मां नर्मदा का सपने में आदेश! लोहे की हजारों कीलों पर लेटकर परिक्रमा कर रहा विशाल
देवास के रहने वाले विशाल की अनोखी नर्मदा परिक्रमा, लोहे की कीलों से बनी चादर पर लेटकर 22 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 5:18 PM IST
|Updated : January 10, 2026 at 5:35 PM IST
देवास: आस्था अटूट हो तो इंसान वह काम कर जाता है जो असंभव माना जाता है. कुछ ऐसा ही वाकया देखने को मिला देवास में. जहां एक शख्स मां नर्मदा से अटूट श्रद्धा के चलते लोहे की कीलों पर लेटने को तैयार हो गया. युवक के मुताबिक, मां नर्मदा ने सपने में आकर उसे लोहे से बनी चटाई पर लेटकर यात्रा करने की बात कही थी. फिर क्या था, मां नर्मदा के आदेश के मुताबिक, युवक ने लोहे की कीलों की चटाई बनाई और उस पर लेटकर 22 KM की कठिन नर्मदा यात्रा शुरु कर दी.
मां नर्मदा का अनोखा भक्त विशाल
देवास जिले के खातेगांव निवासी विशाल विश्वकर्मा की मां नर्मदा से बचपन से आस्था है. युवक के मुताबिक, ''मां नर्मदा ने उसे सपने में आकर लोहे की किलो पर लेटकर नर्मदा किनारे पूजन पाठ करने का आदेश दिया था.'' तो बस फिर क्या था, मां का आदेश मानकर भक्त विशाल ने अपनी सुतारी के बल पर लोहे की सैकड़ों कीलों से लकड़ी की चादर बना ली. यह कठिन यात्रा खातेगांव से नेमावर नर्मदा किनारे जाने के लिए रवाना हो गई. युवक के साथ कई लोग नर्मदा माई के जयकारे लगाते हुए चलने लगे.
22 किलोमीटर चलकर यात्रा मां नर्मदा किनारे पहुंचेगी. नर्मदा भक्त विशाल की भक्ति को देखकर हर कोई हैरान रह गया. यह यात्रा न सिर्फ शारीरिक रूप से असहनीय है, बल्कि इसे देखना भी रूह को झकझोर देता है. इस कठिन और कष्टदायक परिक्रमा में विशाल के साथ उनका परिवार भी कदम से कदम मिलाकर चल रहा है.

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मां नर्मदा ने सपने में दिया आदेश
विशाल विश्वकर्मा का कहना है कि, ''मां नर्मदा ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर लेटकर परिक्रमा करने का आदेश दिया. जिसके बाद उन्होंने इस कठिन संकल्प को पूरा करने का निर्णय लिया.'' देश की आस्था में मां नर्मदा का विशेष स्थान माना जाता है. मां नर्मदा की परिक्रमा भक्तों द्वारा अलग-अलग तरह से की जाती है. विशाल की नर्मदा यात्रा चर्चा में है. विशाल ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में यह यात्रा शुरू की. हालांकि यह व्यक्ति की निजी आस्था का सवाल है. समाज में इसे समझदारी व संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए.
डिस्क्लेमर- ईटीवी भारत ऐसी बातों का समर्थन नहीं करता. ये लोगों की निजी आस्था है.

