Reality Check: दिल्ली हादसे के बाद भरतपुर के होटल्स की पड़ताल, जानिए कैसी है सुरक्षा और आग से बचने के इंतजाम
भरतपुर के होटल्स, गेस्ट हाउस में फायर सेफ्टी, गैस व्यवस्था और आपदा से निपटने की क्षमता की पड़ताल की गई.

Published : June 3, 2026 at 8:03 PM IST
भरतपुर: दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में आग लगने से हुई 21 लोगों की मौत के बाद ईटीवी भारत ने भरतपुर में भी होटलों और गेस्ट हाउसों की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं. ऐसे में शहर के होटलों, गेस्ट हाउसों और प्रशासन की तैयारियों का रियलिटी चेक किया गया, जिसमें फायर सेफ्टी, गैस व्यवस्था और आपदा से निपटने की क्षमता की पड़ताल की गई.
रियलिटी चेक के दौरान केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के पास स्थित आयोरा गेस्ट हाउस का निरीक्षण किया गया. गेस्ट हाउस संचालक देवेंद्र ने बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों से उनके यहां एलपीजी सिलेंडर की बजाय पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) का उपयोग किया जा रहा है. किचन में सीधे पाइपलाइन के माध्यम से गैस सप्लाई होती है, जिससे सिलेंडर रिसाव और विस्फोट जैसे जोखिम काफी हद तक कम हो जाते हैं.
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पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था: निरीक्षण के दौरान किचन में पीएनजी पाइपलाइन लगी हुई मिली और गैस सिलेंडर का उपयोग नहीं पाया गया. संचालक ने बताया कि परिसर में फायर एक्सटिंग्विशर लगाए गए हैं तथा भवन में पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था भी की गई है. उनका कहना है कि दिल्ली में पहले हुए एक बड़े हादसे के बाद सुरक्षा मानकों को लेकर सख्ती बढ़ी थी, जिसके बाद आसपास के कई गेस्ट हाउसों ने भी सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए. गेस्ट हाउस संचालक के अनुसार शहर के अधिकांश बड़े होटल और गेस्ट हाउस अब पीएनजी नेटवर्क से जुड़ चुके हैं.

पाइपलाइन से रसोई तक गैस सप्लाई: इसी तरह सनबर्ड होटल के संचालक लक्ष्मण सिंह ने बताया कि उनके यहां लंबे समय से पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध है. साथ ही आपात स्थिति के लिए एलपीजी सिलेंडरों का गैस बैंक खुले क्षेत्र में बनाया गया है, जहां से पाइपलाइन के माध्यम से रसोई तक गैस सप्लाई की जाती है. होटल में फायर सेफ्टी उपकरण, अग्निशमन सिलेंडर और उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था भी की गई है. रियलिटी चेक के दौरान सामने आया कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र और प्रमुख पर्यटन इलाकों के अधिकांश बड़े होटल सुरक्षा मानकों को लेकर अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई दिए. हालांकि, शहर के भीतरी क्षेत्रों में संचालित छोटे होटल, लॉज और गेस्ट हाउसों में सुरक्षा मानकों की स्थिति की नियमित निगरानी और सख्त जांच अभी भी आवश्यक है.

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सुरक्षा मानकों की जांच: नगर निगम आयुक्त श्रवण विश्नोई ने बताया कि शहर के होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग संस्थान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को फायर एनओसी जारी करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है. निरीक्षण के दौरान यह देखा जाता है कि संस्थान में पर्याप्त पानी का टैंक है या नहीं, फायर एक्सटिंग्विशर लगे हैं या नहीं, आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके तक पहुंच सकती है या नहीं तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं या नहीं.
उन्होंने बताया कि नगर निगम के पास आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए तीन शिफ्टों में काम करने वाली फायर टीम मौजूद है. निगम के पास चार बड़ी फायर ब्रिगेड गाड़ियां हैं. इसके अलावा सिविल डिफेंस और एचपीसीएल के संसाधन भी जरूरत पड़ने पर उपलब्ध रहते हैं. आसपास की नगर पालिकाओं की फायर सेवाओं का भी सहयोग लिया जा सकता है. उनका दावा है कि जिले में आग संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं.

आयुक्त ने स्पष्ट किया कि बिना फायर एनओसी के होटल या अन्य व्यावसायिक संस्थान संचालित नहीं किए जा सकते. नगर निगम द्वारा पूर्व में सर्वे और नोटिस जारी किए जाने के बाद अब अधिकांश संचालक फायर एनओसी के लिए आवेदन कर रहे हैं. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सीज करने की कार्रवाई का भी प्रावधान है.
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