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धनबाद में भीषण गर्मी से पहले एक्शन मोड में नगर निगम, जल संकट से निपटने की तेज हुई तैयारी

धनबाद नगर निगम ने शहर में जल आपूर्ति को लेकर बैठक की.

Dhanbad Municipal Corporation
धनबाद नगर निगम की बैठक में पदाधिकारी (Etv bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : April 16, 2026 at 5:34 PM IST

5 Min Read
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धनबाद: गर्मी की दस्तक के साथ ही नगर निगम एक बार फिर जल संकट से निपटने की तैयारियों में जुट गया है. हर साल की तरह इस बार भी निगम ने लोगों को सुचारू रूप से पानी उपलब्ध कराने के लिए बैठकों का दौर शुरू कर दिया है. हालांकि सवाल यह भी उठता है कि क्या ये सक्रियता सिर्फ गर्मी तक सीमित रह जाती है.

जल आपूर्ति के लिए जरुरी कदम

नगर आयुक्त आशीष गंगवार ने बताया कि जिन इलाकों में पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है. वहां जल्द पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. इसके साथ ही लंबित एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी योजना में देरी न हो.

जानकारी देते नगर आयुक्त आशीष गंगवार (Etv Bharat)

चापाकलों की मरम्मत पर फोकस

गर्मी के मौसम में बढ़ती पानी की किल्लत को देखते हुए चापाकलों की मरम्मत पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. खराब पड़े चापाकलों की पहचान कर उन्हें शीघ्र ठीक कराने का निर्देश दिया गया है, जिससे उन क्षेत्रों को राहत मिल सके, जहां अब तक पाइप लाइन की सुविधा नहीं पहुंच पाई है.

धनबाद में शहरी जल संकट की जड़

नगर आयुक्त ने यह भी स्वीकार किया कि पूर्व की कई जलापूर्ति योजनाएं एनओसी और अन्य तकनीकी कारणों से अब तक लंबित हैं. इन समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों से लगातार संपर्क और पत्राचार किया जा रहा है. वहीं हम बात करें विभिन्न जलापूर्ति योजनाओं की तो धनबाद में शहरी जल संकट की जड़ अब साफतौर पर अधूरी जलापूर्ति योजनाओं से जुड़ती दिख रही है. करोड़ों रुपये की तीन बड़ी परियोजनाएं कागजों पर आगे बढ़ चुकी हैं लेकिन जमीनी स्तर पर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की अड़चन के कारण ये योजनाएं अब भी अधर में लटकी हैं.

फिलहाल योजना ठप

सबसे बड़ी 441 करोड़ रुपये की धनबाद शहरी जलापूर्ति योजना का काम एलएंडटी कंपनी द्वारा किया जा रहा है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, लगभग 75% कार्य पूरा भी हो चुका है लेकिन परियोजना का सबसे अहम हिस्सा इंटेक वेल अब तक अधूरा है. इसका कारण दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) से अनुमति का नहीं मिलना बताया जा रहा है. बिना इंटेक वेल के जल आपूर्ति शुरू करना संभव नहीं है, जिससे पूरी योजना फिलहाल ठप पड़ी है.

एनओसी की वजह से नहीं बढ़ा काम

इसी तरह 166 करोड़ रुपये की कतरास जलापूर्ति योजना भी एनओसी के फेर में उलझी हुई है. इस योजना का करीब 60 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है लेकिन कतरी नदी में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क निर्माण विभाग (RCD) से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण आगे का कार्य रुक गया है. इसका सीधा असर कतरास क्षेत्र के हजारों लोगों पर पड़ रहा है, जो अब भी नियमित जलापूर्ति से वंचित हैं.

झरिया जलापूर्ति योजना की रफ्तार धीमी

वहीं 310 करोड़ रुपये की झरिया जलापूर्ति योजना की रफ्तार भी काफी धीमी है. यहां भी मुख्य बाधा एनओसी ही बनी हुई है. अनुमति प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है. इन तीनों योजनाओं के अधूरे रहने का असर अब साफ दिखने लगा है.

पानी के कनेक्शन देने की प्रक्रिया ठप

नगर निगम क्षेत्र में नए पानी के कनेक्शन देने की प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है. वर्तमान में करीब 39 हजार घरों में ही जलापूर्ति कनेक्शन उपलब्ध है, जबकि लक्ष्य डेढ़ लाख से अधिक घरों तक पानी पहुंचाने का था. यानी बड़ी आबादी अब भी पाइपलाइन जलापूर्ति से वंचित है.

1450 चापाकल काम नहीं करने की सूरत में

वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर शहर में कुल लगभग 2700 चापाकल लगाए गए हैं, लेकिन इनमें से करीब 1450 चापाकल खराब पड़े हुए हैं. पिछले वर्ष इनकी मरम्मत पर लगभग 74 लाख रुपये खर्च किए गए थे, बावजूद इसके कई चापाकल अब भी काम नहीं कर रहे हैं.

निगम द्वारा मरम्मत कार्य जारी होने की बात कही जा रही है लेकिन समस्या का स्थाई समाधान अब भी दूर नजर आ रहा है. कुल मिलाकर जिला प्रशासन ने संभावित जल संकट को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं लेकिन यह देखना अहम होगा कि ये प्रयास जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी साबित होते हैं.

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