केशोरायपाटन शुगर मिल चालू करने के लिए फरवरी तक का दिया अल्टीमेटम, नरेश मीणा बोले-जनप्रतिनिधियों से भरोसा उठा
महापंचायत में एकराय बनी कि फरवरी तक शुगर मिल संचालन पर ठोस निर्णय नहीं लिया तो संभाग मुख्यालय पर महापड़ाव डाला जाएगा.

Published : December 29, 2025 at 2:10 PM IST
बूंदी: जिले के केशोरायपाटन शुगर मिल संचालन के मुद्दे पर किसानों में फिर आक्रोश दिखा. पाटन के आड़ा गेला बालाजी मंदिर परिसर में रविवार रात किसान महापंचायत हुई. महापंचायत में देर रात पहुंचे युवा नेता नरेश मीणा ने केशोरायपाटन शुगर मिल संचालन के मुद्दे पर फरवरी तक निर्णय नहीं होने पर संभाग मुख्यालय पर महापड़ाव की चेतावनी दी.
संयुक्त किसान समन्वय समिति के प्रतिनिधि नवीन श्रृंगी ने बताया कि शुगर मिल संचालन को लेकर महापंचायत में क्षेत्रभर से किसान, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि आए. महापंचायत देर रात तक चली. किसान डटे रहे और एक सुर में शुगर मिल चालू करने की मांग उठाई.
युवा नेता नरेश मीणा ने महापंचायत में कहा कि शुगर मिल केवल उद्योग नहीं, बल्कि क्षेत्र के किसानों के भविष्य का सवाल है. यह लड़ाई किसी दल या जाति की नहीं, बल्कि किसान की रोटी और उसके बच्चों के भविष्य की है. क्षेत्रीय किसान दलीय और जातीय भावना से ऊपर उठकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि सत्ता में रही दोनों प्रमुख पार्टियों की सरकारों ने इस गंभीर मुद्दे पर आंखें मूंद रखी है. लोकसभा अध्यक्ष का क्षेत्र होने के बावजूद किसानों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है. इससे साफ है कि जनप्रतिनिधियों से किसानों का भरोसा उठ चुका है. अब यह लड़ाई किसान और युवा खुद लड़ेंगे. इसका परिणाम आने वाले समय में साफ नजर आएगा.
फरवरी में महापड़ाव: किसान नेता गिर्राज गौतम ने बताया कि महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि फरवरी तक सरकार ने शुगर मिल संचालन पर ठोस निर्णय नहीं लिया तो फरवरी में संभाग मुख्यालय पर महापड़ाव डाला जाएगा. इसमें कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों के किसान शामिल होंगे. पूरे कोटा संभाग को जाम किया जाएगा. आंदोलन की रणनीति और तैयारियां जल्द शुरू की जाएंगी.
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पंचायत चुनाव में दिखेगा असर: गौतम ने कहा कि महापंचायत में सभी दलों के नेताओं को दलीय भावना से ऊपर उठकर आने का आमंत्रण दिया था. अधिकांश नेता नहीं आए. पार्टियों के लिए किसान केवल वोट बैंक हैं. उनकी समस्याओं से किसी को मतलब नहीं, जो नेता महापंचायत में नहीं आए, उनका हिसाब आगामी चुनावों में किसान करेगा. गौतम ने कहा कि वे पहले अकेले किसानों की लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन अब युवाओं की ताकत जुड़ चुकी है. इसका असर आने वाले पंचायत चुनाव में साफ दिखेगा. किसान नेता दशरथ कुमार, प्रभात सिन्हा, धरणीधर सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश धाकड़ आदि मौजूद थे.
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