दिल्ली पुलिस ने बड़ी लूट केस को सुलझाया, दुर्गम पहाड़ी और घने जंगलों से ढूंढ निकाले दो आरोपी
उत्तर जिले के तिमारपुर थाना पुलिस ने आठ दिन में 45 लाख की लूट के मामले के दो आरोपियों को तकनीकी सर्विलांस के जरिए पकड़ा.

Published : February 27, 2026 at 7:46 PM IST
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के उत्तर जिले के तिमारपुर थाना क्षेत्र की पुलिस आठ दिन के भीतर ही एक बड़े मामले का खुलासा करने में सफल रही. करीब 15 लाख रुपये नकद और करीब 30 लाख रुपये कीमत के 22 मोबाइल फोन लूटने की सनसनीखेज वारदात में पुलिस की संयुक्त टीम ने तीन महिला आरोपियों को मौके से ही दबोच लिया था, जबकि जम्मू-कश्मीर और पंजाब में 1500 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. मामले का मास्टरमाइंड अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है.
पुलिस के अनुसार 17 फरवरी, 2026 को जम्मू निवासी रमेश लाल ने तिमारपुर थाने में शिकायत दी कि वह जम्मू स्थित 'गैजेट गैलेक्सी' मोबाइल शॉप में काम करता है. 16-17 फरवरी की दरमियानी रात वह निजी बस से जम्मू से दिल्ली व्यापारिक लेनदेन के लिए रवाना हुआ था. उसके पास एक बैग में 15 लाख रुपये नकद और 22 पैक्ड आईफोन (करीब 30 लाख रुपये के) थे. 17 फरवरी सुबह करीब 7:15 बजे जब वह मजनू का टीला पर बस से उतरा और ऑटो में बैठने लगा, तभी बस से उतरे तीन पुरुष और तीन महिलाओं ने उसे घेर लिया. महिलाओं ने छेड़छाड़ के झूठे आरोप लगाते हुए हंगामा किया और इसी दौरान पुरुष आरोपित नकदी व मोबाइल से भरा बैग लेकर फरार हो गए.
छह में से तीन मौके से गिरफ्तार: शिकायतकर्ता और स्थानीय लोगों की मदद से तीनों महिलाओं को मौके पर पकड़ लिया गया. उनके कब्जे से शिकायतकर्ता का छोटा बैग और एक फोन मोबाइल बरामद हुआ. घटना सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई. इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की. पूछताछ में खुलासा हुआ कि वारदात में कुल छह लोग शामिल थे और परवेज नामक व्यक्ति इसका मास्टरमाइंड है. सभी आरोपी जम्मू के रहने वाले हैं. इसके बाद एसीपी बुराड़ी के मार्गदर्शन में तिमारपुर थाना और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम गठित कर जम्मू और पंजाब में कई स्थानों पर छापेमारी की गई.
तकनीकी सर्विलांस के जरिए हुई अन्य गिरफ्तारी: तकनीकी सर्विलांस और सीडीआर विश्लेषण के आधार पर 20 फरवरी को मोहम्मद फारूक उर्फ इमरान उर्फ मदु को चंडीगढ़ में उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह अग्रिम जमानत के लिए वकील से मिलने जा रहा था. उसकी निशानदेही पर अन्य आरोपियों की तलाश तेज की गई. दूसरी टीम ने पहाड़ी और घने जंगलों वाले उधमपुर क्षेत्र में लगातार पांच दिन तक सर्च ऑपरेशन चलाया. कच्चे रास्तों और कई जगह सड़क न होने के कारण टीम को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.आखिरकार आठ दिन की तलाश के बाद तारिक हुसैन उर्फ फरीदो को उसके गांव फरोल के जंगल क्षेत्र से दबोच लिया गया.
13 लाख रुपये और 21 फोन बरामद: तारिक हुसैन उर्फ फरीदो की तलाशी में उसके पास से दो लाख रुपये नकद मिले. बाद में उसकी निशानदेही पर घर में पशुओं के बाड़े के पास जमीन में दबाकर रखे गए 13 लाख रुपये और 21 फोन बरामद कर लिए गए. इस तरह लूटी गई पूरी 15 लाख की नकदी और मोबाइल फोन बरामद कर लिए गए. जांच में सामने आया कि मास्टरमाइंड परवेज ने शिकायतकर्ता के दिल्ली आने की सूचना पहले से जुटा रखी थी. योजना के तहत सभी छह आरोपी जम्मू से एक ही बस में सवार हुए. दिल्ली पहुंचकर महिलाओं को झूठे आरोप लगाकर हंगामा करने और पुरुषों को बैग लेकर भागने की जिम्मेदारी दी गई थी. वारदात के बाद सभी को जम्मू लौटना था.
लूट की रकम और मोबाइल बरामद: उत्तर जिले के डीसीपी राजा बंथिया ने बताया कि संयुक्त टीम ने कठिन परिस्थितियों में सराहनीय कार्य करते हुए पूरी लूट की रकम और मोबाइल बरामद कर लिए हैं. फरार मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे भी पकड़ लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि संगठित तरीके से लूट की इस वारदात का खुलासा पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच के कारण संभव हो सका.
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