फिर चर्चा में दिल्ली मेडिकल काउंसिल, जानिए चुनाव प्रक्रिया और इसके मुख्य कार्यों के बारे में...
25 डॉक्टर होते हैं डीएमसी के सदस्य, इनमें से बनते हैं अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और रजिस्ट्रार

Published : December 19, 2025 at 8:18 PM IST
नई दिल्लीः दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) चुनाव का बेसब्री से दावेदार इंतजार कर रहे हैं. चुनाव की प्रक्रिया एक बार शुरू होने के बाद सरकार द्वारा रोकी जा चुकी है. हालांकि, अब एक बार फिर से चुनाव के लिए नए डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर वोटर लिस्ट तैयार करने का काम चल रहा है. डीएमसी के चुनाव में यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि दिल्ली मेडिकल काउंसिल में कुल 25 मेंबर होते हैं.
डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि इनमें से आठ सदस्यों का चुनाव वोटिंग से होता है. इसके लिए एमबीबीएस पूरी कर चुके और डीएमसी में रजिस्टर्ड डॉक्टर वोट डालने के लिए योग्य होते हैं. ये आठ सदस्यों को चुनकर डीएमसी में भेजते हैं. इसके अलावा, डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज (DGHS) दिल्ली सरकार भी डीएमसी में पदेन सदस्य होते हैं. पांच सदस्य दिल्ली सरकार नॉमिनेट करती है. जबकि, 10 सदस्य दिल्ली के 10 मेडिकल कॉलेजों से नॉमिनेट होते हैं और एक सदस्य दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन से नॉमिनेट करके भेजा जाता है. इस तरह से कुल संख्या 25 हो जाती है. फिर ये 25 सदस्य मतदान करके अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और रजिस्ट्रार को चुनते हैं.
डॉ. अरुण कुमार ने आगे बताया कि इसके बाद डीएमसी अपनी कुछ कमेटियों का भी गठन करती है. उन कमेटियों में भी इन 25 सदस्यों को जिम्मेदारी दी जाती है. इस तरह से पांच साल डीएमसी का कार्यकाल होता है. इसके बाद फिर से चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाती है.
डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि डीएमसी जो चुनाव लंबित है वो समयानुसार इस साल होने मार्च में होना चाहिए था. लेकिन, पुरानी डीएमसी काउंसिल पर लगे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों और उनकी जांच के चलते यह चुनाव लंबित चल रहा है. अब सरकार ने काउंसिल के रजिस्ट्रार रहे डॉ. गिरीश त्यागी को अवैध तरीके से वेतन लेने का जिम्मेदार माना है. साथ ही डीएमसी का स्पेशल ऑडिट कराकर फंड की रिकवरी करने का आदेश जारी किया है. सरकार का यह प्लान है कि डॉ गिरीश त्यागी के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद ही डीएमसी चुनाव कराये जाएंगे.
डीएमसी का काम
डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि डीएमसी का काम दिल्ली में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन करना. डॉक्टरों के खिलाफ इलाज के मामले में लापरवाही बरतने की शिकायतों के मामले को देखना और सरकार को हेल्थ पॉलिसीज बनाने और उनको लागू करने में मदद करना है. दिल्ली में बड़े और महत्वपूर्ण अस्पताल स्थिति हैं. बड़ी संख्या में डॉक्टर यहां काम करते हैं. साथ ही अधिकतर डॉक्टर दिल्ली के अस्पतालों में काम करने के इच्छुक होते हैं. इसलिए डीएमसी की भूमिका ज्यादा अहम हो जाती है. दिल्ली में हर साल डॉक्टरों के बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन भी होते हैं.
2020 के डीएमसी चुनाव में थे 70 हजार से अधिक वोटर
डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि पिछले डीएमसी के चुनाव में 70 हजार से ज्यादा डॉक्टर मतदाता थे. इस बार यह संख्या बढ़कर 75 हजार से ज्यादा हो सकती है. अंतिम मतदाता सूची चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के समय ही जारी की जाएगी. उम्मीद है कि अगले एक से दो महीने में सरकार डीएमसी के चुनाव संपन्न कराएगी. उन्होंने बताया कि कई पुराने डीएमसी काउंसिल मेंबर और कई नए डॉक्टर भी चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हुए हैं. सभी को बड़ी बेसब्री से चुनाव कार्यक्रम घोषित होने का इंतजार है.
इन मेडिकल कॉलेजों से नॉमिनेट होते हैं 10 सदस्य
- ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज
- मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज
- वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज
- विश्वविद्यालय चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय
- लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज
- जामिया हमदर्द मेडिकल कॉलेज
- बाबा साहब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज
- अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज
- नॉर्थ दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन मेडिकल कॉलेज
- ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल
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