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कड़े नियमों के बाद भी शिक्षण संस्थानों में क्यों नहीं रुक रही रैगिंग? जानें उत्तराखंड में सामने आए मामलों पर एक्शन

चिंता की बात ये है कि रैगिंग के नाम जूनियर छात्रों के साथ मारपीट करने वाले कोई अनपढ़ नहीं, बल्कि पढ़े लिखे सीनियर स्टूडेंट्स हैं.

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कब रुकेगी रैगिंग. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 22, 2026 at 11:45 AM IST

10 Min Read
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किरणकांत शर्मा

देहरादून: उत्तराखंड की पहचान एजुकेशन हब और शांत प्रदेश के रूप में होती है, लेकिन बीते कुछ समय से कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में सामने आए रैगिंग के मामलों ने एजुकेशन हब और शांत प्रदेश की छवि पर धब्बा लगाया है. खासकर मेडिकल कॉलेजों से सामने आ रहे रैगिंग के मामलों से छात्र काफी डरे हुए हैं. आखिर सरकार और पुलिस-प्रशासन की सख्ती के बाद भी मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग के मामले क्यों नहीं रुक रहे हैं?

ताजा मामला राजधानी देहरादून के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज से सामने आया था, जहां रैगिंग और मारपीट की घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने सख्त कदम उठाने हैं. हालांकि, यह घटना न सिर्फ चिंता बढ़ाने वाली है, बल्कि यह भी साबित करती है कि रैगिंग की समस्या उत्तराखंड में अब गहराई तक जड़ें जमा चुकी है.

उत्तराखंड में रैगिंग का कोई पहला मामला होता तो शायद इतना हो-हल्ला नहीं होता, लेकिन इस तरह की घटनाएं बीते कुछ सालों से लगातार देखने को मिल रही हैं, जो छात्रों में टेंशन बढ़ाने वाली है.

दून मेडिकल कॉलेज से जनवरी में सामने आया गंभीर मामला: साल 2026 के शुरुआत यानी जनवरी महीने में ही दून मेडिकल कॉलेज में ही 2025 बैच के एमबीबीएस छात्र से भयंकर मारपीट की गई. चौंकाने वाली बात ये है कि मारपीट करने वाला छात्र भी उसी बैच का बताया गया. जबकि आरोप ये लगा कि उसने 2023 और 2024 बैच के दो सीनियर छात्रों के दबाव में यह कदम उठाया. जैसे ही मामला कॉलेज प्रशासन के संज्ञान में आया हड़कंप मच गया.

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दून मेडिकल कॉलेज से हाल ही में रैगिंग का मामला सामने आया. (ETV Bharat)

प्रशासन ने बिना देरी किए दोनों सीनियर छात्रों के अभिभावकों को तलब किया और पूरे मामले की जांच एंटी रैगिंग कमेटी को सौंप दी गई. जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह घटना केवल एक झगड़े तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे जूनियर छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की प्रवृत्ति भी शामिल थी.

जांच रिपोर्ट के आधार पर दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एमबीबीएस के नौ छात्रों को तीन महीने के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से निष्कासित कर दिया. इनमें से दो छात्रों पर कॉलेज प्रशासन ने सबसे सख्त कार्रवाई करते हुए 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और उन्हें छात्रावास से स्थायी रूप से बाहर कर दिया. इसके अलावा सात अन्य छात्रों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई. हालांकि, इन छात्रों पर सीधे मारपीट का आरोप नहीं था, लेकिन जांच में यह पाया गया कि ये छात्र किसी न किसी रूप में जूनियर छात्रों को परेशान करते थे.

छोटी घटना भी रैगिंग है: दून मेडिकल कॉलेज के मीडिया इंचार्ज और नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील ओझा ने साफ कहा कि कॉलेज प्रशासन का यह संदेश है कि रैगिंग केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है. अगर कोई छात्र किसी अन्य छात्र को मानसिक रूप से परेशान करता है, डराता है या अपमानित करता है तो वो भी रैगिंग के दायरे में आता है और उस पर सख्त कार्रवाई होगी.

