विधानसभा बजट सत्र: एसएमएस अस्पताल की जर्जर अवस्था पर उठे सवाल, विधायकों ने सरकार से की पुनरुद्धार की मांग
चिकित्सा की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायक कालीचरण सराफ ने नए डॉक्टरों को पांच साल के लिए गांवों में लगाने की मांग रखी.

Published : February 18, 2026 at 6:49 PM IST
जयपुर: राजस्थान विधानसभा में बुधवार को चिकित्सा और स्वास्थ्य की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने एसएमएस अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में शॉर्ट सर्किट से हुई आगजनी की घटनाओं पर चिंता जाहिर की. भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने कहा कि एसएमएस हॉस्पिटल की स्थापना 1936 में हुई थी, लेकिन 88 साल से यह भवन जर्जर अवस्था में है. सदन में उस समय हंगामा हो गया, जब भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने कहा पूर्व मुख्यमंत्री की भाषा समझ में नहीं आती, लेकिन इसका हमने कभी विरोध नहीं किया. इस पर कांग्रेस सदस्यों ने ऐतराज जताते हुए हंगामा किया.
अनुदान मांगों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने कहा कि एमएनआईटी की सर्वे टीम ने भी एसएमएस की बिल्डिंग को जर्जर करार दिया है. उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल में लगभग 16 जगह शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएं हुई है, ट्रॉमा सेंटर में 6 मरीजों की मौत हो गई थी. अभी हाल ही में 24 घंटे के दौरान दो बार शॉर्ट सर्किट से आग लगी, उन्होंने कहा कि रिपोर्ट भी अस्पताल प्रशासन को मिल गई है, लेकिन इसे ठंडे बस्ते में डालने की बजाय इस पर काम होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों बरसात से आईसीयू में आधा फिट पानी भर गया, गनीमत यह रही कि जीवन रक्षक उपकरणों में आग नहीं लगी, जिससे कोई हादसा नहीं हुआ. उस समय वहां पर तब 14 मरीज वेंटिलेटर पर थे.
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पांच साल के लिए गांवों में लगाएं डॉक्टर: सराफ ने कहा कि हमारी सरकार ने एसएमएस हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में साल 2013 से 2018 के बीच अंडर पास बनवाया था, जिसकी वजह से लोग एसएमएस अस्पताल से ट्रॉमा सेंटर में बिना सड़क पार किए चले जाते हैं, इसलिए अब मेडिकल कॉलेज और जेके लॉन हॉस्पिटल के बीच भी अंडर पास बन जाना चाहिए. एसएमएस अस्पताल का विस्तार काफी हो चुका है बेहतर हो कि यहां पर रिंग रोड बनाई जाए जिससे कि जहां आने-जाने वाले लोगों को इसका फायदा मिल सके. विधानसभा में विधायक सराफ ने मांग की कि नए डॉक्टरों की नियुक्ति 5 साल के लिए गांव में होनी चाहिए और उन्हें ग्रामीण भत्ता दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ गांव में नहीं जाना चाहते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं.
दो साल में बिगड़े हालात: कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने भी चिकित्सा और स्वास्थ्य की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कहा कि पिछले दो वर्षों में इस विभाग में बदहाली, भ्रष्टाचार, अनियमिताएं और लापरवाही सब कुछ देखने को मिला है. उन्होंने कहा कि बायोमेडिकल उपकरणों की मरम्मत के लिए 343 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया, जबकि हकीकत में इसकी अनुमानित लागत सिर्फ 168 करोड़ रुपए थी. धारीवाल ने एसएमएस अस्पताल में अव्यवस्थाओं और हादसों का मामला उठाते हुए कहा कि एसएमएस के ट्रॉमा सेंटर में आए दिन हादसे हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि अस्पताल में फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी है और जो लगे हुए हैं, उन्हें संभालने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है. उन्होंने कहा कि आरजीएचएस योजना में पेंशनर्स को कैल्शियम, विटामिन डी, विटामिन D3 प्रोटीन पाउडर जैसे चीज नहीं मिल पा रही हैं. साथ ही मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 6000 पदों में से 2550 पद रिक्त हैं. पढ़ाने वाला कोई नहीं है. विद्यार्थियों को यूट्यूब से पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
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पूर्व मुख्यमंत्री के नाम पर हंगामा: इस चर्चा के दौरान भाजपा विधायक संदीप शर्मा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम लिए बगैर की गई टिप्पणी पर सदन में हंगामा हुआ और कांग्रेस सदस्यों ने उनकी टिप्पणी को कार्रवाई से निकालने की मांग की. चर्चा के दौरान संदीप शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की भाषा समझ में नहीं आती, लेकिन हमने कभी इसका विरोध नहीं किया. इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि जो सदस्य सदन में मौजूद नहीं है, उस पर टिप्पणी नहीं हो सकती है. इस पर संदीप शर्मा ने कहा कि आप कसम खा कर बता देना कि उनकी बात को समझते हो क्या? हम तो उनकी बात को नहीं समझते, लेकिन कभी टीका टिप्पणी नहीं करते हैं, वो हमारे मुख्यमंत्री थे, आज भी हमारे पूर्व मुख्यमंत्री हैं. इस चर्चा के बाद सभापति ने दोनों पक्षों को शांत कराया और चर्चा को आगे बढ़ाया. इस दौरान कई अन्य विधायकों ने भी अपने विचार रखे और सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की मांग की.

