शिक्षक सुसाइड मामले में देवरिया बीएसए सस्पेंड, हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन
देवरिया में शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या प्रकरण में शासन ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 27, 2026 at 10:22 PM IST
लखनऊ : देवरिया में शिक्षक आत्महत्या प्रकरण से जुड़े मामले में शासन ने बड़ी कार्रवाई की है. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई जिलाधिकारी, देवरिया की 23 फरवरी 2026 को भेजी गई जांच समिति की आख्या के परीक्षण के बाद की गई है.
बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है. इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था.
लगभग एक साल बीत जाने के बावजूद बीएसए कार्यालय द्वारा न्यायालय के आदेश दिनांक 13.02.2025 का अनुपालन नहीं किया गया. इसे पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता एवं अनियमितता माना गया. प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर शालिनी श्रीवास्तव को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम-4 के तहत निलंबित कर दिया गया है.
साथ ही, नियम-7 के अंतर्गत उनके विरुद्ध विधिवत विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित की गई है. इस प्रकरण की जांच के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल, गोरखपुर को पदेन जांच अधिकारी नामित किया गया है. राज्यपाल की स्वीकृति से यह आदेश जारी किया गया है.
आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में शालिनी श्रीवास्तव को वित्तीय नियम संग्रह खंड-2, भाग-2 से 4 के मूल नियम-53 के तहत जीवन निर्वाह भत्ता अर्द्धवेतन के बराबर देय होगा. इस पर महंगाई भत्ता भी अनुमन्य होगा, यदि वह अवकाश वेतन पर देय है. हालांकि, जिन अधिकारियों को निलंबन से पूर्व वेतन के साथ महंगाई भत्ता या उसका समायोजन प्राप्त नहीं था, उन्हें यह लाभ नहीं मिलेगा.
अन्य प्रतिकर भत्ते निलंबन की तिथि को प्राप्त वेतन के आधार पर तभी देय होंगे, जब यह प्रमाणित हो कि संबंधित मद में वास्तविक व्यय किया जा रहा है. इसके लिए शालिनी श्रीवास्तव को यह प्रमाण-पत्र देना होगा कि वह किसी अन्य सेवा, व्यापार या व्यवसाय में संलग्न नहीं हैं. निलंबन अवधि के दौरान उन्हें शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ के कार्यालय से संबद्ध किया गया है.
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