बाबा नगरी बना यात्रियों का पिकनिक स्पॉट, गंगासागर जाने से पहले देवघर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
देवघर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई है. इस दौरान श्रद्धालु पिकनिक मनाते हुए दिखे.


Published : January 11, 2026 at 7:33 PM IST
देवघर: बैद्यनाथ धाम में अभी भक्ति और पिकनिक जैसा माहौल एक साथ देखने को मिल रहा है. देश के अलग-अलग राज्यों से बाबा बैद्यनाथ धाम के दर्शन करने आए श्रद्धालु सड़कों के किनारे अपने परिवार और साथियों के साथ खाना बनाते और खाते हुए दिख रहे हैं. शहर के कई हिस्सों में बसों की लंबी लाइनें और दाल-रोटी पकते हुए बर्तन इस बात का सबूत हैं कि इस समय देवघर तीर्थयात्रियों के लिए एक बड़ा पड़ाव बन गया है.
दरअसल, हर साल जनवरी में लाखों श्रद्धालु पश्चिम बंगाल के गंगासागर में गंगा स्नान की परंपरा में शामिल होने के लिए अपने घरों से निकलते हैं. लेकिन, गंगासागर से पहले बाबा बैद्यनाथ धाम में जल चढ़ाने और पूजा करने की पुरानी परंपरा के कारण श्रद्धालु देवघर जरूर आते हैं. यही वजह है कि इस समय उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और कई अन्य राज्यों के श्रद्धालु देवघर की सड़कों पर दिख रहे हैं.
ये श्रद्धालु बड़ी-बड़ी बसों में हजारों किलोमीटर का सफर तय करके आए हैं, जिसमें वे अपना सारा सामान साथ लाए हैं. झांसी, वाराणसी, देवघर, गंगासागर और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली यह तीर्थयात्रा न सिर्फ आस्था का सफर है, बल्कि यह घूमने-फिरने और सांस्कृतिक अनुभव का भी एक जरिया बन गई है. यात्रियों का कहना है कि कई राज्यों से यात्रा करने के बाद देवघर पहुंचकर उन्हें एक खास तरह की शांति मिलती है.

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण बाबा मंदिर में लंबी लाइनें लगी हुई हैं, और शहर के मुख्य चौराहों और सड़कों पर बसों की बेतरतीब पार्किंग आम बात हो गई है. उत्तर प्रदेश से आए विष्णु कुमार का कहना है कि देवघर उनके तीर्थयात्रा मार्ग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.

ज्यादा भीड़ होने के कारण उन्हें यहां एक दिन रुकना पड़ा है. ऐसे में सभी साथी मिलकर सड़क किनारे खाना बनाते हैं, जिससे उन्हें शुद्ध खाना भी मिल जाता है और पिकनिक का मजा भी आता है.

हालांकि, शहर के बाहर से आए कई श्रद्धालुओं ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर असंतोष भी जताया है. यात्रियों का कहना है कि शहर में बसों के लिए कोई व्यवस्थित पार्किंग एरिया नहीं है, और जहां भी गाड़ियां खड़ी होती हैं, वहां स्थानीय पुलिस के पैसे मांगने की शिकायतें मिल रही हैं.
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