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'..रसगुल्ला नहीं खिलाए..' डिप्टी सीएम से दिलीप जायसवाल की शिकायत पर विधानसभा में जमकर लगे ठहाके

बिहार विधानसभा की कार्यवाही के 15वें दिन सदन में जमकर ठहाके लगे. सियाराम सिंह के सवाल से शुरू हुई चर्चा 'मीठे दंगल' में बदल गई.

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बिहार विधानसभा में लगे ठहाके (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 23, 2026 at 1:37 PM IST

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पटना: बिहार विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र में उस वक्त मिठास घुल गई, जब बाढ़ की प्रसिद्ध 'खोबी लाई' को GI (Geographical Indication) टैग दिलाने का मामला सदन में गूंजा. बीजेपी के बाढ़ विधायक सियाराम सिंह के सवाल से शुरू हुई चर्चा देखते ही देखते बिहार के विभिन्न जिलों के जायके के 'मीठी लड़ाई' में तब्दील हो गई. इस दौरान विधायकों ने अपनी-अपनी मिठाइयों को जीआई टैग देने की मांग की तो दिलीप जायसवाल ने ऐसा बयान दिया कि पूरा सदन काफी देर तक ठहाका लगाता रह गया.

खोबी लाई पर सवाल: बाढ़ विधायक सियाराम सिंह ने अपनी क्षेत्रीय मिठाई खोबी लाई की को जीआई टैग दिलाने को लेकर सवाल किया था. उन्होंने सदन में कहा कि मेरे सवाल का जो जवाब मिला है, उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं. जवाब दिया गया है कि 19 मई 2025 से जीआई रजिस्ट्री चेन्नई को आवेदन दिया गया है, जो कि प्रक्रिया अधीन बताया जा रहा है.

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खोबी लाई (ETV Bharat)

"मैं आरणीय उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल से पूछना चाहता हूं कि ये कब तक होगा? खोबी लाई को जीआई टैग के सवाल पर जो जवाब मिला है मैं उससे असंतुष्ट हूं."- सियाराम सिंह,बाढ़ विधायक

दिलीप जायसवाल का जवाब: इस पर उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने जवाब देते हुए कहा कि इस काम को उद्योग विभाग नहीं करता है. फिर भी मैंने उत्तर दिया है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर भागलपुर द्वारा बाढ़ में जो लाई उत्पाद संघ को सहयोग प्रदान करते हुए पटना जिले के बाढ़ के खोबी की लाई को जीआई टैग के लिए कृषि विभाग के द्वारा पत्र चेन्नई विभाग को आवेदन किया गया है. हमलोग भी जब बाढ़ से गुजरते हैं तो ये खोबी लाई खाते हैं.

"आवेदन अभी चेन्नई में लंबित है. हम फिर से एक बार कृषि विभाग को अनुरोध करते हैं कि एक पत्र भेज दें. वहां से हरी झंडी मिलने के बाद जीआई टैग प्रदान किया जाएगा. इसके पहले भी हमलोगों ने मुजफ्फरपुर की शाही लीची. बांका के कतरनी चावल, भागलपुर के जर्दालु आम, मगही पान, नालंदा के सिलाव खाजा, मिथिला के मखाना, मधुबनी पेंटिंग आदि को जीआई टैग प्रदान हुआ है."- दिलीप जायसवाल, उद्योग मंत्री, बिहार

स्पीकर ने गयाजी के तिलकुट को टैग की उठा दी मांग: दिलीप जायसवाल के जवाब के तुरंत बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने हंसते हुए कहा कि गया जी का तिलकुट के लिए भी अप्लाई किया गया है. देखवा लीजिएगा. स्पीकर की बात सुनते ही पूरा सदन ठहाके मारकर हंसने लगा.

आसन आवेदन नहीं निर्देश देता है: इसपर उद्योग मंत्री ने हंसते हुए कहा कि हुजूर उधर से अभी तक कोई आवेदन नहीं आया है. मैं इसको देखवा लेता हूं. हां गयाजी का तिलकुट फेमस तो है. वहीं इस दौरान अपने खास अंदाज में विजय चौधरी ने कहा कि आसन आवेदन नहीं निर्देश देता है. इसके बाद सम्राट चौधरी और सदन में मौजूद अन्य सदस्य अपनी हंसी रोक नहीं सके.

बड़हिया का रसगुल्ला और हंसी-मजाक: इस दौरान डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने लखीसराय के बड़हिया के रसगुल्ले को भी जीआई टैग देने को लेकर पैरवी कर डाली. विजय सिन्हा ने दिलीप जायसवाल की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अध्यक्ष महोदय ये (दिलीप जायसवाल) बड़हिया का रसगुल्ला और बाढ़ का खोबी लाई दोनों खाते हैं, लेकिन उसका प्रयास नहीं कर पाते हैं.

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बड़हिया का रसगुल्ला (ETV Bharat)

विजय सिन्हा हमको रसगुल्ला नहीं खिलाए हैं: इस पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने चुटकी लेते हुए कहा कि आज हम बोल ही देते हैं कि विजय बाबू ने आज तक वो रसगुल्ला मुझे नहीं खिलाया है. ये सुनते ही सभी एक साथ ठहाके लगाने लगे.

RJ ने मनेर के लड्डू का उठाया मुद्दा: सत्ता पक्ष के हंसी-मजाक के बीच आरजेडी ने मोर्चा संभाला और विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि मनेर का लड्डू भी फेमस है. क्या मंत्री जी उसको जीआई टैग दिलाने के लिए प्रयास करेंगे?

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मनेर का लड्डू (ETV Bharat)

विधानसभा में लगायी जाए प्रदर्शनी: विधायकों के उत्साह को देखते हुए डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने प्रस्ताव दिया कि विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान इन सभी विशेष मिठाइयों की एक प्रदर्शनी लगाई जाए. अध्यक्ष ने इस पर सहमति जताते हुए जल्द व्यवस्था करने का आश्वासन दिया भी दिया है.

उद्योग मंत्री ने अंत में स्पष्ट किया कि सरकार बिहार के सभी पारंपरिक व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की विशिष्ट मिठाइयों का विवरण साझा कर सके. दिलीप जायसवाल ने अंत में कहा कि जिनका-जिनका सामान मेरे पास आएगा मैं उसके चख लूंगा और फिर आगे बढ़ाऊंगा. कुल मिलाकर मिठाइयों की मिठास से विधानसभा का समां भी मीठा हो गया और सत्ता-पक्ष और विपक्ष काफी देर तक बिना चखे ही इन मिठाइयों का स्वाद महसूस करते रहे.

खोबी लाई: बिहार की एक पारंपरिक और अति लोकप्रिय मिठाई है. मुख्य रूप से बाढ़ और गया क्षेत्र में फेसम है. यह मिठाई अपने अनोखे स्वाद और लंबे समय तक खराब न होने के गुण के लिए जानी जाती है.

गयाजी का तिलकुट: बिहार की सबसे प्रतिष्ठित मिठाई है. अपने अद्भुत स्वाद और मुंह में घुल जाने के लिए देश ही नहीं दुनियाभर में फेमस है.

बड़हिया का रसगुल्ला: इसकी अपनी खास पहचान है. इसे बिहार का रसगुल्ला भी कहा जाता है. यह बंगाल के रसगुल्ले से स्वाद और बनावट में काफी अलग होता है. इसका मटमैला या लालिमा लिए रंग, साथ ही पकाने की प्रक्रिया अलग है, जो इसे दूसरे रसगुल्लों से अलग बनाती है.

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