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जानिए रैगिंग के दायरे में क्या आता है. (ETV Bharat)

इसी सोच के तहत कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने एंटी रैगिंग सेल को दोबारा सक्रिय करते हुए सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने सुबह और शाम पूरे कैंपस में राउंड लगाने के आदेश दिए गए हैं. हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. एमबीबीएस फर्स्ट इयर छात्रावास के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है.

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जानिए कैसे करें रैगिंग की शिकायत. (ETV Bharat)

क्या ये पहला मामला है: सवाल ये है क्या यह पहला मामला है? जवाब है नहीं. दून मेडिकल कॉलेज की घटना भले ही ताजा हो लेकिन उत्तराखंड में रैगिंग का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी श्रीनगर, हल्द्वानी, पंतनगर और अन्य मेडिकल कॉलेजों से ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह समस्या किसी एक संस्थान तक सीमित नहीं है.

  • श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के मामले सामने आ चुके हैं. नवंबर 2021 में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के एक छात्र ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग NMC के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप था कि छात्रावास में सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग की. इस शिकायत के बाद कॉलेज प्रशासन हरकत में आया.
  • एंटी रैगिंग कमेटी की जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद 2019 और 2020 बैच के कुल सात सीनियर छात्रों को तीन महीने के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित कर दिया गया. साथ ही सभी सात छात्रों को छात्रावास से स्थायी रूप से निष्कासित कर दिया गया.
  • श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में इससे पहले 2017 में भी रैगिंग का मामला सामने आया था, जिसमें दो छात्रों को निष्कासित किया गया था. एक ही संस्थान में दोबारा ऐसी घटनाएं सामने आना ये सवाल खड़े करता है कि बड़े शैक्षिक संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र क्यों नहीं समझ रहे हैं?

हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज वीडियो ने खोली पोल: इसी तरह से मार्च 2022 और जनवरी 2023 में राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी रैगिंग को लेकर खूब सुर्खियों में रहा. कॉलेज का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एमबीबीएस प्रथम वर्ष के 27 छात्रों के सिर मुंडे हुए दिखाई दिए. शुरुआती तौर पर इसे परंपरा बताने की कोशिश की गई, लेकिन जांच में यह मामला रैगिंग का निकला.

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भारत में एंटी रैगिंग कानून, (ETV Bharat)

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और प्रशासनिक जांच के बाद यह साफ हो गया कि छात्रों को जबरन यह सब करने के लिए मजबूर किया गया था. इस मामले में 121 छात्रों पर जुर्माना लगाया गया और कॉलेज प्रशासन को फटकार भी झेलनी पड़ी. रातों रात इस मामले को लेकर देश में बड़ी बहस भी खड़ी हो गई थी.

2024 में फिर उभरा विवाद: ये विवाद थमा ही था कि मार्च 2024 में हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में ही एक और मामला सामने आया. जहां सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर की पिटाई की गई. इस मामले में जांच के बाद पांच छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित किया गया और 25 से 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया गया. यहां तक कि एक इंटर्न छात्र की इंटर्नशिप अवधि भी बढ़ा दी गई.

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जानिए रैगिंग मामले में कितनी सजा मिल सकती है. (ETV Bharat)

आखिर क्यों नहीं रुक पा रही रैगिंग?: बार-बार एक ही सवाल उठता है कि कड़े नियमों और सख्ती के बाद आखिरकार रैगिंग जैसी घटनाएं क्यों नहीं रुक पा रही हैं? इस सवाल का जवाब हमने उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत से जानने का प्रयास किया. इस पर उन्होंने कहा कि,

