दिल्ली के शिक्षक संजय स्वामी बने पर्यावरण के पहरेदार, पानी बचाने के लिए कर रहे काम, स्पीकर ने भी की तारीफ
संजय स्वामी का एक शिक्षक से पर्यावरण योद्धा बनने का सफर दिलचस्प है उनके जल मिशन की तारीफ विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने भी की.

Published : May 2, 2026 at 6:00 PM IST
नई दिल्ली: गर्मी बढ़ रही है, ग्लोबल वार्मिंग से दुनिया प्रभावित है. पर्यावरण को बचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास हो रहे हैं, चाहे देश दुनिया के स्तर की बात हो या आम आदमी की. ऐसे ही एक शख्स है जिन्होंने पर्यावरण को बचाने का बीड़ा उठा लिया है. शिक्षक की नौकरी से पानी बचाने का संदेश देने के लिए ये व्यक्ति अलग-अलग स्तर पर लोगों को जागरुक कर रहे हैं. इनका नाम है संजय स्वामी.
दिल्ली की गलियों से निकलकर देशभर में जल और पर्यावरण को बचाने का संदेश देकर इन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली है. संजय स्वामी की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि एक जागरूक नागरिक की यात्रा है जो खुद बदला और समाज को बदलने की ठान ली.
कौन है संजय स्वामी
संजय स्वामी दिल्ली रोहतास नगर विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं. मूलत एक शिक्षक रहे हैं. शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हुए वे शिक्षा संस्कृति उत्थान्यास जैसे संगठन से जुड़े और यहीं से उनके भीतर पर्यावरण संरक्षण की चेतना जागी. आज वे पानी बचाने, प्लास्टिक के उपयोग को रोकने और लोगों को जागरूक करने के लिए पूरे देश में सक्रिय हैं.
कहां से मिली प्रेरणा
संजय स्वामी बताते हैं कि एक समय था जब वे भी आम लोगों की तरह प्लास्टिक के गिलास, थर्मोकोल के बर्तन और पॉलीथीन का उपयोग करते थे. लेकिन धीरे-धीरे समझ बढ़ी विद्वानों के साथ संवाद हुआ और उन्होंने अपनी जीवनशैली बदल दी आज वे जहां भी जाते हैं अपना बर्तन चम्मच,प्लेट,गिलास,कटोरी साथ रखते हैं और NO USE प्लास्टिक का संदेश देते हैं.
बर्तन बैंक बनाया ताकि कम इस्तेमाल हो प्लास्टिक
संजय स्वामी की सोच केवल विचारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने इसे जमीन पर भी उतारा. उन्होंने बर्तन बैंक की शुरुआत की, जिसमें स्टील के बर्तन लोगों को मुफ्त दिए जाते हैं ताकि शादी, भंडारे या आयोजनों में प्लास्टिक कचरा न फैले.

प्रयागराज में कुंभ के दौरान मिसाल कायम की
प्रयागराज के महाकुंभ में संजय स्वामी के प्रयास ने मिसाल कायम की, जहां हजारों लोगों को भोजन कराने के लिए उन्होंने अपने स्टील के बर्तन, बर्तन बैंक से दिए....जिसकी बदौलत प्लास्टिक का कचरा बेहद कम रहा.
पानी को बचाने के लिए भी लोगों को जागरुक कर रहे संजय स्वामी
संजय स्वामी का मानना है कि पर्यावरण केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है वे बताते हैं कि बड़ी बड़ी संगोष्ठियों में भी लोग प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, जो एक विरोधाभास है उनका जोर छोटे-छोटे प्रयासों पर है जैसे जरूरत के अनुसार पानी लेना, बचे हुए पानी का पुन उपयोग करना, और हर बूंद की कीमत समझना. संजय स्वामी अपने अनुभवों में वे एक ऐसी घटना का जिक्र करते हैं जब ट्रेन में पानी की कमी के कारण एक बच्चे की जान चली गई खुद उनके बेटे को भी एक बार यात्रा के दौरान पानी न मिलने से परेशानी हुई इन घटनाओं ने उन्हें पानी के महत्व को और गहराई से समझाया. साल 2025 में संजय स्वामी की लिखी किताब पानी की कहानी का विधानसभा स्पीकर ने विमोचन किया था.

लोगों से अपील-पानी की एक-एक बूंद बचाएं
संजय स्वामी ने कहा कि वे देश के अलग-अलग राज्यों केरल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में जाकर जल संकट की वास्तविक स्थिति देख चुके हैं, कहीं जमीन फट रही है, तो कहीं पानी सैकड़ों फीट नीचे चला गया है यही कारण है कि वे लोगों से अपील करते हैं कि मुफ्त मिलने वाले पानी को भी जिम्मेदारी से उपयोग करें.
देश की अनेक झील और नादिओ की दुर्दशा दिखाते हुए डॉ. अनिल गुप्ता, पर्यावरण विशेषज्ञ एवं सीपीसीबी व डीपीसीसी के सदस्य, ने कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है. हमें न केवल पानी बचाना है, बल्कि पृथ्वी को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से भी मुक्त करना है.
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