दिल्ली में बढ़ेगा मेट्रो का दायरा, EV ट्रांसपोर्ट पर दिया जोर; सीएम रेखा गुप्ता ने बजट में खोला खजाना
प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली को 'एमिशन-फ्री' बनाने के लिए सरकार ने बसों के बेड़े में क्रांतिकारी बदलाव का खाका खींचा है.

Published : March 25, 2026 at 7:35 PM IST
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर अब न सिर्फ वाहनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए 'ग्रीन मोबिलिटी' के एक नए युग की शुरुआत होगी. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को विधानसभा में दिल्ली सरकार का वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया, जिसमें परिवहन क्षेत्र के लिए 8,374 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट रखा गया. इस बजट का मूल मंत्र दिल्ली को ग्रीन, सस्टेनेबल व जाम-मुक्त बनाना है. सरकार ने परिवहन के हर पहलू चाहे वह बसें हों, मेट्रो हो या आधुनिक नमो भारत ट्रेन सभी के लिए खजाना खोला है.
प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली को 'एमिशन-फ्री' बनाने के लिए सरकार ने बसों के बेड़े में क्रांतिकारी बदलाव का खाका खींचा है. PM E-DRIVE योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से 6,130 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसें बेड़े में शामिल की जा रही हैं. मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार मार्च 2027 तक दिल्ली में कुल 7,500 बसें चलाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनमें से 5,800 केवल इलेक्ट्रिक बसें होंगी. दूरगामी विजन के तहत, वर्ष 2029 तक दिल्ली की सड़कों पर 12,000 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही बस डिपो, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर व अन्य कैपिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विद्युतीकरण के लिए 320 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया गया है.
दिल्ली मेट्रो के नए चरणों को मिलेगी रफ्तार: दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो के विस्तार में धन की कमी आड़े नहीं आएगी. दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) के चरण चौथे और पांचवें चरण की परियोजनाओं को गति देने के लिए बजट में 2,885 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं. दिल्ली की भाजपा सरकार ने यह भी कहा है कि मेट्रो परियोजनाओं को सुचारू रखने के लिए पिछली सरकारों की 6,532 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान भी किया जा रहा है. इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में भी मेट्रो के लिए 2,224 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया था.
नमो भारत व आरआरटीएस: एनसीआर की दूरी होगी कम: एनसीआर के शहरों के बीच कनेक्टिविटी को और स्मार्ट बनाने के लिए दो और नमो भारत कॉरिडोर—दिल्ली-शाहजहांपुर-अलवर और दिल्ली-पानीपत-सोनीपत को मंजूरी दे दी गई है. इन हाई-स्पीड कॉरिडोर से न सिर्फ एनसीआर की कनेक्टिविटी सुधरेगी और प्रदूषण कम होगा, बल्कि यात्रा के समय में 60 प्रतिशत तक की भारी बचत होगी. इसके लिए आरआरटीएस परियोजना हेतु 568 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है.

जाम से मुक्ति व पैरेलल रिंग रोड की योजना: दिल्लीवासियों को ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार ने आउट ऑफ द बॉक्स समाधान सोचा है. शहर में फ्लाईओवर व एलिवेटेड रोड्स के जाल के साथ-साथ एक नई पैरेलल रिंग रोड की परिकल्पना की गई है. इसकी फिजिबिलिटी स्टडी शुरू करने के लिए बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रारंभिक आवंटन किया गया है. यह कदम भविष्य की दिल्ली में रफ्तार व सुव्यवस्थित यातायात सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.
ईवी पॉलिसी 2.0 व फिटनेस की हाई-टेक जांच: इलेक्ट्रिक वाहनों को आम जन तक पहुंचाने के लिए दिल्ली इलेक्ट्रिक वीकल पालिसी 2.0 के तहत 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. ये नीति पर्चेज और स्क्रैप प्रोत्साहन के जरिए 'जीरो एमिशन मोबिलिटी' को बढ़ावा देगी. व्यावसायिक वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नंद नगरी, बुराड़ी व तेहखंड में तीन ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) स्थापित किए जा रहे हैं. वित्त वर्ष 2026-27 में बवाना, गाजीपुर, सावदा घेवरा, जीटी करनाल रोड और ढिचाऊं कलां में 5 और नए एटीएस बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
कनेक्टिविटी के अन्य आयाम: दिल्ली में ई-बाइक्स, ई-ऑटो, ई-टैक्सी व भारत टैक्सी के माध्यम से निर्बाध कनेक्टिविटी दी जाएगी. इससे लोगों को राहत मिलेगी. इसके साथ ही महिलाओं व ट्रांसजेंडर्स के लिए डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा जारी रहेगी, जिसके लिए 450 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. सड़कों पर अतिरिक्त 50,000 कैमरे लगाने और उनके रखरखाव के लिए 225 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. ये बजट न सिर्फ दिल्ली के वर्तमान यातायात को सुधारने का प्रयास है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रदूषण मुक्त व तेज रफ्तार वाली राजधानी की ठोस नींव भी रखता है.
बजट पर क्या कहते हैं परिवहन एक्सपर्ट: दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के पूर्व उपायुक्त व ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट अनिल कुमार छिकारा का कहना है कि परिवहन व्यवस्था को विस्तार देने के लिए दिल्ली सरकार भारी बजट रखा है. यह सराहनीय है. नमो भारत ट्रेन के जरिए दिल्ली को जाम मुक्त करने का प्रयास सराहनीय है. जिस तरीके से दिल्ली में जाम और वाहनों का दबाव बढ़ रहा है. उसे देखते हुए दिल्ली को एनसीआर से जोड़कर भविष्य की ट्रैफिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर काम करना बेहद जरूरी है. आरआरटीएस के नए कोरिडोर से कंजेशन कम होगा.
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की बात दो हो रही है. लेकिन हर साल बसों में 10 प्रतिशत राइडरशिप कम हो रही है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह लास्ट माइल कनेक्टिविटी का अभाव है. ये ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट व प्लांनिंग करने वाले अधिकारियों की कमी है कि लास्ट माइल कनेक्टिविटी को बढ़ावा कम मिला. दिल्ली में ईवी को बढ़ावा देने के साथ सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवपमेंट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत थी. इसके साथ ही जो निजी ईवी चार्जिंग स्टेशन संचालक हैं उनको प्रोत्साहन और उनपर रेट को लेकर नियंत्रण की भी आवश्यकता है. दिल्ली मेट्रो को लास्ट और सेकेंड माइल कनेक्टिविटी की बुहत जरूरत है. दिल्ली मेट्रो अच्छी प्लानिंग के साथ काम कर रहा है. ई-रिक्शा की कंजेशन व स्थानीय प्रशानस के मिसमैनेजमेंट की समस्या पर भी काम करना बेहद जरूरी है.
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