दिल्ली विधानसभा: 'फांसी घर' विवाद में केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बार-बार समन भेजने के बाद भी केजरीवाल, सिसोदिया व अन्य पेश नहीं हुए.

Published : January 6, 2026 at 5:23 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी (विशेषाधिकार समिति) ने मंगलवार को सदन में 'फांसी घर' की प्रामाणिकता से जुड़ी अपनी पहली रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट में समिति ने आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, रामनिवास गोयल और राखी बिड़लान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है.
समिति का आरोप है कि बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद ये नेता पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए, जिसे सदन की अवमानना माना गया है. फांसीघर के मामले को लेकर विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत ने समिति द्वारा बुलाए जाने पर पेश नहीं होने वाले अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राखी बिड़लान सदन पर कार्रवाई की मांग की.
जानिए क्या है पूरा विवाद
यह विवाद विधानसभा परिसर में उस संरचना से जुड़ा है जिसे 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 'फांसी घर' के रूप में उद्घाटन किया था. उस समय AAP सरकार ने दावा किया था कि यह ब्रिटिश काल का वह स्थान है जहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी. हालांकि, 2025 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और 1912 के नक्शों का हवाला देते हुए दावा किया कि वह स्थान कभी फांसी घर नहीं था, बल्कि वह एक 'टिफिन रूम' था.

समिति की मुख्य सिफारिशें
प्रद्युम्न सिंह राजपूत की अध्यक्षता वाली विशेषाधिकार समिति ने मंगलवार को विधानसभा में अपनी रिपोर्ट दी, उसमें कई बातों का ज़िक्र है. 13 पेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, रामनिवास गोयल और राखी बिड़लान को 13 नवंबर और 20 नवंबर 2025 को पेश होने के लिए समन भेजा गया था, लेकिन वे बिना किसी ठोस कारण के अनुपस्थित रहे. समिति ने इसे "जानबूझकर की गई अवज्ञा" और संसदीय प्रक्रिया का अपमान करार दिया है. रिपोर्ट में सदन से सिफारिश की गई है कि इन नेताओं के खिलाफ "उचित और दंडात्मक कार्यवाही" की जाए.

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ करना और जनता के पैसे का दुरुपयोग कर एक 'फर्जी' स्मारक बनाना गंभीर अपराध है. वहीं, आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. पार्टी का कहना है कि यह शहीदों के सम्मान में बनाया गया एक प्रतीकात्मक स्मारक था और भाजपा राजनीतिक द्वेष के चलते प्रिविलेज कमेटी का दुरुपयोग कर रही है.
जानिए अब आगे क्या होगा
विशेषाधिकार समिति की इस रिपोर्ट पर अब सदन में चर्चा होगी. यदि सदन रिपोर्ट को स्वीकार कर लेता है, तो इन नेताओं पर जुर्माना लगाया जा सकता है या उन्हें सदन की अवमानना के लिए अन्य वैधानिक दंड का सामना करना पड़ सकता है.
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