दिल्ली पुलिस ने इंटरनेशनल साइबर ठगी गिरोह का किया पर्दाफाश, पाकिस्तान-चीन कनेक्शन उजागर
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी का खुलासा किया है.

Published : January 10, 2026 at 7:12 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो आतंक और गिरफ्तारी का डर दिखाकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था. पुलिस के अनुसार, यह गिरोह विदेश से संचालित हो रहा था. जांच में इस गिरोह के तार चीन, पाकिस्तान, ताइवान और नेपाल से जुड़े पाए गए हैं.
डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर 2025 से देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों को फोन कर खुद को एटीएस अधिकारी बताने वाले ठग सक्रिय थे. कॉल करने वाले लोगों को पहलगाम और दिल्ली ब्लास्ट जैसे मामलों से जोड़कर फर्जी तरीके से आतंकवाद के आरोप लगाते थे. फिर तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर कराने का दबाव बनाते थे. इस मनोवैज्ञानिक दबाव के चलते हजारों लोग ठगी का शिकार हुए.
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी सिमबॉक्स तकनीक का इस्तेमाल कर विदेश से आने वाली कॉल्स को भारतीय नंबरों की तरह दिखाते थे. ये कॉल्स कम फ्रीक्वेंसी नेटवर्क के जरिए रूट की जाती थीं, जिससे लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था. तकनीकी जांच के बाद दिल्ली के गोयला डेयरी, कुतुब विहार, दीनपुर और शाहबाद डेयरी इलाकों में सिमबॉक्स सेटअप का पता चला.
पाकिस्तान-चीन और नेपाल कनेक्शन उजागर
डीसीपी विनीत के मुताबिक, इस मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. दिल्ली और मोहाली से स्थानीय ऑपरेटरों को पकड़ा गया. जबकि, 21 दिसंबर 2025 को ताइवान के नागरिक आई-त्सुंग चेन को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, जो इस नेटवर्क का तकनीकी मास्टरमाइंड था. पूछताछ में खुलासा हुआ कि सिमबॉक्स डिवाइस चीन और ताइवान से लाई जाती थी. जबकि, फंडिंग और तकनीकी निर्देश पाकिस्तान से मिल रहे थे. नेपाल को कमांड और कंट्रोल सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था.
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका
पुलिस जांच में अब तक 7 आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है, जिनकी भूमिका अलग-अलग स्तर पर सामने आई है. पहला आरोपी शशि प्रसाद (53), निवासी कुतुब विहार, गोयला डेयरी, दिल्ली है, जो दिल्ली में सिमबॉक्स सेटअप का भौतिक कस्टोडियन था. दूसरा आरोपी परविंदर सिंह (38), निवासी दीनपुर, दिल्ली है, जो सिमबॉक्स नेटवर्क की मेंटेनेंस और संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहा था. तीसरा आरोपी आई-त्सुंग चेन (30), ताइवान का नागरिक है, जिसे 21 दिसंबर 2025 को दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया कि वही इस पूरे नेटवर्क का तकनीकी मास्टरमाइंड था और अवैध रूप से सिमबॉक्स डिवाइस भारत में मंगाकर इंस्टॉल करवा रहा था.
वहीं, चौथा आरोपी सरबदीप सिंह (33), बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स, और पांचवीं आरोपी जसप्रीत कौर (28), डिप्लोमा धारक, दोनों मोहाली से गिरफ्तार किए गए. दोनों पहले कंबोडिया स्थित स्कैम सेंटर्स में काम कर चुके थे. छठा आरोपी दिनेश के, डिप्लोमा होटल मैनेजमेंट, कोयंबटूर से गिरफ्तार किया गया, जो क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ठगी की रकम को ठिकाने लगाने में शामिल था. जबकि, सातवां आरोपी अब्दुस सलाम (33), डिप्लोमा सिविल इंजीनियरिंग, निवासी मलाड मुंबई है, जिसके यहां से सिमबॉक्स सेटअप बरामद किया गया.
100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी
डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े सिम और आईएमईआई नंबरों का इस्तेमाल कर देशभर में हजारों साइबर ठगी की गई, जिसमें करीब 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का अनुमान है. डीसीपी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है. इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग, क्रिप्टो लेनदेन और विदेशी कनेक्शन की परतें खंगाली जा रही है.
जांच में बड़े पैमाने पर सामग्री बरामद
डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि पुलिस की जांच में बड़े पैमाने पर सामग्री बरामद की गई है. कार्रवाई के दौरान 22 सिम बॉक्स, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, सीसीटीवी कैमरे और राउटर जब्त किए गए हैं. इसके अलावा पासपोर्ट और कंबोडिया से जुड़े रोजगार कार्ड भी मिले हैं. पुलिस ने चीन मोबाइल की लगभग 120 विदेशी सिम सहित बड़ी संख्या में अन्य सिम कार्ड भी बरामद किए हैं.
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