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मौत के बाद शव का हो सम्मान, सड़क पर रखकर न हो तमाशा, शव प्रदर्शन पर कानून बनाने की मांग

सड़क पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन पर उठने लगे सवाल, जानें क्यों उठ रही है कानून बनाने की मांग

Honor of dead bodies ban on protest
मौत के बाद शव का हो सम्मान (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 6, 2026 at 11:20 AM IST

6 Min Read
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सागर : सड़कों पर शव रखकर चक्काजाम करने के नजारे प्रदेश में जहां-तहां देखने मिलते हैं. नेशनल हाईवे और सड़कों पर ऐसे जाम कई बार यातायात के साथ कानून व्यवस्था भी बिगाड़ देते हैं. सड़क दुर्घटना, दूसरी वारदातों में अपनी मांगों को लेकर मृतक के परिजन या परिचित कई बार शव को सड़क पर रखकर प्रशासन पर दबाव बनाते हैं. राजस्थान में ऐसे ही मामले में महिला डॉक्टर की खुदकुशी के बाद " मृतक शरीर सम्मान अधिनियम 2023" लागू किया गया, जिसके तहत मृत व्यक्ति को सम्मान सहित अंतिम संस्कार का अधिकार है. कोई भी व्यक्ति मृतक के शव का इस तरह अपमान करता है, तो सजा और जुर्माने का प्रावधान लाया गया है. मध्यप्रदेश में भी इसी तरह का कानून लागू किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है.

मृत शरीर को लेकर मेडिकल टीचर्स एसो. ने उठाई मांग

इस तरह की परिस्थितियों से सबसे ज्यादा प्रशासन और पुलिस को परेशानी होती है. लेकिन अनुशासन से बंधे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मानवीय संवेदनाओं को ध्यान रख कोई कठोर कदम नहीं उठाते. दूसरी ओर डॉक्टर ऐसे कानून की मांग करने लगे हैं. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन द्वारा उठाई मांग को लेकर अध्यक्ष प्रो. सर्वेश जैन कहते हैं, '' यह कानून राजस्थान विधानसभा में 2023 में लाया गया था. तात्कालिक वजह दौसा जिले में ऐसी ही परिस्थितियों में महिला डॉक्टर पर हत्या का मामला दर्ज किया गया और उन्होंने आहत होकर आत्महत्या कर ली. तब राजस्थान सरकार ने मृतक शरीर सम्मान अधिनियम 2023 लागू किया. इस कानून के दायरे में अस्पतालों को भी लाया गया कि किसी मरीज की मौत के बाद बिल भुगतान न होने पर शव को बंधक नहीं बनाया जा सकता.''

LAW AGAINST DEADBODY ROADBLOCK PROTEST
अक्सर किसी व्यक्ति की मौत के बाद परिजन करते हैं इस तरह के चक्काजाम (Etv Bharat)

उन्होंने आगे कहा, '' दोनों स्थितियों में नियमन की जरूरत है क्योंकि निजी अस्पतालें निजी खर्चे पर चलती हैं. कई तरह की परमिशन और टैक्स भरना होता है. कई बार अस्पताल वाले बिल भुगतान के अभाव में शव नहीं देते हैं. अस्पताल और डॉक्टर को मानवता की दुहाई देकर रोकना सही नहीं है क्योंकि डॉक्टर्स पर भी बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी है.''

जानें क्यों उठ रही है कानून बनाने की मांग (Etv Bharat)

क्या है शव सम्मान कानून और क्यों बना ऐसा कानून?

