मध्य प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट के नए पैंतरे, कहीं बलास्ट के नाम पर ठगी, कहीं मनी लॉन्ड्रिंग का खौफ
डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी का बढ़ता ग्राफ, मध्य प्रदेश में इसका शिकार होने वाले 60 प्रतिशत लोग रिटायर्ड अधिकारी या कर्मचारी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : November 24, 2025 at 5:13 PM IST
|Updated : November 24, 2025 at 6:14 PM IST
Rise in Cyber Frauds : मध्य प्रदेश में इन दिनों डिजिटल अरेस्ट और साइबर क्राइम का ग्राफ रिकॉर्ड तोड़ता नजर आ रहा है. कई मामले तो इतने चौंकाने वाले हैं कि पल भर में इसका शिकार बने लोगों ने करोड़ों रु एक झटके में खो दिए. चाहे रिटायर्ड मेडिकल अधिकारी से 4.32 करोड़ की ठगी हो या रिटायर्ड बैंक मैनेजर से 67 लाख की. एक घटना की जांच पूरी नहीं हो पाती और दूसरी बड़ी वारदात सामने आ जाती है. पिछले कुछ दिनों में पूरे प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट व साइबर ठगी की बड़ी-बड़ी घटनाएं घटी हैं. वहीं, हाल ही में कटनी से भी एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. देखें पूरी रिपोर्ट...
इंदौर में 4.32 करोड़ रु की ठगी
हाल ही में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी का सबसे बड़ा मामला इंदौर से सामने आया, जहां रिटायर्ड मेडिकल ऑफिसर को एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया और उन्हें डरा धमकाकर 4.32 करोड़ रु ठग लिए गए. इस मामले में पीड़ित को साइबर ठगों ने ट्राई (TRAI)अफसर बनकर बुरी तरह डराया धमकाया और कहा कि उनका नाम मुंबई के 538 करोड़ के मनी लांड्रिंग मामले में आया है और सुप्रीम कोर्ट जज बनकर तक डराया. इसके बाद आरोपियों ने एक महीने के अंदर रिटायर्ड कर्मी के 4.32 करोड़ रु ट्रांसफर करा लिए. राज्य साइबर सेल ने इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है.

भोपाल में आतंकवादियों के नाम पर डिजिटल अरेस्ट
इंदौर की तरह भोपाल भी डिजिटल अरेस्ट के मामले में पीछे नहीं है. यहां भी आए दिन डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं. ताजा मामला 67 वर्षीय रिटायर्ड बैंक मैनेजर से ठगी का है, जिसमें ठगों ने भोपाल पुलिस का अधिकारी बनकर दंपति को बुरी तरह डराया. उनसे कहा गया कि उनका नाम हाल ही में हुए दिल्ली बम धमाकों से जुड़े आतंकवादियों के साथ आया है. ठगों ने कहा कि आतंकवादियों के खातों में 7 करोड़ और रिटायर्ड कर्मी के खाते में 70 लाख जमा हुए थे. रिटायर्ड कर्मी और उनकी पत्नी दहशत में 24 घंटे घर में बंद रहे. इस दौरान उनकी जीवन भर की कमाई को ठगों ने अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर करवा लिया.
कटनी में दिल्ली बम विस्फोट के नाम पर ठगी का प्रयास
दिल्ली विस्फोट में कई निर्दोष लोगों की मौत के बाद जहां देशभर में आक्रोश है, वहीं इसी संवेदनशील माहौल का फायदा उठाते हुए साइबर अपराधी भी सक्रिय हो गए हैं. मध्य प्रदेश के कटनी से ये दूसरा ऐसा मामला सामने आया है, जहां ठगी के लिए दिल्ली बम विस्फोट का डर बनाया गया. यहां रहने वाले डॉक्टर हजारी लाल गुप्ता को एक ठग ने एनआईए का अधिकारी बताकर फोन किया और कहा कि डॉक्टर का नाम लालकिले बम विस्फोट केस से जुड़ी संदिग्ध सूची में आया है. ठग ने ये भी कहा कि उनकी सिम का इस्तेमाल आतंकियों ने किया है. कटनी एडिशनल एसपी संतोष डेहरिया के मुताबिक, '' डर के मारे डॉक्टर अपने बैंक अकाउंट की सारी डीटेल्स और ओटीपी ठग को देने ही वाले थे और तभी उनके बेटे का फोन आ गया. बेटे को माजरा समझते देर न लगी और उसने साइबर पुलिस को इसकी सूचना दे दी. इस सतर्कता से लाखों की ठगी टल गई.''
रिटायर्ड कर्मचारी हो रहे सबसे ज्यादा शिकार
राज्य साइबर सेल के आंकड़े कहते हैं कि हर दिन डिजिटल अरेस्ट या साइबर ठगी की कोई न कोई शिकायत दर्ज होती है. वहीं, ज्यादातर मामलों में रिटायर्ड कर्मचारी डिजिटल अरेस्ट और फिर साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैे. राज्य साइबर पुलिस का मानना है कि समाज से अलग-थलग रहने और अकेले रहने की वजह से ये साइबर ठगों के आसान शिकार होते हैं. बीते सालों में आए डिजिटल अरेस्ट के मामलों में से 60 प्रतिशत मामले में रिटायर्ड लोग ही इसका शिकार हुए.
पुलिस की जागरुकता के बावजूद हो रहे डिजिटल अरेस्ट
हाल ही में इंदौर पुलिस ने तुकोगंज में एक रिटायर्ड कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट होने से बचाया था. इस दौरान एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया खुद पीड़ित के घर पहुंचे थे. एडीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक, '' पुलिस ने कुछ समय पहले पूरे प्रदेश स्तर पर साइबर ठगी व डिजिटल अरेस्ट से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया था. पुलिस लगातार विभिन्न माध्यमों से लोगों को जागरुक करने के लिए प्रचार-प्रसार करती है, बावजूद इसके कुछ लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं.''
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें?
एडीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए रूको, सोचो और एक्शन लो मंत्र अपनाएं. यानी ऐसे किसी भी कॉल के आने पर घबराएं नहीं और रुकें. जल्दबाजी में कोई भी व्यक्तिगत जानकारी देने से पहले सोचें, कि क्या कोई सरकारी अफसर, सरकारी तंत्र या व्यक्ति इस तरह की जानकारी मांग सकता है और फिर एक्शन लें, अगर आप फिर भी धोखे का शिकार हो गए हैं या इसकी रिपोर्ट करना चाहते हैं तो 1930 या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं.
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इसके अलावा साइबर एक्सपर्टस, अनजान लिंक पर क्लिक करने या अनजान मोबाइल एप्स इंस्टॉल करने से बचने की भी सलाह देते हैं. ऐसे लिंक या एप्स आपके मोबाइल हैक कर आपकी सारी व्यक्तिगत जानकारी और बैंक डीटेल्स चुरा लेते हैं, जिसके बाद साइबर फ्रॉड द्वारा ठगी आसान हो जाती है.

