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धमाल, गींदड़, भवाई और फड़ वाचन से सजा लोक कला संगम का मंच, दीया कुमारी ने लोक कलाओं पर कही यह बात

उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि सरकार भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को सहयोग देती रहेगी.

Diya Kumari addressing from the stage
मंच से संबोधन देती दीया कुमारी (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 22, 2026 at 10:23 PM IST

3 Min Read
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जयपुर: वैश्वीकरण के दौर में भी राजस्थान की लोक परंपराएं जीवंत हैं और नई पीढ़ी तक उन्हें पहुंचाने के लिए लोक संगम जैसे आयोजन सांस्कृतिक पुल का कार्य कर रहे हैं. इस बात को रविवार को सार्थक होते हुए देखा गया जब मंच पर शेखावटी अंचल के धमाल, गींदड़, भवाई और फड़ वाचन हुआ. जिसे देख उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने भी कहा कि लोक कलाओं के संगम से गौरव की अनुभूति होती है.

फाल्गुन की छटा हुई साकार: संस्कार भारती, जवाहर कला केन्द्र और पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से 'लोक कला संगम 2026 - राजस्थान रै लोकरंग रो उजास' का रविवार को रंगारंग समापन हुआ. तीन दिवसीय इस महोत्सव ने जयपुर को लोक रंगों से सराबोर कर दिया. मंच पर फाल्गुनी मस्ती, धमाल, गींदड़, हेला ख्याल, तेरहताली और भवाई की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. समारोह के अंतिम दिन रविवार शाम को मंच पर फाल्गुन की छटा साकार हो उठी.

डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने की आयोजन की प्रशंसा (ETV Bharat Jaipur)

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लोक कलाएं हुई जीवंत: राजकुमार शर्मा एंड पार्टी ने 'धमाल' की प्रस्तुति देकर दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया. वहीं शेखावाटी से आई टीम ने पारंपरिक 'गींदड़' के माध्यम से लोक उत्सव का जीवंत चित्र पेश किया. इसके बाद अंबालाल और गणेश मंडल की ओर से पेश 'हेला ख्याल दंगल' ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी. जबकि धनपत भोपा ने 'फड़ वाचन' के जरिए इस प्राचीन लोक परंपरा को जीवंत कर दिया. इसी तरह प्रो रीमा गोयल के निर्देशन में प्रस्तुत 'तेरहताली' और आचुकी सागर एंड पार्टी की 'भवाई' प्रस्तुति में कलात्मक संतुलन और साहस का अनोखा समन्वय दिखाई दिया.

DY CM Diya Kumari and others seated on the stage
मंच पर आसीन डिप्टी सीएम दीया कुमारी व अन्य (ETV Bharat Jaipur)

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लोक कलाओं का संगम गर्व की अनुभूति: इस दौरान मौजूद रही उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा देते हैं. उन्होंने कहा कि लोक कलाओं का ऐसा विराट संगम देखना गर्व की अनुभूति है और सरकार भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को सहयोग देती रहेगी. उन्होंने लोक कला प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कलाकारों से संवाद भी किया.

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लोक चौपाल में सामाजिक समरसता पर मंथन: इससे पहले 'लोक चौपाल' के दो सत्र आयोजित हुए. पहले सत्र में 'लोक देवता और सामाजिक समरसता' पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लोक देवता समाज को जोड़ने वाली कड़ी हैं और सामाजिक समरसता की सबसे बड़ी देन भी. सत्र में राजवीर चलकोई ने कहा कि फड़ और भोपा लोक कला की आत्मा हैं. डॉ ज्योति भारती गोस्वामी ने लोक देवताओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि लोक कथाएं समाज की जीवंत धरोहर हैं. जबकि रामू रामदेव ने लोक देवताओं को सामाजिक एकता का आधार बताया. दूसरे सत्र में 'लोक का अंतः-बाह्य सांस्कृतिक स्वरूप: पारिवारिक मूल्यों का आधार' पर चर्चा हुई. इसमें पं आलोक भट्ट ने कहा कि लोक बुजुर्गों की अनुभूतियों और अनुभवों की विरासत है. जबकि प्रो मदन सिंह राठौड़ ने लोक को भारत की आत्मा बताया. सत्र में डॉ शिवदान सिंह ने पीढ़ियों से चले आ रहे ज्ञान को 'असली लोक' की संज्ञा दी.