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बुलंद हौसलों की कहानी: एक एक्सीडेंट और इलेक्ट्रीशियन से चित्रकार बन गए धमतरी के बसंत साहू

बसंत साहू की कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है, जो मामूली बातों पर जिंदगी से हार मान लेते हैं.

DHAMTARI STORY OF HIGH SPIRITS
बसंत साहू के बुलंद हौसलों की कहानी (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : November 12, 2025 at 6:38 PM IST

7 Min Read
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अभिषेक मिश्रा की रिपोर्ट

धमतरी: 15 सितंबर साल 1995, एक साधारण दिन, लेकिन धमतरी के कुरूद में रहने वाले बसंत साहू के जीवन में वो दिन किसी तूफान से कम नहीं था. जब बाइक से घर लौटने के दौरान उनका एक्सीडेंट हो गया और उनके स्पाइनल कॉर्ड में गंभीर चोट लगी. इस चोट से शरीर के 95 प्रतिशत हिस्से ने काम करना बंद कर दिया. दौड़ने भागने वाले बसंत साहू की जिंदगी अचानक एक बिस्तर और व्हील चेयर पर आकर रुक गई.

सड़क हादसे से बदल गई जिंदगी लेकिन रुके नहीं: इस एक्सीडेंट में बसंत साहू की रीढ़ की हड्डी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. काफी इलाज के बाद डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि वे कभी सामान्य रूप से चल फिर नहीं पाएंगे. लेकिन जिंदगी के इसी मुश्किल दौर में बसंत साहू ने एक नई यात्रा शुरू की. बिना किसी गुरु, बिना किसी ट्रेनिंग के बसंत ने ऐसी पेंटिंग बनानी शुरू की कि हर कोई उनकी कला का दीवाना हो गया. अब बसंत साहू को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है. 3 दिसंबर को नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के दिन उन्हें ये सम्मान दिया जाएगा. चित्रकारी के इस सफर के बारे में बसंत कुमार ने ETV भारत को बताया.

बसंत साहू के बुलंद हौसलों की कहानी (ETV Bharat Chhattisgarh)

एक्सीडेंट के बाद ऐसे शुरू की पेंटिंग: बसंत साहू बताते हैं कि एक्सीडेंट के बाद उनका पूरा समय सिर्फ बिस्तर पर ही बीतता था. धीरे धीरे बसंत ने खुद को संभाला और हाथों में ब्रश थामकर चित्रकारी की राह चुनी. हादसे के लगभग सालभर बाद वे हर रोज बिस्तर पर लेटे-लेटे कागज पर टेढ़ी मेढ़ी लकीरे खींचा करते थे. हर रोज उनका यही रूटीन था. इन्हीं टेढ़ी मेढ़ी लकीरों से एक दिन उन्होंने महात्मा गांधी की तस्वीर बनानी शुरू की. बसंत साहू बताते हैं कि महात्मा गांधी हमारे देश के आदर्श हैं, इसलिए उनकी तस्वीर से चित्रकारी शुरू की. इस तस्वीर को बनाने में कई दिन लगे. आखिरकार एक दिन वह काफी अच्छी तस्वीर बन गई.

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बसंत साहू को राष्ट्रीय पुरस्कार (ETV Bharat Chhattisgarh)

बहुत खुशी मिलती थी कि ऐसी स्थिति में भी काम कर सकता हूं. यहीं से कैनवास, ऑयल कलर से पेंटिंग शुरू की- बसंत साहू, चित्रकार

दोस्तों ने बढ़ाया हौसला: बसंत कहते हैं "बापू की तस्वीर जब दोस्तों ने देखा तो उन्होंने काफी तारीफ की. दोस्तों के उत्साहवर्धन और तारीफ से प्रोत्साहन मिला. इसके बाद कई लोगों का पोट्रेट बनाया. जिसे कई लोग 50 से 60 रुपये देकर खरीदकर ले जाते थे. इससे खुशी मिलती थी और यहीं से चित्रकारी की नई नई कल्पनाएं शुरू हो गई."

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बसंत साहू कई बच्चों को सिखा रहे पेंटिंग (ETV Bharat Chhattisgarh)

अभ्यास ही मेरा गुरु है. मैंने कभी अपने आपको कमजोर नहीं माना. मेरी दुनिया रंगों में चली गई. मैं कैसा हूं, क्यां हूं, किस स्थिति में हूं, यह मैं भूल गया- बसंत साहू, चित्रकार

दाएं हाथ में पट्टा बांधकर ब्रश फंसा कर पेंटिंग: बसंत साहू व्हीलचेयर पर बैठकर चित्र बनाते हैं. अपने दाएं हाथ में एक पट्टा बांधकर ब्रश को फंसा लेते हैं. उसी से रंगों को कैनवास पर उतारते हैं. वे बताते हैं कि हर रोज सुबह 9 बजे से व्हील चेयर पर बैठकर दिन में तीन से चार घंटे चित्रकारी करते हैं. इसके अलावा घर के आसपास के बच्चों को पेंटिंग की ट्रेनिंग भी देते हैं. वह बसंत फाउंडेशन के नाम से क्लास चला रहे हैं.

