मस्ती से पहले भक्ति! नए साल पर दिउड़ी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, रात 2 बजे खुले कपाट, धनबाद के मंदिरों में विशेष पूजा
नये साल के मौके पर रांची और धनबाद में लोगों ने सबसे पहले मंदिरों में पूजा की और आशीर्वाद लिया.

Published : January 1, 2026 at 6:33 PM IST
रांची/धनबाद: नववर्ष 2026 के पहले ही दिन झारखंड में धार्मिक आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला. राजधानी रांची से करीब 60 किलोमीटर दूर तमाड़ में प्राचीन कालीन मां दिउड़ी मंदिर में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन को स्पर्श दर्शन बंद करना पड़ा. श्रद्धालुओं ने मुख्य द्वार पर ही पूजा-अर्चना कर नये साल की शुरुआत देवी मां के आशीर्वाद के साथ की.
पिकनिक का दिन, लेकिन पहले भक्ति का संकल्प
आमतौर पर एक जनवरी को लोग पहाड़ों, नदियों और खूबसूरत वादियों में पिकनिक मनाने जाते हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऐसे भी हैं, जिन्होंने कहा 'पिकनिक बाद में भी हो जाएगा, नए साल की शुरुआत मां के दर्शन से ही करेंगे'. श्रद्धालुओं के अनुसार, मां के चरणों में माथा टेककर उन्होंने नए वर्ष में सुख, शांति और सकारात्मक जीवन की कामना की है.
राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंची कतार
दरअसल, रात 12 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगने लगी थी. भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर परिसर से बाहर निकलकर लाइन राष्ट्रीय राजमार्ग के सर्विस रोड तक पहुंच गई थी. बावजूद इसके, घंटों इंतजार के बाद भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी.
16 भुजाओं वाली अद्भुत प्रतिमा में आस्था की पहचान
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मां दुर्गा की साढ़े तीन फुट ऊंची और 16 भुजाओं वाली प्रतिमा, जो इसे दूसरे मंदिरों से अलग बनाती है. आमतौर पर मंदिरों में आठ या दस भुजाओं वाली प्रतिमाएं होती हैं. मान्यता है कि यह मंदिर करीब 700 साल पुराना है और इसका निर्माण 12वीं से 13वीं शताब्दी के बीच माना जाता है. यह मंदिर न सिर्फ रांची बल्कि पूरे झारखंड और देश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान बन चुका है.
नामचीन हस्तियां भी यहां आकर लगा चुके हैं हाजिरी
मां दिउड़ी के प्रति आस्था इतनी गहरी है कि झारखंड ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं. मंदिर में समय-समय पर देश के बड़े नेता एवं मंत्री और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी पूजा-अर्चना के लिए आ चुके हैं.
बीच-बीच में भजन, आरती और खीर का भोग
मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, आरती और खीर के भोग का आयोजन किया गया. रात 12 बजे से शाम तक श्रद्धालुओं की निरंतर भीड़ देखने को मिली. घंटों कतार में लगे रहने के बावजूद लोगों के चेहरे पर भक्ति और संतोष साफ झलकता रहा.
आज सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा भीड़ है. लोग रात 12 बजे से ही कतार में खड़े हैं. आमतौर पर मंदिर के कपाट सुबह 4 बजे खुलते हैं लेकिन नववर्ष के अवसर पर रात 2 बजे ही कपाट खोल दिए गए थे: मनोज पंडा, पुजारी
प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा. मंदिर और आसपास के इलाकों में पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई, ताकि दर्शन सुचारू और सुरक्षित तरीके से पूरे हो सके.
पहले परमात्मा, फिर आत्मा: श्रद्धालु
मंदिर में दर्शन करने के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि सनातनी होने के नाते पहले परमात्मा, फिर आत्मा. नए साल के पहले दिन मां के चरणों में आशीर्वाद लेना ही हमारे लिए सबसे बड़ी पिकनिक है. नया साल 2026 तमाड़ की धरती पर मौज-मस्ती नहीं बल्कि भक्ति, अनुशासन और आस्था के नाम रहा. मां दिउड़ी देवी के दर पर उमड़ी यह भीड़ बताती है कि आज भी सनातन परंपरा में आस्था की जड़ें उतनी ही मजबूत हैं और नए साल की सबसे पवित्र शुरुआत, मां के चरणों से ही होती है.
मां के दर्शन के लिए लगी लंबी लाइन
धनबाद में भी नये साल के आगमन पर मंदिरों में भक्त मंदिरों मं पहुंचे. यहां श्रद्धालुओं ने नए साल की शुरुआत ईश्वर की आराधना के साथ की. माता कल्याणेश्वरी मंदिर में दूसरे मंदिरों की तरह ही श्रद्धालुओं की लंबी लाइन दर्शन के लिए देखी गई. लोगों की मान्यता है कि नए साल के पहले दिन मंदिर में मां की पूजा अर्चना करने से जीवन में खुशहाली आती है.
भारी भीड़ में मां की आराधना
कोयलांचल और शिल्पांचल के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों में अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी. जबकि धनबाद के शक्ति मंदिर, कतरास का लिलोरी स्थान, गोबिंदपुर के भुईफोड़ मंदिर, मैथन के बालाजी मंदिर में दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें देखी गईं. श्रद्धालु अपने परिवार के साथ मंदिरों में पहुंचे और मां की आराधना की.
नये साल के मौके पर मंदिरों को सजाया गया
पूजा के दौरान भक्तों ने आराध्य देवताओं को फूल, फल, और अन्य पूजा सामग्री अर्पित कर उनकी कृपा की कामना की. मंदिरों में भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया, ताकि भक्तों को आध्यात्मिक आनंद मिल सके. इस अवसर पर मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया, जिससे मंदिरों का माहौल भव्यता के साथ साथ आकर्षक लग सके.
नये साल में बाबा धाम और बासुकीनाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, जलाभिषेक कर मांगा आशीर्वाद
नए साल पर रांची के मंदिरों में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, लोगों से प्रशासन की अपील