2023 में राजस्थान के दौसा जिले के लालसोट में गर्भवती महिला की बच्चे के जन्म के बाद मौत हो गई, जिसके बाद लोगों ने महिला डॉ. अर्चना शर्मा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग करते हुए शव को सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया. दबाव में पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया. मामला दर्ज होने के बाद डॉ. अर्चना शर्मा ने आत्महत्या कर ली. आत्महत्या के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मृतक शरीर सम्मान अधिनियम, 2023' पारित करवाया जो शवों के साथ होने वाले विरोध प्रदर्शनों और अंतिम संस्कार में देरी को प्रतिबंधित करता है.

roadblock with deadbody
चक्काजाम से आमजन को होते हैं कई तरह के आर्थिक नुकसान (Etv Bharat)

इसका उद्देश्य मृतक के शरीर, परिवार के मानवाधिकारों को सुरक्षित करना है. इसके तहत शव को रखकर सड़क जाम करना या विरोध प्रदर्शन करना कानूनी अपराध है. ऐसा करने पर परिचित या गैर-परिवार सदस्य को 6 महीने से 5 साल तक की सजा और जुर्माना, परिजनों के प्रदर्शन पर 2 साल तक की जेल हो सकती है.

ऐसे प्रदर्शनों से बिगड़ती है कानून व्यवस्था की स्थिति

कहीं सड़क दुर्घटना, जघन्य अपराध या अस्पतालों में इलाज के दौरान किसी की मौत के बाद नाराज परिजन आमतौर पर ये कदम उठाते हैं. मृतक के शव को सड़क पर रखकर विरोध करते हैं. ऐसे प्रदर्शन से कई किमी तक जाम लगने से बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान होता है. कई बार अस्पतालों में जब किसी मरीज की मौत होती है, तो परिजन उचित इलाज ना होने का आरोप लगा विरोध प्रदर्शन करते हैं. कई बार निजी अस्पतालों में बिल का भुगतान ना होने पर अस्पताल प्रबंधन भी शव देने से इनकार कर देता है.

DEAD BODY ROADJAM RAJSTHAN LAW
सड़क पर रखकर चक्काजाम करने को बताया गया गलत (Etv Bharat)

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इसे लेकर रिटायर्ड पुलिस अधिकारी केके शर्मा कहते हैं, '' ऐसी स्थितियां चुनौती पूर्ण होती हैं और आजकल ऐसा काफी ज्यादा होने लगा है. कानून व्यवस्था बिगड़ने से कई बार बीमार व्यक्ति भी फंस जाते हैं और समय पर इलाज ना होने से मौत हो जाती है. प्रशासन और पुलिस लाचार होता है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों के साथ भावनात्मक पहलू जुड़ा होता है. ऐसी स्थितियों पर नियंत्रण के लिए राजस्थान सरकार का कानून उन प्रदेशों में भी लागू किया जा सकता है, जहां इस तरह की परिस्थितियों आए दिन बनती हैं.''

मृतक शरीर का भी मानव अधिकार

शासकीय अभिभाषक दीपक पौराणिक कहते हैं, '' सामान्यतः ये अधिनियम ऐसी परिस्थितियों के खिलाफ है, जो मृत व्यक्ति के अधिकार और मर्यादा का उल्लंघन करते हैं. इस अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत प्रत्येक मृत व्यक्ति को अधिकार है कि जितनी जल्दी हो सके, उस व्यक्ति का उसकी जाति, समुदाय और धर्म के हिसाब से अंतिम संस्कार हो. मृत व्यक्ति के लिए भी सम्मान पूर्वक अंतिम संस्कार का अधिकार है. ये अधिनियम मृत शरीर की मर्यादा को ध्यान रखकर बनाया गया है.''

उन्होंने आगे कहा, '' कानून की मंशा है कि ऐसे विरोध प्रदर्शन की जगह जल्द से जल्द मृतक का ससम्मान अंतिम संस्कार किया जाए. मध्य प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर की बात करें, तो आईपीसी में धारा 341 के तहत सदोष अवरोध उत्पन्न करने, जिनमें चक्का जाम, ट्रैफिक रोकना और किसी स्थान को अवरुद्ध करना आता है. वह अपराध की श्रेणी में है, जिसमें एक माह की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. दूसरी तरफ राजस्थान सरकार का अधिनियम मृत शरीर के सम्मान को लेकर तैयार किया गया है.''