भारी बारिश से धमतरी के बांध फुल, गंगरेल और मॉडमसिल्ली का जलस्तर बढ़ा, साइफन सिस्टम हुआ एक्टिव
छत्तीसगढ़ में मानसून की भारी बारिश का असर बांधों पर दिख रहा है. धमतरी के कई बांधों में पानी बढ़ गया है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 30, 2026 at 5:40 PM IST
धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले को डैम का शहर कहा जाता है. भारी बारिश की वजह से यहां के गंगरेल और मॉडमसिल्ली जैसे बांध पूरी तरह भर गए हैं. बारिश और कैचमेंट एरिया से पानी की बढ़ती आवक से जिले के कई डैमों में पानी बढ़ गया है. दुधावा और सोंढूर बांधों का भी वाटर लेवल बढ़ रहा है.
गंगरेल में 90 फीसदी से ज्यादा पानी
जिले के सबसे प्रमुख गंगरेल बांध में 91 फीसदी से अधिक जलभराव हो चुका है. करीब 32 टीएमसी क्षमता वाले इस बांध में लगातार 3548 क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है. जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो गंगरेल बांध के गेट खोले जाने की स्थिति बन सकती है. इसे देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभाग हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
मॉडमसिल्ली बांध में 98 फीसदी से ज्यादा पानी
जिले का मॉडमसिल्ली बांध लगभग पूरी क्षमता तक पहुंच चुका है. करीब 5.849 टीएमसी क्षमता वाले इस बांध में 98.82 फीसदी जलभराव दर्ज किया गया है. बांध के 100 फीसदी भरने की स्थिति में यहां लगा ऑटोमेटिक साइफन सिस्टम सक्रिय होकर पानी की निकासी शुरू कर देगा.

मॉडमसिल्ली बांध में कुल 34 गेट हैं और यहां का बेबी साइफन सिस्टम शुरू हो चुका है. इस वजह से बांध के जलस्तर और पानी की निकासी पर विशेष नजर रखी जा रही है. मॉडमसिल्ली को एशिया के पहले ऑटोमेटिक साइफन सिस्टम वाले बांध के रूप में भी बताया जाता है.
दुधावा और सोंढूर बांध भी लबालब
जिले के अन्य प्रमुख बांधों में भी लगातार बारिश के चलते पानी की स्थिति मजबूत हुई है. करीब 10.192 टीएमसी क्षमता वाले दुधावा बांध में 82.73 फीसदी जलभराव दर्ज किया गया है. वहीं 6.995 टीएमसी क्षमता वाले सोंढूर बांध में 68.90 फीसदी पानी भर चुका है. लगातार हो रही बारिश के कारण कैचमेंट एरिया से बांधों में पानी की आवक बढ़ रही है. आने वाले समय में बांध का जलस्तर और बढ़ सकता है. छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग धमतरी के बांधों पर नजर बनाए हुए हैं. जिला प्रशासन भी गंगरेल, मॉडमसिल्ली और अन्य बांधों को लेकर अलर्ट है.
भारी बारिश और नदी नालों के बढ़ते जलस्तर को लेकर लोगों से अपील की गई है. लोग बांधों के आसपास जाने से बचें. जिला प्रशासन के निर्देश का पालन करें-अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर, धमतरी
गंगरेल बांध की खासियत जानिए
छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी पर गंगरेल बांध का निर्माण हुआ है. इस बांध को रविशंकर जलाशय के नाम से भी जाना जाता है. यह धमतरी के सबसे बड़े बांध के रूप में जाना जाता है. इस बांध की क्षमता करीब 32 टीएमसी है. किसानों को सिंचाई के लिए पानी इसी डैम से सप्लाई की जाती है. यह बांध वाटर सप्लाई के लिए भी जाना जाता है. रायपुर और आस पास के क्षेत्रों में इस बांध से वाटर सप्लाई होती है. गंगरेल में जलविद्युत उत्पादन की व्यवस्था भी है. करीब 10 मेगावाट क्षमता की जलविद्युत परियोजना यहां स्थापित है. यह डैम पर्यटन के लिहाज से भी काफी प्रमुख है.
मॉडमसिल्ली बांध की विशेषता
धमतरी का मॉडमसिल्ली बांध अपने अनोखे डिजाइन और निर्माण के लिए जाना जाता है. इसका निर्माण ब्रिटिश काल में साल 1914 से 1923 के बीच हुआ है. मॉडमसिल्ली बांध में ऑटोमैटिक साइफन सिस्टम लगाया गया है. जब जलस्तर निर्धारित सीमा तक पहुंचता है, तो साइफन सिस्टम सक्रिय होकर पानी को बाहर निकालने में मदद करता है. यही तकनीक मॉडमसिल्ली को दूसरे बांधों से अलग बनाती है. इस बांध में 34 साइफन सिस्टम है.
दुधावा बांध की खूबियां
दुधावा डैम भी धमतरी की सिंचाई व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है. इसकी सकल जल भंडारण क्षमता करीब 165 मिलियन क्यूबिक मीटर बताई जाती है. दुधावा जलाशय का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में सिंचाई और जल प्रबंधन को मजबूत करना है. बारिश के दिनों में जब जलाशय में पानी की आवक तेजी से बढ़ती है, तब इसके जलस्तर पर लगातार नजर रखी जाती है.
सोंढूर डैम के बारे में जानिए
सोंढूर डैम सोंढूर नदी पर बनाया गया है. यह जलाशय नगरी क्षेत्र की सिंचाई और जलसंचयन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है. सोंढूर जलाशय की सकल भंडारण क्षमता करीब 198 मिलियन क्यूबिक मीटर बताई जाती है. इसका निर्माण मुख्य रूप से खरीफ फसलों के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था. सोंढूर बांध की एक और खासियत इसका प्राकृतिक वातावरण है. पहाड़ों और जंगलों के बीच स्थित यह जलाशय बारिश के मौसम में बेहद खूबसूरत नजर आता है.

