लोहे का हुक पीठ में लगाकर 42 फिट ऊंचे खंभे पर घूमे बाबा, देवास में गल महाराज मेले का नजारा
देवास में होली की धुलेंडी पर गल महाराज मेला का हुआ आयोजन, 300 साल पुरानी परंपरा की दिखी अनोखी झलक.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 4, 2026 at 5:34 PM IST
रिपोर्ट: चेतन योगी
देवास: लोहे का हुक पीठ में लगाकर ऊंचे खंभे पर गोल-गोल घूमने की परंपरा देवास सहित कई जगहों पर 300 साल से चल रही है. देवास जिले के करीब 1 दर्जन से अधिक गांवों में होली के अवसर पर गल महाराज के मेले का आयोजन हुआ. जिसमें 42 फिट ऊंचे खंभे पर पड़ियार बाबा की पीठ में लोहे का हुक लगाकर रस्सी की मदद से उन्हें गोल-गोल घुमाया गया. मान्यता है कि दैवीय शक्तियों के आशीर्वाद से पड़ियार बाबा की पीठ में लगे लोहे के हुक से दर्द नहीं होता है.
गल महाराज मेले का हुआ आयोजन
देवास के ग्रामीण क्षेत्रों में होली के बाद धुलेंडी पर गल महाराज यानी मेघनाथ मेले का आयोजन होता है. जिसमें सैकड़ों गांव के ग्रामीण शामिल होते हैं. पड़ियार बाबा के सिर पर साफा बांंधकर विधि-विधान से महाआरती और तिलक किया जाता है. इसके बाद ढोल-नगाड़ों की धुन पर बाबा की जयकारों के साथ जुलूस निकाला जाता है. इस दौरान महिलाएं लोक गीत गातीं हैं. इसके बाद बाबा को खंभे पर घुमाया जाता है.
पीठ के बल हुक लगाकर खंभे पर घूमते हैं बाबा
इसको लेकर 54 वर्षीय पड़ियार बाबा देवी सिंह ने बताया कि "हमारे बुजुर्गों की मान्यता के अनुसार गांव में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहे, फसल की अच्छी पैदावार हो, गांव को बुरी शक्तियों से निजात मिले, इसलिए होली की धुलेंडी पर मेला लगाया जाता है. मैं खुद 30 साल से गल पर घूम रहा हूं और यह परंपरा करीब 300 साल पुरानी है."
इस मेले का आयोजन जिले के सोनकच्छ, घट्टियाभाना, अगेरा, चौबाराजागीर, खेरिया, कुमारिया, पीपलरावा, निपानिया, सिरोलिया, बरोठा, हाटपीपल्या, चापड़ा, देवगुरिया सहित 1 दर्जन से अधिक स्थानों पर किया गया. इस मेले में पड़ियार बाबा देवी सिंह, अरविंद सिंह, केलासब सिंह, रामप्रसाद पटेल, इंदर सिंह, उदय सिंह, रामेश्वर, केशर सिंह, अंतर सिंह सहित अन्य बाबा पीठ के बल हुक के सहारे खंभे पर घूमते नजर आए.
किसान ने मेले के लिए कटवा दी खेत में लगी फसल
गल महाराज के मेले के लिए देवगढ़ में किसान ने अपने खेत में लगी गेहूं की फसल कटवा दी. हर वर्ष गल महाराज के मेला लगने के 10 दिन पूर्व से ही मेले की तैयारी शुरू हो जाती है. लेकिन जिस किसान की जमीन पर मेला लगता है, उस जमीन पर इस वर्ष देर से गेहू की बोवनी हुई थी, जो 15 दिन बाद पक कर तैयार होती. लेकिन मेले के लिए किसान ने घोषणा कर दी कि मेला उसी स्थान पर लगेगा, जहां वर्षों से लगता आ रहा है. इसके बाद किसान ने अपनी नुकसान सहते हुए 5 बीघ में लगे गेहूं की फसल का 30 प्रतिशत फसल कटवा दिया.
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एडीएम एसएस सोलंकी ने बताया कि "जिले के सभी क्षेत्रों में लगे गल महाराज के मेलों में जिला प्रशासन की 300 से अधिक पटवारी, गिरदावर की टीम ड्यूटी पर तैनात है. इसके साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस विभाग के 200 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं."

