आदिवासी समाज का बूंदी कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, कंवरलाल की दया याचिका और नरेश मीणा रिहाई मामले में की ये मांग
समर्थकों ने कंवरलाल दया याचिका और नरेश मीणा रिहाई मामलों में शीघ्र सकारात्मक निर्णय की मांग की.

Published : September 2, 2026 at 8:28 PM IST
बूंदी: पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की लंबित दया याचिका पर तत्काल निर्णय कराने और नरेश मीणा की रिहाई की मांग को लेकर बुधवार को आदिवासी समाज का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया. सर्व आदिवासी समाज से जुड़े सैकड़ों समर्थक आजाद पार्क में एकत्र हुए और जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे. प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए और दोनों नेताओं के मामलों में निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग उठाई.
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों को अंदर प्रवेश नहीं दिया गया, तो उन्होंने मुख्य द्वार के बाहर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. काफी देर तक सरकार के खिलाफ नारेबाजी का दौर चलता रहा. प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे. वक्ताओं ने सरकार से दोनों मामलों में तत्काल हस्तक्षेप कर समाधान कराने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर काफी देर तक नारेबाजी और आक्रोश का माहौल बना रहा. इस दौरान आधा दर्जन थाना प्रभारी और आरएसी बल तैनात किया हुआ था.
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कंवरलाल की दया याचिका पर जल्द निर्णय की मांग: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा लंबे समय से जेल में हैं और उनकी दया याचिका राज्यपाल के समक्ष लंबित है. समाज की मांग है कि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत प्रस्तुत दया याचिका पर बिना और देरी किए निर्णय कराया जाए. इसके साथ ही कंवर लाल मीणा को स्थायी पैरोल दिए जाने के मामले में भी मानवीय और संवैधानिक आधार पर विचार करने की मांग उठाई गई. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनकी दया याचिका राज्यपाल के समक्ष एक वर्ष से अधिक समय से लंबित है. ऐसे में समाज अब इस मामले में शीघ्र निर्णय चाहता है.

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नरेश मीणा की गिरफ्तारी पर भी जताया आक्रोश: समर्थकों ने कहा कि 25 जुलाई, 2025 को झालावाड़ जिले के मनोहर थाना तहसील के पीपलोदी गांव में स्कूल की छत गिरने से बच्चों की मौत और कई बच्चों के घायल होने के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए झालावाड़ के एसआरजी अस्पताल में धरना दिया गया था. प्रदर्शनकारियों के अनुसार नरेश मीणा पर अस्पताल के आपातकालीन द्वार को अवरुद्ध करने और आईसीयू व्यवस्था बाधित करने जैसे आरोप लगाए गए हैं. समर्थकों का दावा है कि घटनाक्रम के दौरान नरेश मीणा आपातकालीन द्वार पर मौजूद ही नहीं थे. उन्होंने कहा कि घटनास्थल की वीडियोग्राफी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके.

राजनीतिक द्वेष से कार्रवाई का लगाया आरोप: प्रदर्शनकारियों ने नरेश मीणा की गिरफ्तारी को राजनीतिक पूर्वाग्रह से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि धरने में विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता मौजूद थे, लेकिन कार्रवाई समान रूप से नहीं हुई. उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज अपने नेताओं के साथ मजबूती से खड़ा है और किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सरकार से दोनों मामलों में शीघ्र सकारात्मक निर्णय की मांग करते हुए चेतावनी दी गई कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.