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साल 1995 में एक्सी़डेंट ने बदल दी जिंदगी (ETV Bharat Chhattisgarh)

आर्ट स्कूल में भर्ती होने के लिए बच्चे ट्रेनिंग के लिए आते हैं. यहां से ट्रेनिंग लेकर कई बच्चे खैरागढ़ कला विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं- बसंत साहू, चित्रकार

देश विदेश तक पहुंची पेंटिंग: बसंत साहू की कला में लोक संस्कृति, प्रकृति और समकालीन समाज के चित्र जीवंत रूप में दिखाई देते हैं. यही वजह है कि आज बसंत की पेंटिंग ना सिर्फ देश में बल्कि विदेशों तक पहुंच रही है. कई जगह उनकी पेंटिंग की एग्जीबिशन लग चुकी है. उनकी कई कलाकृतियां आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संस्थानों, सरकारी भवनों और निजी कार्यालयों की शोभा बढ़ा रही हैं. देश ही नहीं बल्कि अमेरिका, इंग्लैंड जैसे दूसरे देश के लोग भी उनकी पेंटिंग को पसंद कर रहे हैं. उनके बनाए बस्तर आर्ट को लोग काफी पसंद करते हैं. बसंत साहू के हर चित्र में संवेदनशीलता, गहराई और भावनात्मक अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम झलकता है.

बस्तर आर्ट मुझे काफी पसंद है. बस्तर में कई सब्जेक्ट हैं. हमारा छत्तीसगढ़, खूबसूरती का गढ़ है, इन्हीं को मैं अपने रंगों में भर देता हूं- बसंत साहू, चित्रकार

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ना सिर्फ पेंटिंग बल्कि जिंदगी का पाठ भी सीख रहे बच्चे (ETV Bharat Chhattisgarh)

"मोबाइल से जितना हो सके बच्चों को दूर रखें": बसंत ने कहा आज के आधुनिक दौर में बच्चों को सृजनात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित करना बहुत जरूरी है, क्योंकि आधुनिक जमाने में बच्चे मोबाइल में धंसते चले जा रहे हैं. इस विषय पर मैंने कई बार संदेश देते हुए पेंटिंग भी बनाया है. हर माता-पिता अपनी बच्चों की प्रतिभा को देखें, पढ़ाई भी बहुत जरूरी है. लेकिन यह भी देखना जरूरी है कि मोबाइल से जितना हो सके, बच्चे दूर रहें. क्योंकि मानसिक रूप से बच्चे कमजोर होते जा रहे हैं.

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बसंत साहू की बनाई चित्रकारी (ETV Bharat Chhattisgarh)

छोटी छोटी बातों पर हार मानने वालों को बसंत का संदेश: शरीर से पैरालाइज बसंत कहते हैं कि दुनिया बहुत खूबसूरत है. माता पिता यदि बच्चों को कुछ गलत करने पर डांटते हैं तो इसमें उनका प्रेम छिपा रहता है. वे आपका ख्याल रखते हैं. छोटी छोटी बातों पर आत्मघाती कदम उठाने वालों से वे कहते हैं कि कभी भी इस तरह का काम ना करें. क्योंकि भगवान ऐसा करने वालों को कभी माफ नहीं करते. बसंत कहते हैं "जब तक जीवन है, तब तक संभावनाएं हैं. कुछ ना कुछ अच्छा कर सकते हैं. मैं जब ऐसी स्थिति में काम कर सकता हूं तो आप क्यों नहीं कर सकते."

किसी ने नहीं की अब तक मदद: बसंत ने सरकार से मांग की है कि जब कोई ऐसी परिस्थिति में काम कर रहा है तो उनकी मदद जरूर करनी चाहिए. वे कहते हैं, "मैंने बहुत अभाव और गरीबी से अपने जीवन की शुरुआत की. मेरे जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आए. लेकिन किसी ने मदद नहीं की. फिर भी भगवान चाहता है कि मैं काम करूं और रास्ता बनते गया और आज राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित हुआ हूं."

बसंत साहू आज उन सभी के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं जो जीवन की कठिन परिस्थितियों में हार मान लेते हैं. उन्होंने साबित किया है कि दिव्यांगता शरीर में हो सकती है पर मन में नहीं, उनकी कहानी सिर्फ एक कलाकार की नहीं, बल्कि अदम्य साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है. बसंत साहू को ईटीवी भारत की ओर से शुभकामनाएं.

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