिजिटल दुनिया में उतारने पर जोर, जानिए मैपिंग के फायदे
उत्तराखंड में सड़कों की हो रही डिजिटल मैपिंग, लोनिवि अभी स्टेट हाईवे की कर रहा मैपिंग, ग्रामीण सड़कों को भी किया जाएगा शामिल

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : December 31, 2025 at 5:40 PM IST
|Updated : December 31, 2025 at 6:34 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में सड़कों के आसपास अनाधिकृत निर्माण और अतिक्रमण एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जिसके चलते भी कई बार सड़क दुर्घटनाएं होती है. खासकर प्रदेश के मुख्य सड़कों के किनारे यानी हाईवे के आसपास छोटी-छोटी दुकान आसानी से देखे जा सकते हैं, जिस पर लगाम लगाने के लिए उत्तराखंड सड़क अवसंरचना संरक्षण अधिनियम 2014 लागू है.
बावजूद इसके सड़कों के आसपास अनाधिकृत निर्माण और अतिक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसको देखते हुए लोक निर्माण विभाग अब पब्लिक एसेट्स नियमावली के तहत प्रदेश की सभी सड़कों का सर्वे करा रही है. ताकि, पीडब्ल्यूडी यानी लोक निर्माण विभाग की प्रॉपर्टी को चिन्हित किया जा सके.
डिजिटल मैपिंग के कई फायदे: दरअसल, उत्तराखंड सरकार प्रदेश में मौजूद स्टेट हाईवे से लेकर ग्रामीण सड़कों के जाल को डिजिटल दुनिया में उतरने यानी डिजिटल मैपिंग पर जोर दे रही है. मैपिंग पर कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है. सड़कों के डिजिटल मैपिंग किए जाने से न सिर्फ सड़कों के किनारे हो रहे अवैध अतिक्रमण पर लगाम लगाया जा सकेगा. बल्कि, सड़कों की सटीक स्थिति भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी.
इसके अलावा सड़कों के रखरखाव, मरम्मत और नई परियोजनाओं की योजनाएं भी पारदर्शी हो जाएगी. कुछ समय पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक कर सार्वजनिक संपत्तियों के डिजिटल मैपिंग में तेजी लाए जाने के सख्त निर्देश दिए थे. जिसके चलते अब लोक निर्माण विभाग भी सड़कों के डिजिटल मैपिंग पर जोर दे रहा है.

वहीं, ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडे ने कहा कि रोडसाइड कंट्रोल एक्ट, उत्तर प्रदेश के समय से चली आ रही है. जिस पर लोक निर्माण विभाग काम कर रहा है. इसके अलावा पीडब्ल्यूडी के लिए पब्लिक असेट्स एक्ट तैयार किया गया था, जिसकी नियमावली भी जारी हो गई है.
सभी सड़कों की होगी डिजिटल मैपिंग: इसके तहत यह प्लान किया गया है कि प्रदेश में जो भी सड़के हैं, उन सबकी डिजिटल मैपिंग किया जाए. जिसकी शुरुआत स्टेट हाईवे से हो गई और ग्रामीण सड़कों तक की डिजिटल मैपिंग की जाएगी. ताकि, राज्य सरकार की कितनी प्रॉपर्टी है, इसको मैप किया जा सके.

ऐसे में सड़क पर या फिर सड़क के आसपास अगर कोई भी अतिक्रमण होता है तो डिजिटली उसको आसानी से चेक किया जा सकेगा. ऐसे में अगर सड़क पर या फिर सड़क के आसपास कोई भी अतिक्रमण मिलता है तो फिर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए डायरेक्शन के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.
सभी जिलाधिकारियों को दिए जा चुके दिशा निर्देश: इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए डायरेक्शन को सभी जिलाधिकारी को पहले ही भेजा जा चुका है. जिसको फॉलो करते हुए पीडब्ल्यूडी यानी लोक निर्माण विभाग के पब्लिक एसेट्स से अतिक्रमण को हटाया जाएगा.

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए सबसे पहले जगह को चिन्हित करना होगा. इसके बाद संबंधित व्यक्ति से बातचीत की जाएगी, ताकि वो अपना अतिक्रमण हटा लें, अगर वो अपना अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो फिर उन्हें नोटिस दिया जाएगा और सारी फॉर्मेलिटी पूरी करने के बाद अतिक्रमण को हटाया जाएगा.
अभी स्टेट हाईवे की हो रही मैपिंग: वर्तमान समय में जिलों में स्टेट हाईवे की मैपिंग की जा रही है. ऐसे में स्टेट हाईवे के मैपिंग का काम पूरा होने के बाद ग्रामीण सड़कों की मैपिंग की जाएगी. इस डिजिटल मैपिंग के दौरान पब्लिक असेट्स पर हुए अतिक्रमण को भी देखा जा रहा है.
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