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तेज हुई स्थाई राजधानी की मांग, देहरादून से गैरसैंण पहुंची पदयात्रा

विनोद रतूड़ी ने कहा दिल्ली में प्रवासी संगठन 2 अक्टूबर से स्थायी राजधानी गैरसैण की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगा.

GAIRSAIN FOOT MARCH
देहरादून से गैरसैंण पहुंची पदयात्रा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : September 1, 2026 at 6:44 PM IST

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गैरसैंण: स्थाई राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर पूर्व सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी के नेतृत्व में 15 अगस्त को देहरादून से शुरू हुई पैदल पदयात्रा आज गैरसैंण पहुंची. इस दौरान कांग्रेस, यूकेडी,उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के कार्यकर्ताओं व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पदयात्रियों का गैरसैंण के रामलीला मैदान पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया. गैरसैंण के रामलीला मैदान में एकत्रित होकर स्थाई राजधानी गैरसैंण की आवाज को बुलंद करते हुए स्थाई राजधानी गैरसैंण समिति के पदाधिकारियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की पुरजोर मांग की.

पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे विनोद प्रसाद रतूड़ी ने आम जनमानस, युवाओं और मातृशक्ति से अपील करते हुए कहा कि गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने के इस हक की लड़ाई में एकजुट होकर उनका साथ दें. उन्होंने कहा उत्तराखंड राज्य बने 26 साल हो गए हैं, लेकिन प्रदेश वाशियों को अब तक पता नहीं है कि हमारी राजधानी कहां है? उन्होंने कहा हमारे साथ जो राज्य झारखंड व छत्तीसगढ़ बने थे उनको अपनी स्थाई राजधानी मिल चुकी है, लेकिन उत्तराखंड एक ऐसा राज्य बन कर रह गया है जिसकी राजधनी का इन 26 सालों में भी पता नहीं लग पाया है. विनोद रतूड़ी ने कहा कि, उत्तराखंड को लेकर दोनों ही सरकारें संजीदा नहीं है.

देहरादून से गैरसैंण पहुंची पदयात्रा (ETV Bharat)

उन्होंने कहा उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसे 42 शहादतों के बाद अलग राज्य मिला. बाबा मोहन उत्तराखंडी की शहादत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 38 दिन की भूख हड़ताल करने के बाद भी उत्तराखंड को उसकी राजधानी नहीं मिल पाई. कौशिक समिति की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार ने जनमत करवाया था. 60 प्रतिशत लोगों ने गैरसैंण को राजधानी के लिए उपयुक्त बताया था. तत्कालीन केंद्र सरकार ने उस रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया, जिसका नतीजा आज उत्तराखण्ड को अपनी स्थायी राजधानी नही मिल पाई है.

उत्तराखंड क्रांति दल के कमल किशोर डिमरी ने कहा कि, हमें उत्तराखंड राज्य मांग कर नहीं मिला है बल्कि हमने ये राज्य छीनकर और 42 शहादातों के बाद लिया है. मातृशक्ति के त्याग और बलिदान से हमें राज्य मिला है. इन 26 वर्षों में नेताओं व अधिकारियों ने राज्य को बर्बाद कर दिया है. राजधानी गैरसैंण के सपने को लेकर राज्य आंदोलन लड़ा गया था, लेकिन इन 26 वर्षों में ये सरकारें स्थाई राजधानी को तय नहीं कर पाई है.

उत्तराखंड क्रांति दल युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने कहा उत्तराखंड क्रांति दल लगातार जनजागृति यात्रा के माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही है. इस बार जनता भाजपा-कांग्रेस को उखाड़ फेंकने का मन बना चुकी है. प्रदेश में यूकेडी की सरकार बनने जा रही है. उन्होंने कहा जनता इस बार भाजपा-कांग्रेस के नाम पर वोट नहीं देगी. किसी भी नेता के प्रलोभन मैं नहीं आने वाली हैं.

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