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'कर्ज में कट रहा जीवन, कैसे होगा खाना-पीना..' 1 साल से मानदेय न मिलने पर बिहार में भड़कीं आशा कार्यकर्ता, स्वास्थ्य सेवाएं ठप!

पटना के धनरूआ CHC पर आशा कार्यकर्ताओं ने 12 महीने से लंबित मानदेय भुगतान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल और प्रदर्शन किया. पढ़ें खबर

DHANARUA CHC ASHA WORKERS PROTEST
प्रदर्शन करतीं आशा कार्यकर्ताएं (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : June 27, 2026 at 6:34 PM IST

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पटना: बिहार की राजधानी पटना स्थित धनरूआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर शनिवार को आशा और आशा फैसिलिटेटर संघ ने जमकर हंगामा किया. ये महिलाएं पिछले 12 महीने से लंबित मानदेय और राज्य राशि के भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही थीं. गुस्साई आशा कार्यकर्ताओं ने CHC परिसर में नारेबाजी करते हुए सरकार और विभागीय लापरवाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार: आंदोलनकारी आशा फैसिलिटेटर लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि 22 जून से ही धनरूआ प्रखंड की सभी आशा एवं आशा फैसिलिटेटर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर हैं. इसके बावजूद भुगतान नहीं होने पर शनिवार को धनरूआ CHC पर प्रदर्शन और तेज कर दिया गया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक बकाया मानदेय खाते में नहीं आ जाता, तब तक कोई भी सरकारी काम नहीं किया जाएगा.

"11 मई को सिविल सर्जन पटना कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन के बाद भुगतान के लिए आवंटन जारी कर दिया गया था और कहा गया था कि 15 जून तक सभी के खाते में पैसा चला जाएगा. लेकिन आवंटन मिलने के बाद भी अब तक किसी भी आशा या फैसिलिटेटर के खाते में राशि नहीं पहुंची है."- लक्ष्मी कुमारी,आंदोलनकारी आशा फैसिलिटेटर

DHANARUA CHC ASHA WORKERS PROTEST
नारेबाजी करतीं आशा कार्यकर्ताएं (ETV Bharat)

कर्ज के जाल में फंसा जीवन: आशा फैसिलिटेटरों ने कहा कि 12 महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके सामने अब भुखमरी की नौबत आ गई है. लक्ष्मी कुमारी ने अपना दर्द बयां करते हुए आगे कहा कि हम सभी आशा फैसिलिटी और आशा कार्यकर्ताओं को 12 महीने से मानदेय नहीं मिला है, बताइए घर का क्या होगा और कैसे खाना-पीना होगा, कर्ज में जीवन कट रहा है.

स्वास्थ्य सेवाएं हुईं ठप: कई फैसिलिटेटर कर्ज लेकर घर का खर्च चला रही हैं और बार-बार आवेदन देने और प्रदर्शन करने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं. इस हड़ताल के कारण प्रखंड क्षेत्र में नियमित टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, गर्भवती महिलाओं की एएनसी (ANC) जांच और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित होने लगी हैं.

जिम्मेदारी तय करने की मांग: रूपी कुमारी ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने वादा किया था कि 15 जून तक सभी का पैसा खाते में आ जाएगा, लेकिन अभी तक पैसे नहीं आए है, पिछले 1 साल से हम सभी लोगों का मानदेय बकाया है. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि भुगतान नहीं होने तक हड़ताल जारी रहेगी. उनका कहना था कि मानदेय रोकने वाले पदाधिकारी-कर्मचारियों पर जिम्मेदारी तय की जाए.

सैकड़ों महिलाओं ने बुलंद की आवाज: इस बड़े प्रदर्शन में मुख्य रूप से आशा फैसिलिटेटर लक्ष्मी कुमारी, नीरू कुमारी, रीता कुमारी, सुनीता कुमारी, मालती कुमारी, किरण कुमारी, सुमन रेखा, कुसुम शामिल रहीं. इनके साथ ही आशा कार्यकर्ता उषा, मंजू, गुड्डी, नीलम, पिंकी, बबीता, सुधा समेत सैकड़ों महिलाओं ने अपनी आवाज बुलंद की और न्याय की मांग की.

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