धमतरी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका का हल्लाबोल, कहा- कम वेतन से परेशान और सरकार SIR समेत थोप रही कई काम
छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाएं 2 दिन के धरने पर हैं. तीन सूत्रीय मांगों को लेकर उन्होंने मोर्चा खोल दिया है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 27, 2026 at 2:31 PM IST
धमतरी: जिले की करीब 2200 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है. शहर के गांधी मैदान में दो दिन के धरने पर बैठकर वे सरकार से अपनी मांगें पूरी करने की अपील कर रही हैं.
क्या हैं उनकी मुख्य मांगें?
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांग है कि उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए. जैसे शिक्षा कर्मियों और पंचायत कर्मियों को नियमित किया गया, उसी तरह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए. इसके अलावा अन्य मांगे
- न्यूनतम वेतन और एम.पी. की तर्ज पर सुविधाएं- उनका कहना है कि जब तक शासकीयकरण न हो, तब तक सम्मानजनक वेतन दिया जाए और मध्यप्रदेश की तरह सुविधाएं लागू की जाएं.
- मानदेय बढ़ोतरी और सामाजिक सुरक्षा- इसके तहत हर साल ₹1000 मानदेय बढ़ाने का समझौता करने की मांग रखी गई है.
- मासिक पेंशन
- बीमा सुविधा
- सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी
- मृत्यु पर एकमुश्त सहायता राशि
कम मानदेय में ज्यादा काम
छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ का कहना है कि वे कई वर्षों से काम कर रही हैं, लेकिन बहुत कम मानदेय में ज्यादा काम करना पड़ता है. कार्यकर्ताओं को ₹10,000 और सहायिकाओं को ₹5,000 मानदेय मिलता है, जो महंगाई के समय में बहुत कम है. कई बार अन्य विभागों का काम भी उन्हें करना पड़ता है.
हमसे कई काम काम लिए जाते हैं. हाल ही में SIR काम में हमें लगाया गया. दिन-रात हम परेशान हुए, त्रस्त हो गए लेकिन सरकार 5-10 हजार रुपए देकर काम करा रही है- रेवती वत्सल, जिलाध्यक्ष
कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विधवा हैं और इतने कम वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है. बच्चों को ना ही अच्छी शिक्षा मिल पाती है और ना ही अच्छा रोजगार मिल पाता है. हम निवेदन करते हैं कि हमें शासन शासकीय कर्मचारी घोषित करें और बीमा, पेंशन जैसी कुछ सुविधाएं दें- सुशीला थामले, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

कार्यकर्ताओं की परेशानी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि विभाग का काम करने के साथ-साथ अन्य विभागों का अतिरिक्त काम भी दिया जाता है. ये धरना दो दिनों के लिए रखा गया है, ताकि सरकार का ध्यान उनकी मांगों की ओर जाए. मांगें पूरी नहीं हुई तो आगे उग्र प्रदर्शन करेंगे.

