राजस्थान का देसी फ्रिज बना लोगों की पहली पसंद, भीषण गर्मी में बढ़ी मिट्टी के मटकों की मांग
डॉक्टरों के अनुसार मिट्टी के घड़े का पानी शरीर के पीएच संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है.

Published : May 29, 2026 at 4:20 PM IST
श्रीगंगानगर: भीषण गर्मी के बीच राजस्थान का देसी फ्रिज यानी मिट्टी का मटका एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है. श्रीगंगानगर क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे तापमान और लू के असर के चलते लोग राहत पाने के लिए पारंपरिक तरीकों की ओर लौट रहे हैं. गांवों से लेकर शहरों तक मिट्टी के मटकों की मांग तेजी से बढ़ी है. लोग फ्रिज के अत्यधिक ठंडे पानी की बजाय मटके के प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक पानी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. स्थानीय बाजारों में मटकों की बिक्री में भी इन दिनों भारी इजाफा देखने को मिल रहा है.
स्थानीय बाजारों में इन दिनों मिट्टी के मटकों की अस्थाई दुकानें सजी हुई हैं. छोटे-बड़े आकार के मटके 100 रुपए से लेकर 300 रुपए तक बिक रहे हैं. मटका विक्रेताओं के अनुसार पिछले कुछ दिनों में बिक्री में काफी बढ़ोतरी हुई है. मटका बेच रही विमला ने बताया कि पहले जहां एक दिन में 10 से 15 मटके बिकते थे, वहीं अब रोजाना 30 से 35 मटके बिक रहे हैं. उनका कहना है कि लोग अब फ्रिज के अत्यधिक ठंडे पानी की बजाय प्राकृतिक रूप से शीतल और स्वास्थ्यवर्धक मटके के पानी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
मटका खरीदने पहुंचे राजन ने बताया कि मिट्टी के घड़े का पानी लंबे समय तक ठंडा बना रहता है और इसका स्वाद भी अलग होता है. उन्होंने कहा कि फ्रिज का ज्यादा ठंडा पानी कई बार गले में परेशानी पैदा कर देता है, जबकि मटके का पानी शरीर को राहत देता है और स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है.

शरीर का पीएच बनाए रखता है घड़े का पानी: बढ़ती गर्मी और लू के खतरों को देखते हुए चिकित्सक डॉ. प्रवीण मक्कड़ ने भी मिट्टी के मटके के पानी को स्वास्थ्य के लिए लाभदायक बताया है. उन्होंने कहा कि मिट्टी के घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से अल्कलाइन यानी क्षारीय गुणों वाला होता है, जो शरीर के पीएच संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है. इसके अलावा यह पानी पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और शरीर को प्राकृतिक ठंडक पहुंचाता है. डॉ. मक्कड़ ने बताया कि फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी पीने से गले की कोशिकाएं अचानक सिकुड़ जाती हैं, जिससे सर्दी-खांसी और टॉन्सिल जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हालांकि उन्होंने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी है. उनका कहना है कि मटके की नियमित सफाई जरूरी है, ताकि पानी स्वच्छ बना रहे. साथ ही मटके को साफ और छायादार स्थान पर रखना चाहिए. भीषण गर्मी के इस दौर में मिट्टी का मटका न केवल लोगों को राहत पहुंचा रहा है, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति और देसी जीवनशैली को भी जीवंत बनाए हुए है.


