दिल्ली-नागपुर इंडस्ट्रियल एरिया 1500 एकड़ में होगा डेवलप, किसानों की जमीनों का नहीं होगा अधिग्रहण
सागर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-44 के किनारे डेवलप होगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर. आवंटित जमीन में किसी भी व्यक्ति की निजी जमीन का नहीं होगा अधिग्रहण.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 21, 2026 at 7:51 PM IST
सागर: बुंदेलखंड पर लगे पिछड़ेपन का दाग धीरे-धीरे हटने जा रहा है. बुंदेलखंड के इकलौते संभागीय मुख्यालय सागर में दिल्ली-नागपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत 1500 एकड़ में इंडस्ट्रियल एरिया डेवलप किया जा रहा है. मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में घोषित अपने बजट में जमीन आवंटन का ऐलान कर दिया है.
खास बात ये है कि इंडस्ट्रियल एरिया नेशनल हाईवे-44 के किनारे डेवलप हो रहा है. वहीं इस इंडस्ट्रियल एरिया के लिए आवंटित जमीन में किसी भी व्यक्ति की निजी जमीन का अधिग्रहण नहीं होगा. इस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के कारण बुंदेलखंड में नए-नए उद्योग आएंगे और रोजगार की भरमार होगी. इसके साथ ही यहां आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ेंगी.
मध्य प्रदेश सरकार के बजट में जमीन आवंटन का ऐलान
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा घोषित किए गए बजट में सागर से गुजरने वाले राष्ट्रीय स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के नार्थ साउथ कॉरिडोर के सागर से लगे मसवासी ग्रंट गांव में 1500 एकड़ जमीन का आवंटन कर दिया गया है. यह सागर जिले की नरयावली विधानसभा के अंतर्गत आता है.
नरयावली विधानसभा के विधायक प्रदीप लारिया बताते हैं कि "बिना उद्योग के यहां पर रोजगार की संभावना नहीं बनती. मुझे ये बताते हुए प्रसन्नता है कि दिल्ली-नागपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलप होने जा रहा है. लगभग 600 हेक्टेयर यानि 1500 एकड़ जमीन में ये कॉरिडोर बनेगा. यहां के लोगों के लिए 23 हजार से ज्यादा रोजगार के अवसर मिलेंगे."
देश में कुल 11 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
भारत में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को विशेष औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. इनकी संख्या पूरे देश में 11 है.ये कॉरिडोर देश के अलग-अलग हिस्सों की खासियत और संसाधनों को अधिकतम करने के लिए मार्ग के रूप में कार्य करते हैं. विनिर्माण बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने के प्रयास से भारत का राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम बुनियादी ढांचे के साथ-साथ इंडस्ट्रियां डेवलप करने पर काम करेगा.

इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से होने वाले लाभ
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से होने वाले लाभ पर गौर करें तो सुगम परिवहन के जरिए माल ढुलाई में सुविधा के साथ लॉजिस्टिक्स के जरिए पूंजी और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा. कार्पोरेट खर्च को कम करने में मदद मिलेगी साथ ही कौशल विकास के साथ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सामाजिक, आर्थिक सुधार को बढ़ावा मिलेगा.
दिल्ली-नागपुर औद्योगिक गलियारा
दिल्ली-नागपुर औद्योगिक गलियारों को विकसित करने के लिए नेशनल हाईवे 44 के उत्तर दक्षिण गलियारे को मुख्य आधार बनाया गया है. जो भविष्य में उत्तर दक्षिण डीएफसी (उत्तर-दक्षिण समर्पित माल गलियारा) के पास स्थित होगा. उत्तर दक्षिण डीएफसी की बात करें, तो ये नई दिल्ली और चेन्नई को जोड़ने वाली प्रस्तावित माल ढुलाई विशेष रेलवे लाइन है. जिसकी अनुमानित लंबाई 2343 किमी है और इसमें 43 स्टेशन प्रस्तावित है.

उत्तर-दक्षिण डीएफसी गलियारे के कारण इस मार्ग पर मौजूदा राजमार्ग और समर्पित माल ढुलाई गलियारे का उपयोग किया जाएगा. इसके अलावा डीएनआईसी का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना और रोजगार विकसित करना है. इस कॉरिडोर में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्य शामिल हैं. इस कारीडोर का उद्देश्य विनिर्माण, फूड प्रोसेसिंग, सेवा और निर्यात इकाइयों में निवेश प्रोत्साहन को बढ़ावा देना है.
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'नहीं होगा एक इंच जमीन का अधिग्रहण'
विधायक प्रदीप लारिया बताते हैं कि "यहां ये उल्लेख करना जरूरी है कि पहले दिल्ली-नागपुर कॉरिडोर में 4 गांव के किसानों की जमीन आ रही थी. ये सुनिश्चित हो गया था कि उनकी जमीन का अधिग्रहण होगा. किसानों की जमीन को लेकर सरकार ने विशेष ध्यान रखा है. इस विषय को प्राथमिकता लेकर काम किया और ये तय किया कि इंडस्ट्री भी आना चाहिए और किसानों की जमीन भी बचना चाहिए. इस पूरे प्रोजेक्ट में किसानों की एक इंच जमीन का भी अधिग्रहण नहीं होगा. जब इंडस्ट्रियां पूरी तरह से अस्तित्व में आएगी, तो इस क्षेत्र का नक्शा बदल जाएगा."