हमने पहले भी इस मामले में साफ कहा है कि संस्कृति के नाम पर गलत परंपराओं को बढ़ावा यहां किसी भी शिक्षा के संस्थान में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. जो सीनियर छात्र रैगिंग को अपना अधिकार समझते हैं, उन्हें सख्त सलाह है कि वो ऐसा कार्य ना करें. फिर भी अगर कहीं ऐसी घटनाएं हुई है तो हमने तुरंत एक्शन लिया है.
- धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार -

बता दें कि, अगर किसी के साथ भी कहीं भी रैगिंग जैसी घटना होती है तो एंटी रैगिंग कमेटी से इसकी शिकायत कर सकते हैं. शिकायत फोन या वेबसाइट के जरिए की जा सकती है- https://www.antiragging.in/- फोन नंबर- 1800-180-5522

(University Grant Commission)

वरिष्ठ डॉक्टर सुशील ओझा का बयान: रैगिंग के मामले पर ईटीवी भारत ने दून मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टर सुशील ओझा से भी बात की. उन्होंने बताया कि वो मेडिकल कॉलेज में नेत्रों को विशेषज्ञ के साथ-साथ उस टीम का भी हिस्सा हैं, जो इस तरह (रैगिंग) के मामले रोकती है.

यंग जनरेशन (Gen-Z) में अक्सर यह बातें निकलकर सामने आ रही हैं कि सब कुछ जानते हुए भी वह अपराध कर रहे है. हमारे यह पूछे जाने के बाद कि जब इतनी सख्त कानून बन गए हैं, उसके बाद भी छात्र ऐसा क्यों कर रहे हैं इस पर डॉक्टर सुशील ओझा ने कहा कि-

चोरी, डकैती और अन्य अपराधों के लिए भी बेहद बड़े स्तर पर कानून बने हैं. फिर भी अपराध हो रहे हैं. ठीक ऐसा ही इन छात्रों के साथ भी है. इन्हें पता है कि रैगिंग क्या होती है. लेकिन कई मामलों में हमने यह देखा है कि जिज्ञासावश छात्र इसमें शामिल हो जाते हैं.
- सुशील ओझा, वरिष्ठ डॉक्टर, दून मेडिकल कॉलेज -

यूजीसी गाइडलाइन में संशोधन की जरूरत: डॉक्टर सुशील ओझा का मानना है कि रैगिंग को लेकर यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) की गाइडलाइन में भी संशोधन की जरूरत है. क्योंकि आजकल अगर सीनियर जूनियर से उसका नाम पता और थोड़ी बहुत मजाक या ऐसे ही कोई बात कर लेते हैं तो छोटा सा मामला भी रैगिंग की श्रेणी में आ जाता है. उसके बाद दोनों ही पक्ष जांच, कार्रवाई और टीम के चक्कर में पड़ जाते हैं. कई बार उन्होंने देखा कि हंसते खेलते और छोटे-छोटे मामलों में रैगिंग के केस दर्ज हुए हैं.

रैगिंग से पीड़ित छात्र की काउंसलिंग कैसे की जाती है? इस सवाल पर डॉक्टर ओझा ने बताया कि वो इस तरह के मामलों को दून मेडिकल कॉलेज की वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉक्टर जय नवानी को सामने रखते हैं. वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉक्टर जय नवानी लगातार रैगिंग से पीड़ित छात्र और जिन छात्रों पर आरोप लगा है, उसे बातचीत करते हैं.

दून मेडिकल कॉलेज में तीन दिन पहले हुई घटना के बारे में बात करते हुए डॉक्टर ओझा बताते हैं कि अब जांच आगे बढ़ गई है और दोनों ही छात्रों से बातचीत चल रही है. दोनों ही छात्र एक-दूसरे को जानते हैं. अब वह कार्रवाई नहीं चाहते, लेकिन यूजीसी की गाइडलाइन ऐसी है कि हमें कार्रवाई करनी पड़ेगी और कार्रवाई आगे बढ़ रही है. जबकि दोनों एक दूसरे को बचाने के लिए अब लगातार रिक्वेस्ट कर रहे हैं.

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