ये प्राइवेट प्ले स्कूल नहीं, बच्चों के लिए सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र, धमतरी में अनोखी पहल
छोटे बच्चों के लिए अब आकर्षक मॉडल आंगनबाड़ी मिसाल बन रही है. BaLA कॉन्सेप्ट अब पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 23, 2026 at 11:24 AM IST
अभिषेक मिश्रा की रिपोर्ट
धमतरी: जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर एक अनोखी पहल की गई है. यहां “BaLA (Building as Learning Aid)” कॉन्सेप्ट पर आधारित मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र तैयार किए गए हैं, जो अब पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन रहे हैं. आकर्षक रंग-रोगन, दीवारों पर शैक्षणिक चित्र और खेल-आधारित सीखने की सामग्री से ये केंद्र बच्चों के लिए जीवंत पाठशाला बन गए हैं.
क्या है BaLA (Building as Learning Aid) कॉन्सेप्ट?
BaLA कॉन्सेप्ट के तहत भवन को ही सीखने का माध्यम बनाया जाता है. इन नवाचारों से बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और बौद्धिक विकास स्वाभाविक रूप से बढ़ता है.
क्या-क्या बनाया गया है
- दीवारों पर वर्णमाला, अंक और आकृतियां
- रंग-बिरंगे तरीके से स्थानीय चित्रकथाएं
- रचनात्मक पेंटिंग से सीख रहे बच्चे
- फर्श पर पजल जैसी चीजें जिससे खेल-खेल में सीख सकें
- खिड़की-दरवाजों तक में जोड़-घटाना सीखने के लिए बॉल लगे हैं.
यहां बाथरूम और भोजन व्यवस्था की सुविधा है. बच्चे अब आने और खेलने में दिलचस्पी लेते हैं. खेल-खेल में ही बच्चे बहुत कुछ सीख लेते हैं- रेणुका टंडन, आंगनबाड़ी सहायिका
पंचायत विभाग का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि महात्मा गांधी नरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में निर्मित और निर्माणाधीन सभी आंगनबाड़ी भवनों में BaLA कॉन्सेप्ट अनिवार्य रूप से लागू किया जाए. साथ ही, महिला एवं बाल विकास विभाग और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से गुणवत्ता और तय समयसीमा में निर्माण पूरा करने पर जोर दिया गया है. प्रदेश के सभी निर्माण कार्यों को 15 मार्च 2026 तक प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.

कंडेल नवागांव की मॉडल आंगनबाड़ी बनी उदाहरण
जिले के कंडेल नवागांव में तैयार की गई मॉडल आंगनबाड़ी में बच्चों की ऊंचाई के अनुसार झरोखे, कस्टमाइज्ड टाइल्स, दीवारों पर शैक्षणिक लेखन तैयार किए गए हैं. सुरक्षित और आकर्षक वातावरण बनाने की कोशिश है जिससे यहां बच्चे अब दिलचस्पी के साथ पढ़ने आते हैं.

कलेक्टर ने बताया अनोखी पहल
धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में BaLA कॉन्सेप्ट के सकारात्मक परिणाम साफ दिखाई दे रहे हैं. बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है. सीखने की गति में सुधार हुआ है. अभिभावकों की संतुष्टि भी बढ़ी है. उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 112 मॉडल आंगनबाड़ी बन चुकी हैं और कुल 1200 आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से इसी मॉडल पर विकसित किया जाएगा.

पहले की जो आंगनवाड़ी थी और अब के आंगनबाड़ी में जमीन आसमान का फर्क है. अब आगे जितने भी आंगनबाड़ी बनेंगे वह बाला मॉडल पर ही बनेंगे- अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर
ग्रामीण स्तर पर सराहनीय काम
ग्राम पंचायतों की ओर से गुणवत्तापूर्ण निर्माण और स्थानीय कलाकारों की सहभागिता से आंगनबाड़ी केंद्रों को आकर्षक और चाइल्ड फ्रेंडली बनाया जा रहा है. पहले जर्जर और असुविधायुक्त भवन अब आधुनिक और शिक्षण-सुविधाओं से युक्त हो गए हैं. अभिभावकों का कहना है कि अब बच्चे खुशी-खुशी आंगनबाड़ी जाते हैं और पहले की तुलना में ज्यादा सक्रिय दिखते हैं.

पहले से बहुत अच्छा बदला है, बच्चे खुद कहते हैं कि मां आंगनबाड़ी जाना है. चित्र देख के बहुत कुछ सीख लेते हैं- भोजबाई सिन्हा, अभिभावक
पूरे प्रदेश के लिए बनेगा मॉडल
धमतरी की यह पहल अब पूरे छत्तीसगढ़ में लागू की जाएगी. यह न केवल प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक ढांचे के रचनात्मक उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करेगी. धमतरी का यह नवाचार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव साबित हो रहा है.


