दिल्ली के सरकारी स्कूलों की चमक फीकी? सांसद स्वाति मालीवाल ने खड़े किए रखरखाव और सुरक्षा पर बड़े सवाल
सांसद स्वाति मालीवाल ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों की बदहाली का वीडियो शेयर कर सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल.

Published : August 31, 2026 at 6:39 PM IST
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कार्यकाल के दौरान बनाए गए एक सरकारी स्कूल का कथित वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया है. राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल द्वारा बीते दिनों इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद से यह मामला सुर्खियों में है, जिसने दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल के बहुप्रचारित 'शिक्षा मॉडल' की चमक पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
दिल्ली में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव (फरवरी 2025) से पहले स्वाति मालीवाल द्वारा शूट किए वीडियो में स्कूल की दीवारों पर बड़ी-बड़ी सीलन, साफ नजर आती दरारें और छत की जर्जर हालत को दिखाया गया है. इस वीडियो ने तब भी तूल पकड़ा था, अब जब ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान केंद्र में आ गया है. इस पूरी स्थिति ने एक बहुत बड़ा और बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल भव्य इमारतों का निर्माण कर देना ही पर्याप्त है, या असली परीक्षा यह सुनिश्चित करने की है कि वर्षों बाद भी वे इमारतें सुरक्षित और ठीक हालत में बनी रहें?
दिल्ली शिक्षा क्रांति EXPOSED‼️ Part 3
— Swati Maliwal (@SwatiJaiHind) August 26, 2026
दिल्ली के जिस स्कूल का उद्घाटन केजरीवाल जी ने 2020 में किया था, उस स्कूल में कुछ ही महीनों में Leakages, Major Cracks आने लगे और Tiles गिरने लगी…
इस बात की शिकायत प्रिंसिपल और टीचरों ने लगातार उस समय दिल्ली सरकार को भेजी। पहली चिट्ठी… pic.twitter.com/K3DY3hdl66
'स्कूल ठीक करो' अभियान के बीच गरमाई सियासत
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब शिक्षा व्यवस्था के सुधारों को लेकर विभिन्न मंचों पर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत सरकारी और नागरिक सुविधाओं से जुड़े स्कूलों के निरीक्षण पर जोर दिया जा रहा है. इसी कड़ी में राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल द्वारा साझा किए गए वीडियो ने हलचल मचा दी है.
वीडियो साझा करते हुए स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया गया कि स्कूल की पूरी इमारत में सीलन और दरारें फैली हुई हैं. ऐसी स्थिति में यह विद्यालय वहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों और पढ़ाने वाले शिक्षकों दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. जर्जर होती छत और कमजोर ढांचे को लेकर अभिभावकों में भी गहरी चिंता का माहौल है. इसी बीच जब स्कूल को खाली कराया जाता है तो बच्चों को दूर के स्कूल में जाने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
निर्माण बनाम रखरखाव: बुनियादी सवाल
दिल्ली के पिछले शिक्षा सुधारों के समर्थकों का हमेशा से यह तर्क रहा है कि सरकार ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे, आधुनिक कक्षाओं और शिक्षण स्तर को बदलने के लिए भारी-भरकम निवेश किया है. आप सरकार में रहे शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया आज भी इसका जिक्र करते नहीं थकते. दिल्ली के बाद पंजाब के स्कूलों का वह आए दिन हवाला देते आ रहे हैं. उनका मानना है कि नए कमरों और शानदार इमारतों के बनने से सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदली है और गरीब बच्चों को बेहतर माहौल मिला है.
दूसरी ओर, आलोचकों और विपक्षी दलों का कहना है कि भव्य निर्माण या उद्घाटन के समय मिलने वाली सुर्खियां तब बेमानी हो जाती हैं, जब समय के साथ रख-रखाव और मरम्मत की उपेक्षा होने लगती है. भाजपा शासित दिल्ली सरकार के प्रवक्ता हरीश खुराना का तर्क है कि यदि कुछ ही वर्षों में स्कूल भवनों में सीलन और दरारें उभरने लगें, तो यह करोड़ों रुपये के निवेश की गुणवत्ता और सरकारी तंत्र की सुस्ती दोनों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है. उनका कहना है कि सामने आए तथ्यों को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले एक निष्पक्ष और स्वतंत्र तकनीकी मूल्यांकन कराया जाना बेहद आवश्यक है. स्कूलों की दीवारों की मजबूती, छतों की स्थिति और छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए.
हरीश खुराना यह भी कहना है कि स्कूल की इमारतें केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं होतीं, बल्कि वे भविष्य के राष्ट्र-निर्माताओं का मंदिर होती हैं. एक स्कूल का निर्माण करना एक बार की बड़ी खबर या उपलब्धि बन सकता है, लेकिन दशकों तक उन इमारतों को सुरक्षित बनाए रखना और उनकी समय पर मरम्मत करना ही किसी भी सरकार की असली प्रशासनिक क्षमता की असल परीक्षा होती है.
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