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तीर्थ नगरी पुष्कर के पवित्र सरोवर में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, दिनभर पूजन और दान करने का क्रम रहा जारी

प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम किए हुए थे. सिविल डिफेंस के जवान हर घाट पर मौजूद रहे.

पुष्कर सरोवर में आस्था की डुबकी लगाते हुए लोग
पुष्कर सरोवर में आस्था की डुबकी लगाते हुए लोग (ETV Bharat Ajmer)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 25, 2026 at 4:17 PM IST

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Updated : June 25, 2026 at 5:09 PM IST

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अजमेर : हिंदू सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है. निर्जला एकादशी पर कई लोग व्रत करते हैं तो कई लोग अन्न और जल ग्रहण नहीं करते हैं. वर्ष भर में 22 एकादशी आती है, उनमें से निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है. यही वजह है कि तीर्थराज पुष्कर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना जाना लगा हुआ है.

हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्कर के 52 घाटों पर पहुंचकर पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई. साथ ही सरोवर की पूजा अर्चना कर सामर्थ्य के अनुसार दान पुण्य भी किया. निर्जला एकादशी का स्नान और पूजन करने के बाद श्रद्धालुओं ने जगत पिता ब्रह्मा मंदिर में भी दर्शन किए. निर्जला एकादशी का विशेष महत्व होने के कारण तीर्थ नगरी पुष्कर में श्रद्धालुओं की सुबह से ही आवक बनी हुई है.

पंडित रविकांत शर्मा, तीर्थ पुरोहित (ETV Bharat Ajmer)

पुष्कर तीर्थ में स्नान, हवन, पूजन, दान करके श्रद्धालु पुण्य कमा रहे हैं. निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धालु पुष्कर के 52 घाटों पर पहुंचे, जहां प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम किए हुए थे. सिविल डिफेंस के जवान हर घाट पर मौजूद रहे. श्रद्धालुओं ने पुष्कर के पवित्र सरोवर में स्नान करने के बाद तीर्थ पुरोहितों के आचार्यत्व में तीर्थराज गुरु पुष्कर सरोवर की पूजा अर्चना की. कई श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म भी किए.

पढ़ें. निर्जला एकादशी आज, मान्यता- संपूर्ण वर्ष पर्यंत की एकादशी का मिलता है फल

पूजा अर्चना और श्राद्ध कर्म के बाद श्रद्धालुओं ने जगत पिता ब्रह्मा मंदिर में दर्शन किए. ब्रह्मा मंदिर में भी श्रद्धालुओं का सुबह से ही तांता लगा रहा. दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने अपने सामर्थ्य के अनुसार दान पुण्य भी किया. कई लोगों ने मिट्टी के घड़े खरीद कर पुष्कर सरोवर के पानी को भरकर मंदिरों में भेंट किए तो कुछ ने शरबत और मिल्क रोज का वितरण किया. कई लोगों ने पंखे, जूते, वस्त्र आदि का दान किया. स्थानीय लोगों ने भी देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और पेय पदार्थों की जगह जगह पर व्यवस्थाएं की.

बाजारों में श्रद्धालुओं से शरबत, मिल्क रोज और पानी पीने की मनोहर करते स्थानीय लोग
बाजारों में श्रद्धालुओं से शरबत, मिल्क रोज और पानी पीने की मनोहर करते स्थानीय लोग (ETV Bharat Ajmer)

वराह घाट के प्रधान पंडित रविकांत शर्मा ने बताया कि वर्ष में 22 एकादशी आती है. इनमें ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है. सनातन धर्म में एकादशी के व्रत को काफी विशेष माना जाता है. जो लोग वर्ष भर एकादशी का व्रत करते हैं उन पर लोगों पर ईश्वर का आशीर्वाद होता है. साथ ही जो लोग वर्ष भर एकादशी नहीं कर पाते हैं वह निर्जला एकादशी कर लेते हैं तो उन्हें वर्ष भर की एकादशी के व्रत का पुण्य मिलता है.

ब्रह्मा मंदिर में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता
ब्रह्मा मंदिर में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता (ETV Bharat Ajmer)

निर्जला एकादशी के व्रत और हरि भजन के साथ ही दान का भी विशेष महत्व है. श्रद्धालु पंखे, शरबत, मटके, तरबूज, खरबूजे, वस्त्र, स्वर्ण, चांदी का दान करते हैं. निर्जला एकादशी पर किया गया दान अक्षय फल की प्राप्ति करवाता है. तीर्थराज नगरी पुष्कर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा हुआ है. पुष्कर के पवित्र सरोवर के 52 घाटों पर श्रद्धालुओं ने निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई है.

Last Updated : June 25, 2026 at 5:09 PM IST