E20 पेट्रोल: इंजन डैमेज व माइलेज घटने की शिकायतें बढ़ीं, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति की तत्काल समीक्षा की मांग
गाड़ियों को नुकसान पहुंचा रहा इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, तत्काल समीक्षा कराने के लिए सरकार से अपील

Published : July 5, 2026 at 5:50 PM IST
नई दिल्ली: देश में प्रदूषण कम करने व कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा लागू की गई 'इथेनॉल मिश्रण नीति' इस समय चर्चा और विवादों के केंद्र में है. दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखकर ईंधन में इथेनॉल मिश्रण की मौजूदा नीति की तत्काल समीक्षा कराने की अपील की है. ट्रांसपोर्टर्स व वाहन मालिकों का दावा है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने (E20 पेट्रोल) से वाहनों में कई तरह की तकनीकी समस्याएं आ रही हैं, जिनमें माइलेज का कम होना, इंजन डैमेज होना व पिकअप का धीमा होना मुख्य रूप से शामिल है.
DTTA अध्यक्ष संजय सम्राट के अनुसार, देश में एक बहुत बड़े पैमाने पर ऐसी गाड़ियां सड़कों पर चल रही हैं, जिन्हें पारंपरिक पेट्रोल से चलने के लिए डिजाइन किया गया था. लेकिन अब जब इन गाड़ियों में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग किया जा रहा है. इससे वाहन मालिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. सोशल मीडिया व विभिन्न परिवहन मंचों पर यह शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज घट गया है, इंजन का प्रदर्शन खराब हो रहा है, पिकअप काफी धीमा हो गया है, चलते-चलते गाड़ियों से असामान्य आवाजें आने लगती हैं.
DTTA अध्यक्ष संजय सम्राट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक आम आदमी अपनी बरसों की मेहनत व खून-पसीने की कमाई से गाड़ी खरीदता है. इसके साथ उसका भावनात्मक जुड़ाव भी होता है. ऐसे में ईंधन की गुणवत्ता के कारण यदि गाड़ियां समय से पहले खराब होने लगेंगी तो यह आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ होगा. उन्होंने मांग की है कि सरकार को इस संदर्भ में सभी हितधारकों, वाहन निर्माताओं, परिवहन संगठनों और स्वतंत्र व पारदर्शी वैज्ञानिकों की मदद से एक विस्तृत और निष्पक्ष वैज्ञानिक अध्ययन कराना चाहिए. इसके अतिरिक्त पेट्रोल पंपों पर पारदर्शिता की कमी को लेकर भी शिकायत की गई है.
वहीं, दिल्ली के आनंद विहार में पेट्रोल पंप पर ईटीवी भारत ने वाहन मालिकों से बात की तो इफ्तिखार ने बताया कि वह बीते सप्ताह मसूरी घूमने के लिए गए थे. इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण उनकी गाड़ी का इंजन हीट हो गया और बंद हो गई. ये दिक्कत अब आनी शुरू हुई इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण. इससे पहले 50 हजार किलोमीटर गाड़ी चल गई है लेकिन कभी समस्या नहीं आई. वहीं, चौधरी दीवाकर का कहना है कि E20 पेट्रोल डलवाने से गाड़ी में समस्याएं तो हैं ही लेकिन सरकार को इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को 20 रुपये तक और सस्ता करना चाहिए. इसके साथ ही E20 पेट्रोल के लिए अलग फिलिंग स्टेशन होने चाहिए.
पुराने वाहनों को सबसे अधिक खतरा व ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की चिंता
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने भी इस नीति के व्यावहारिक पहलुओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि पुराने वाहनों में E20 फ्यूल के इस्तेमाल से तकनीकी खराबी आती है या इंजन पूरी तरह खराब हो जाता है तो सबसे बड़ा संकट बीमा (इंसोरेंस) दावों को लेकर खड़ा होगा. कई बीमा कंपनियां तकनीकी खराबी या ईंधन जनित नुकसान का हवाला देकर क्लेम को अस्वीकार कर सकती हैं. यदि ये व्यवस्था व मिश्रण नीति कमर्शियल व्हीकल्स (व्यावसायिक वाहनों) पर पूरी तरह लागू कर दी गई, तो ट्रांसपोर्टर्स व लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है.
राजेंद्र कपूर के मुताबिक, इथेनॉल की वजह से वाहनों के फ्यूल पंप, फ्यूल लाइन व इंजन के अन्य संवेदनशील पुर्जों में तकनीकी खराबी की आशंका बहुत अधिक बढ़ जाती है. इससे न सकेवल वाहनों के मरम्मत व मेंटेनेंस का खर्च बढ़ेगा, बल्कि यदि सड़क पर चलते समय वाहन अचानक बंद हो जाते हैं तो माल की आपूर्ति भी बाधित होगी. इससे छोटे ट्रांसपोर्टर्स पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. उन्होंने मांग की है कि सरकार, वाहन निर्माताओं, तेल कंपनियों व बीमा कंपनियों को संयुक्त रूप से इस पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने चाहिए.
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