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अब होली में केमिकल नहीं, खिलेंगे पलाश और नीम के रंग: अलवर के हर्बल गुलाल की बढ़ती मांग, इस बार 5 क्विंटल होगा तैयार

अलवर के इस हर्बल गुलाल को बनाने की प्रक्रिया में किसी प्रकार के रसायन का उपयोग नहीं किया जाता.

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अलवर में तैयार हो रही हर्बल गुलाल (ETV Bharat Alwar)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 24, 2026 at 8:30 PM IST

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अलवर: होली पर रंगों में केमिकल की मिलावट से त्वचा खराब होने की चिंता अब लोगों को सताती है, लेकिन इस समस्या का हल वन विभाग ने ढूंढ लिया है. अलवर में पलाश के फूलों और नीम से तैयार होने वाला हर्बल गुलाल हर साल लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है. यही वजह है कि वन विभाग ने इस बार पांच क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा है.

राजस्थान में केवल दो जिले- अलवर और उदयपुर ही ऐसे हैं, जहां वन विभाग हर्बल गुलाल तैयार करता है. अलवर में यह काम 2022 में शुरू हुआ, जब वन कर्मियों को उदयपुर में विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया. अब हर साल होली से पहले यहां पलाश के फूलों से प्राकृतिक गुलाल बनाया जाता है, जो पूरी तरह रसायन मुक्त और त्वचा के लिए सुरक्षित होता है.

वनपाल मदनलाल गोठवाल (ETV Bharat Alwar)

पढ़ें: पलाश के फूलों से आदिवासी महिलाएं बना रहीं हर्बल गुलाल, देशभर में बढ़ रही मांग

ऐसे तैयार होता है हर्बल गुलाल: अलवर वन मंडल के डहरा शाहपुर के वनपाल मदनलाल गोठवाल बताते हैं कि हर्बल गुलाल बनाने में मुख्य रूप से पलाश (टेसू) के गहरे नारंगी फूलों का उपयोग किया जाता है. इन फूलों को एक साल पहले तोड़कर सुखाया जाता है. सूखे फूलों को पानी में उबालकर और उसमें अरारोट मिलाकर गुलाल तैयार किया जाता है. हरे रंग का गुलाल नीम की पत्तियों से बनाया जाता है. खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी मशीन का उपयोग नहीं होता, बल्कि महिलाएं पारंपरिक तरीके से यह कार्य करती हैं.

हर साल बढ़ रहा उत्पादन: गोठवाल ने बताया कि 2022 में जब अलवर में हर्बल गुलाल बनाने की शुरुआत हुई, तब सिर्फ एक क्विंटल तैयार किया गया था. लेकिन लोगों के बीच बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए हर साल उत्पादन बढ़ाया गया. अब पांच क्विंटल तैयार किया जा रहा है, जिसे 27 फरवरी से वन विभाग की स्टॉल पर आमजन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. यह गुलाल त्वचा, आंखों और बालों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है, क्योंकि इसमें किसी भी तरह के केमिकल का उपयोग नहीं होता.