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कैबिनेट में अग्निवीरों के लिए बड़ा फैसला, रोजगार सेल को मंजूरी, गांवों में लगेगी शहीदों की मूर्ति

गणेश जोशी ने कहा अग्निवीर अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी करके वापस लौटेंगे तो उनके रोजगार और भविष्य को लेकर तैयारी करना जरूरी है.

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कैबिनेट में अग्निवीरों के लिए बड़ा फैसला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 25, 2026 at 7:29 PM IST

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देहरादून: धामी कैबिनेट ने अग्निवीरों के भविष्य और राज्य के वीर शहीदों के सम्मान से जुड़े दो अहम फैसलों पर मुहर लगाई है. उत्तराखंड में अब सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को रोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए अग्निवीर रोजगार सेल बनाया जाएगा. साथ ही शहीद सैनिकों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी.

उत्तराखंड सरकार ने अग्निवीरों के सेवामुक्त होने के बाद उनके भविष्य को लेकर एक अहम पहल की है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए समर्पित ‘अग्निवीर रोजगार सेल’ गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. सरकार का कहना है कि यह सेल अग्निवीरों को उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और संस्थानों में उपलब्ध संभावनाओं से जोड़ने का काम करेगा.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की. उन्होंने कहा उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए समर्पित सेल गठित करने का निर्णय लिया गया है. सरकार का यह कदम उन युवाओं के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है, जिन्होंने भारतीय सेना में रहकर देश की सेवा की है.

रोजगार के साथ सरकारी योजनाओं से भी जोड़ने की तैयारी: सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि उत्तराखंड सैनिक बाहुल्य प्रदेश है. यहां से बड़ी संख्या में युवा अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. ऐसे में जब अग्निवीर अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी करके वापस लौटेंगे तो उनके रोजगार और भविष्य को लेकर पहले से तैयारी करना जरूरी है.

कैबिनेट में अग्निवीरों के लिए बड़ा फैसला (ETV Bharat)

गणेश जोशी ने बताया मुख्यमंत्री धामी ने अग्निवीरों की इस चिंता को ध्यान में रखते हुए अग्निवीर सेल यानी प्रकोष्ठ बनाने की कवायद शुरू की. अब कैबिनेट ने इसे औपचारिक मंजूरी दे दी है. इस सेल के माध्यम से सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को केवल रोजगार उपलब्ध कराने पर ही फोकस नहीं होगा, बल्कि उनकी योग्यता और प्रशिक्षण का किस तरह बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है. इस पर भी काम किया जाएगा. सैनिक कल्याण मंत्री के मुताबिक, अग्निवीरों को सरकार की विभिन्न योजनाओं में किस तरह शामिल किया जाए, उन्हें किन विभागों और संस्थानों में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं. उनकी क्षमताओं का राज्य के विकास में किस तरह उपयोग किया जा सकता है, इसके लिए विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी. इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय भी स्थापित किया जाएगा.

शहीदों के गांव में लगेगी प्रतिमा: कैबिनेट बैठक में सैनिकों और शहीदों के सम्मान से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया. सरकार ने निर्णय लिया है कि अमर बलिदानियों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी. सैनिक कल्याण मंत्री ने बताया उत्तराखंड में हर साल बड़ी संख्या में सैनिक देश की सेवा करते हुए शहीद होते हैं. ऐसे में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि प्रत्येक शहीद को उसके पैतृक गांव में सम्मान दिया जाए. वहां उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए.

गणेश जोशी ने कहा इसी भावना को देखते हुए इस प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है. सरकार का मानना है कि शहीदों की प्रतिमाएं उनके गांवों में स्थापित होने से न केवल उनके परिजनों और ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी उनके बलिदान और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिलेगी. मुख्यमंत्री ने भी इस निर्णय को वीर शहीदों और उनके परिजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति बताया है.

सरकार का कहना है कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और सैनिकों के योगदान को देखते हुए राज्य में सैनिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को और प्रभावी बनाया जा रहा है. कैबिनेट के दोनों फैसलों को उत्तराखंड की सैनिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है. एक तरफ सरकार ने अग्निवीरों की सेवा अवधि पूरी होने के बाद उनके रोजगार और पुनर्वास को लेकर संस्थागत व्यवस्था बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर शहीद सैनिकों को उनके पैतृक गांव में सम्मान देने की व्यवस्था को मंजूरी देकर सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी सामने रखा है.

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